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10 Oct 2021
"समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो"
10 October 2021 · हिंदी
10-10-2021 मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 10-10-2021
ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - हम सभी ब्रह्मा वत्स प्राणप्यारे अव्यक्त बापदादा की दिव्य पालना का अलौकिक अनुभव करने के लिए सदा ही उत्साहित रहते हैं। सभी के दिलों में मधुबन बेहद घर की याद सदा ही बनी रहती है। जो अव्यक्त पालना साकार रूप में आदरणीय गुल्जार दादी जी के माध्यम द्वारा अव्यक्त वतनवासी प्राणप्यारे बापदादा ने हम सबको दी है, वह अमिट, अलौकिक है।
बापदादा के अव्यक्त महावाक्य सुनते वह दिन नयनों के सामने आ जाते हैं। बापदादा जब हजारों भाई बहिनों की सