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15 Dec 2019
"अपने श्रेष्ठ स्वमान के फ़खुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो"
15 December 2019 · हिंदी
15-12-2019 Avyakt BapDada 15-12-2019
आज बापदादा अपने चारों ओर के श्रेष्ठ स्वमानधारी विशेष बच्चों को देख रहे हैं। हर एक बच्चे का स्वमान इतना विशेष है जो विश्व में कोई भी आत्मा का नहीं है। आप सभी विश्व की आत्माओं के पूर्वज भी हो और पूज्य भी हो। सारे सृष्टि के वृक्ष की जड़ में आप आधारमूर्त हो। सारे विश्व के पूर्वज पहली रचना हो। बापदादा हर एक बच्चे की विशेषता को देख खुश होते हैं। चाहे छोटा बच्चा है, चाहे बुजुर्ग मातायें हैं, चाहे प्रवृत्ति वाले हैं। हर एक की अलग-अलग विशेषतायें हैं। आजकल कितने भी बड़े ते बड़े साइंसदान हैं, दुनिया के हिसाब से विशेष हैं जो प्रकृतिजीत तो बनें, चन्द्रमां तक भी पहुंच गये लेकिन इतनी छोटी सी ज्योति स्वरूप आत्मा को नहीं पहचान सकते! और यहाँ छोटा सा बच्चा भी मैं आत्मा हूँ, ज्योति बिन्दु को जानता है। फ़लक से कहता है “मैं आत्मा हूँ।'' कितने भी बड़े महात्मायें हैं और ब्राह्मण मातायें हैं, मातायें फ़लक से कहती हमने परमात्मा को पा लिया। पा लिया है ना! और महात्मायें क्या कहते? परमात्मा को पाना बहुत मुश्किल है। प्रवृत्ति वाले चैलेन्ज करते हैं कि हम सब प्रवृत्ति में रहते, साथ रहते पवित्र रहते हैं क्योंकि हमारे बीच में बाप है इसलिए दोनों साथ रहते भी सहज पवित्र रह सकते हैं क्योंकि पवित्रता हमारा स्वधर्म है। पर धर्म मुश्किल होता है, स्व धर्म सहज होता है। और लोग क्या कहते? आग और कपूस साथ में रह नहीं सकते। बड़ा मुश्किल है और आप सब क्या कहते? बहुत सहज है। आप सबका शुरू शुरू का एक गीत था - कितने भी सेठ, स्वामी हैं लेकिन एक अल्फ को नहीं जाना है। छोटी सी बिन्दी आत्मा को नहीं जाना लेकिन आप सभी बच्चों ने जान लिया, पा लिया। इतने निश्चय और फ़खुर से बोलते हो, असम्भव सम्भव है। बापदादा भी हर एक बच्चे को विजयी रत्न देख हर्षित होते हैं क्योंकि हिम्मते बच्चे मददे बाप है इसलिए दुनिया के लिए जो असम्भव बातें हैं वह आपके लिए सहज और सम्भव हो गई हैं। फ़खुर रहता है कि हम परमात्मा के डायरेक्ट बच्चे हैं! इस नशे के कारण, निश्चय के कारण परमात्म बच्चे होने के कारण माया से भी बचे हुए हो। बच्चा बनना अर्थात् सहज बच जाना। तो बच्चे हो और सब विघ्नों से, समस्याओं से बचे हुए हो।
तो अपने इतने श्रेष्ठ स्वमान को जानते हो ना! क्यों सहज है? क्योंकि आप साइलेन्स की शक्ति द्वारा, परिवर्तन शक्ति को कार्य में लगाते हो। निगेटिव को पॉजिटिव में परिवर्तन कर लेते हो। माया कितने भी समस्या के रूप में आती है लेकिन आप परिवर्तन की शक्ति से, साइलेन्स की शक्ति से समस्या को समाधान स्वरूप बना देते हो। कारण को निवारण रूप में बदल देते हो। है ना इतनी ताकत? कोर्स भी कराते हो ना! निगेटिव को पॉजिटिव करने की विधि सिखाते हो। यह परिवर्तन शक्ति बाप द्वारा वर्से में मिली है। एक ही शक्ति नहीं, सर्वशक्तियां परमात्म वर्सा मिला है, इसीलिए बापदादा हर रोज़ कहते हैं, हर रोज़ मुरली सुनते हो ना! तो हर रोज़ बापदादा यही कहते - बाप को याद करो और वर्से को याद करो। बाप की याद भी सहज क्यों आती है? जब वर्से की प्राप्ति को याद करते तो बाप की याद प्राप्ति के कारण सहज आ जाती है। हर एक बच्चे को यह रूहानी फ़खुर रहता है, दिल में गीत गाते हैं - पाना था वो पा लिया। सभी के दिल में यह स्वत: ही गीत बजता है ना! फ़खुर है ना! जितना इस फ़खुर में रहेंगे तो फ़खुर की निशानी है, बेफिक्र होंगे। अगर किसी भी प्रकार का संकल्प में, बोल में या सम्बन्ध-सम्पर्क में फिकर रहता है तो फ़खुर नहीं है। बापदादा ने बेफिक्र बादशाह बनाया है। बोलो, बेफिक्र बादशाह हो? हैं तो हाथ उठाओ जो बेफिकर बादशाह हैं? बेफिकर हो या कभी-कभी फिकर आ जाता है? अच्छा है। जब बाप बेफिक्र है, तो बच्चों को क्या फिकर है।
बापदादा ने तो कह दिया है सब फिक्र वा किसी भी प्रकार का बोझ है तो बापदादा को दे दो। बाप सागर है ना। तो बोझ सारा समा जायेगा। कभी बापदादा बच्चों का एक गीत सुनके मुस्कराता है। पता है कौन सा गीत? क्या करें, कैसे करें.... कभी-कभी तो गाते हो ना। बापदादा तो सुनता रहता है। लेकिन बापदादा सभी बच्चों को यही कहते हैं - हे मीठे बच्चे, लाडले बच्चे साक्षी-दृष्टा के स्थिति की सीट पर सेट हो जाओ और सीट पर सेट होके खेल देखो, बहुत मज़ा आयेगा, वाह! त्रिकालदर्शी स्थिति में स्थित हो जाओ। सीट से नीचे आते इसलिए अपसेट होते हो। सेट रहो तो अपसेट नहीं होंगे। कौन सी तीन चीज़ें बच्चों को परेशान करती हैं? 1- चंचल मन, 2- भटकती बुद्धि और 3- पुराने संस्कार। बापदादा को बच्चों की एक बात सुनकर हंसी आती है, पता है कौन सी बात है? कहते हैं बाबा क्या करें, मेरे पुराने संस्कार हैं ना! बापदादा मुस्कराता है। जब कह ही रहे हो, मेरे संस्कार, तो मेरा बनाया है? तो मेरे पर तो अधिकार होता ही है। जब पुराने संस्कार को मेरा बना दिया, तो मेरा तो जगह लेगा ना! क्या यह ब्राह्मण आत्मा कह सकती है मेरे संस्कार? मेरा-मेरा कहा है तो मेरे ने अपनी जगह बना दी है। आप ब्राह्मण मेरा नहीं कह सकते। यह पास्ट जीवन के संस्कार हैं। शूद्र जीवन के संस्कार हैं। ब्राह्मण जीवन के नहीं हैं। तो मेरा-मेरा कहा है तो वह भी मेरे अधिकार से बैठ गये हैं। ब्राह्मण जीवन के श्रेष्ठ संस्कार जानते हो ना! और यह संस्कार जिनको आप पुराने कहते हो, वह भी पुराने नहीं हैं, आप श्रेष्ठ आत्माओं का पुराने ते पुराना संस्कार अनादि और आदि संस्कार है। यह तो द्वापर, मध्य के संस्कार हैं। तो मध्य के संस्कार को बाप की मदद से समाप्त कर देना, कोई मुश्किल नहीं है। परन्तु होता क्या है? बाप जो सदा आपके साथ कम्बाइन्ड है, उसे कम्बाइन्ड जान सहयोग नहीं लेते, कम्बाइन्ड का अर्थ ही है समय पर सहयोगी। लेकिन समय पर सहयोग न लेने के कारण मध्य के संस्कार महान बन जाते हैं।
बापदादा यही चाहते हैं कि सब पूज्यनीय आत्मायें हैं, तो पूज्यनीय आत्माओं का विशेष लक्षण दुआ देना ही है। तो आप सभी जानते हो कि आप सभी पूज्यनीय आत्मायें हो? तो यह दुआ देना अर्थात् दुआ लेना अण्डरस्टुड हो जाता है। जो दुआ देता है, जिसको देते हैं उसकी दिल से बार-बार देने वाले के लिए दुआ निकलती है। तो हे पूज्य आत्मायें आपका तो निजी संस्कार है - दुआ देना। अनादि संस्कार है दुआ देना। जब आपके जड़ चित्र भी दुआ दे रहे हैं तो आप चैतन्य पूज्य आत्माओं का तो दुआ देना, यह नेचुरल संस्कार है। इसको कहो मेरा संस्कार। मध्य, द्वापर के संस्कार नेचुरल और नेचर हो गये हैं। वास्तव में यह संस्कार दुआ देने के नेचुरल नेचर है। जब किसी को दुआ देते हैं, तो वह आत्मा कितनी खुश होती है, वह खुशी का वायुमण्डल कितना सुखदाई होता है! तो जिन्होंने भी किया है, उन सबको, चाहे आये हैं, चाहे नहीं आये हैं, लेकिन बापदादा के सामने हैं। तो उन्हों को बापदादा मुबारक दे रहे हैं। किया है तो उसे अपनी नेचुरल नेचर बनाते हुए आगे भी करते, कराते रहना। और जिन्होंने थोड़ा बहुत किया है, नहीं भी किया है तो वह सभी अपने को सदा मैं पूज्य आत्मा हूँ, मैं बाप की श्रीमत पर चलने वाली विशेष आत्मा हूँ, इस स्मृति को बार-बार अपनी स्मृति और स्वरूप में लाना क्योंकि हर एक से जब पूछते हैं कि आप क्या बनने वाले हो? तो सब कहते हैं हम लक्ष्मी-नारायण बनने वाले हैं। राम-सीता में कोई नहीं हाथ उठाता। जब लक्ष्य है, 16 कला बनने का। तो 16 कला अर्थात् परमपूज्य, पूज्य आत्मा का कर्तव्य ही है - दुआ देना। यह संस्कार चलते-फिरते सहज और सदा के लिए बनाओ। हो ही पूज्य। हो ही 16 कला। लक्ष्य तो यही है ना!
तो संकल्प करो, बाप के प्यार में माया कितने भी तूफान सामने लाये लेकिन मास्टर सर्वशक्तिवान आत्माओं के आगे तूफान भी तोह़फा बन जायेगा। ऐसा वरदान सदा याद करो। कितना भी ऊंचा पहाड़ हो, पहाड़ बदल के रूई बन जायेगा। अभी समय की समीपता प्रमाण वरदानों को हर समय अनुभव में लाओ। अनुभव की अथॉरिटी बनो।
जब चाहो तब अपने अशरीरी बनने की, फरिश्ता स्वरूप बनने की एक्सरसाइज़ करते रहो। अभी-अभी ब्राह्मण, अभी-अभी फरिश्ता, अभी-अभी अशरीरी, चलते फिरते, कामकाज करते हुए भी एक मिनट, दो मिनट निकाल अभ्यास करो। चेक करो जो संकल्प किया, वही स्वरूप अनुभव किया? अच्छा।
चारों ओर के सदा श्रेष्ठ स्वमानधारी, सदा स्वयं को परमपूज्य और पूर्वज अनुभव करने वाले, सदा अपने को हर सबजेक्ट में अनुभवी स्वरूप बनाने वाले, सदा बाप के दिलतख्त नशीन, भ्रकुटी के तख्त नशीन, सदा श्रेष्ठ स्थिति के अनुभवों में स्थित रहने वाले, चारों ओर के सभी बच्चों को यादप्यार और नमस्ते।
सभी तरफ से सभी के पत्र, ईमेल, समाचार सभी बापदादा के पास पहुंच गये हैं, तो सेवा का फल और बल, सभी सेवाधारियों को प्राप्त है और होता रहेगा। प्यार के पत्र भी बहुत आते हैं, परिवर्तन के पत्र भी बहुत आते हैं। परिवर्तन की शक्ति वालों को बापदादा अमर भव का वरदान दे रहे हैं। जिन सेवाधारियों ने श्रीमत को पूरा फालो किया है, ऐसे फालो करने वाले बच्चों को बापदादा कहते “सदा फरमानबरदार बच्चे वाह!'' बापदादा यह वरदान दे रहे हैं और प्यार वालों को बहुत-बहुत प्यार से दिल में समाने वाले अति प्यारे और अति माया के विघ्नों से न्यारे, ऐसा वरदान दे रहे हैं। अच्छा।
सेवा कर्नाटक ज़ोन की है:- अच्छा है, सेवा का जो चांस लिया है, वह भी सभी सन्तुष्ट हैं और सन्तुष्ट किया है, इससे अपने जमा का खाता बहुत अच्छा जमा किया है। कर्नाटक की संख्या भी कम नहीं है, संख्या अच्छी है और जैसे अभी संगठित रूप में मिलकर निर्विघ्न सेवा का रिकार्ड दिखाया है, ऐसे ही आगे भी कर्नाटक संगठित रूप में बहुत कुछ कमाल कर सकते हैं। बापदादा के पास नक्शा है, कमाल कर सकते हैं इसलिए संगठित रूप का जलवा दिखाना। अभी अच्छा किया है। सारा परिवार कर्नाटक पर खुश है। अच्छा! बापदादा ने कर्नाटक वालों को काम दिया था, याद है, क्या दिया था? वारिस क्वालिटी निकालने के लिए कहा था, याद है? सेवा में तो अच्छा नम्बर लिया, अभी इतने वारिस निकालो जो नम्बरवन आ जाओ। अच्छा!
डबल विदेशी:- अभी बापदादा ने देखा है कि विदेश में भी सेवा का उमंग अच्छा बढ़ रहा है। पहले कहते थे विदेश में स्टूडेन्ट बनना बड़ा मुश्किल है और अभी क्या है? अभी मुश्किल है या सहज है? सहज है?
बापदादा ने देखा कि जैसे अभी हर साल वृद्धि करके बाप के सामने ला रहे हो, ऐसे आगे भी ज्यादा से ज्यादा वृद्धि करते रहेंगे। बाप और अपनी प्रत्यक्षता करते रहेंगे। अच्छा ग्रुप है। सभी निश्चयबुद्धि और ईश्वरीय नशे में रहने वाले, उड़ने वाले हैं। चलने वाले नहीं बनना, उड़ने वाले। चलने वाले समय पर नहीं पहुंच सकेंगे, उड़ने वाले बनना, डबल लाइट। बाकी बापदादा खुश है। जो किया वह सफल हो गया। तो आप सब कौन हुए? सफलता के सितारे। अच्छा है। बहुत अच्छा!
टीचर्स सभी उ ठो :- टीचर्स भी कम नहीं हैं। बापदादा तो सभी टीचर्स को गुरूभाई देखते हैं। गुरूभाई का अर्थ है बाप समान। तो टीचर्स को विशेष हर कर्म बाप समान करना ही है। करेंगे नहीं, करना ही है क्योंकि टीचर्स बाप की तरफ से स्टूडेन्ट के आगे एक निमित्त साकार रूप में बाप समान हैं। टीचर का हर कर्म स्टूडेन्ट के आगे बाप समान दिखाई दे। सबके मुख से निकले यह तो बाप को फॉलो कर बाप समान बने हुए हैं। तो ऐसा लक्ष्य है ना। यही लक्ष्य है ना। कांध हिलाओ। टीचर निमित्त हैं। तो निमित्त के ऊपर जिम्मेवारी भी है ना। तो फालो कर रही हो लेकिन और भी आगे करना है। लक्ष्य बहुत अच्छा है। और बाप तो यही हर टीचर में शुभ भावना रखते हैं कि बाप समान बनना ही है। अच्छा।
दादी जानकी:- ओम् शान्ति। सारी दुनिया को पता चलता है डायमण्ड हाल में क्या क्या हो रहा है। जीवन जीना है तो कैसे, अगर मरना भी होगा तो कैसे। एक बाबा दूसरा हम आत्मा, वाह रे वाह बाबा। व्हाई व्हाई नहीं। क्योंकि कईयों को व्हाई कहना अच्छा लगता है। वाह मीठे बाबा के बच्चे वाह! बाबा के बच्चों को सुख मिला है इलाही। किसी को न दु:ख देना, न लेना। सिर्फ बोलना नहीं है, प्रैक्टिकल करना है। कोई हमारे को दु:ख देवे, हम लेवे नहीं। वह बिचारा है ना। बाबा के सब बच्चों ने बाबा को अपने दिलतख्त पर बिठा दिया है। हमें वाणी से परे वानप्रस्थ में रहना है। दिलाराम बाबा है, उसके तीनों बच्चे सुख शान्ति प्रेम अच्छी सेवा कर रहे हैं। इतनी सारी सभा को देख शुक्रिया बाबा आपका। आप सबको बुलाते हो, खिलाते हो, सबको खाना ठीक मिलता है ना। सोने का ठीक मिलता है ना।
गुल्जार दादी बाबा का रथ है ना। हमें जो बाबा कहे वह करना ही है। दादी गुल्जार अभी वहाँ सुन रही है ना। सुनो दादी, देखो, हमारे शान्तिवन में कितना बड़ा डायमण्ड हाल है। सारा हाल फुल है। सब आपको याद कर रहे हैं। अच्छा। ओम् शान्ति।
31-12-19 ओम् शान्ति “दिनचर्या” मधुबन
प्राणप्यारे अव्यक्तमूर्त मात-पिता बापदादा के अति लाडले, सदा परिवर्तन शक्ति द्वारा हर निगेटिव को पॉजिटिव में परिवर्तन करने वाले, बाप समान ब्राह्मण सो फरिश्ता स्वरूप में स्थित रहने वाली निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद के साथ-साथ नये वर्ष की, नये युग के आगमन की बहुत-बहुत बधाईयां स्वीकार हो।
बाद समाचार - कल नया वर्ष 2020 प्रारम्भ हो रहा है। प्यारा बाबा कहते बच्चे, नये वर्ष में कुछ ऐसी नवीनता सम्पन्न सेवा करो जो सहज बाप की प्रत्यक्षता हो जाए। एक ओर जयजयकार, दूसरी ओर हाहाकार... अभी तो ऐसा ही समय समीप दिखाई दे रहा है। अव्यक्त मास में तो चारों ओर विशेष तपस्या की बहुत अच्छी लहर है। सब तरफ योग तपस्या की भट्ठियां चल रही हैं। हर एक बाप समान बनने के पुरुषार्थ को लक्ष्य में रख डबल लाइट रह उड़ती कला में उड़ रहे हैं। मधुबन से जो विशेष पुरुषार्थ की प्वाइंटस भेजी गई हैं उसी अनुसार सभी अच्छी रेस कर रहे हैं। अब तो बाबा यही चाहते हैं कि बच्चे हर सेकण्ड, हर श्वांस, हर खजाने को सफल कर सफलता मूर्त बनें। अचानक के पाठ को सदा स्मृति में रखते हुए एवररेडी रहें। सभी खजानों से भरपूर बन सम्पर्क-सम्बन्ध में आने वाली आत्माओं को दान करते, दानी और वरदानी बनें। सदा मुस्कराते हुए सबको कोई न कोई गिफ्ट देते रहें।
बोलो, ऐसा ही लक्ष्य रख तीव्र पुरुषार्थ चल रहा है ना! इस नये वर्ष में हर एक को कोई न कोई नवीनता सम्पन्न पुरुषार्थ और सेवायें करनी ही हैं।
इस सीज़न में बापदादा की इस वरदान भूमि में आकर, उनकी आकारी और निराकारी रूप की पालना के बहुत अच्छे-अच्छे अनुभव सभी कर रहे हैं। अभी तो पंजाब ज़ोन की सेवाओं का टर्न है और भी देश विदेश के कई ग्रुप नया वर्ष मनाने के लिए मधुबन में पहुंचे हुए हैं। करीब 20 हजार भाई बहिनों का संगठन है। डबल विदेशी बाबा के बच्चों की तो सदा ही रिमझिम रहती है। देखो, हम सबकी अति मीठी, सबको अपने स्नेह की पालना देने वाली दादी जानकी जी का 104 वां जन्म दिन भी कल पहली जनवरी को हम सब खूब धूमधाम से मनायेंगे, दादी जी को हम सभी यही दुआयें देते कि जब तक संगमयुग है तब तक दादी जी हम सबके साथ रहकर सदा ऐसे ही गुणदान, ज्ञान दान करते सबकी पालना करती रहें। सदा स्वस्थ रहें। इस समय हमारी मुख्य 4 दादियां हमारे इस पूरे ब्राह्मण परिवार का श्रंगार हैं। हमारी मीठी गुल्जार दादी तो सदा ही दादी जानकी जी के साथ-साथ हर ब्राह्मण आत्मा के दिल में बसती हैं। फिर हैं हमारी मीठी दादी रतनमोहनी जी और ईशू दादी जी, जो समय प्रति समय सभी को ज्ञान रत्नों से सजाते, अपनी वरदानी मूर्त से सबको स्नेह सम्पन्न पालना दे रही हैं। सभी दादियों की ओर से, बड़े भाईयों की ओर से सबको नये वर्ष की उमंग-उत्साह भरी बहुत-बहुत बधाईयां स्वीकार हों। अच्छा - सभी को बहुत-बहुत याद... ओम् शान्ति।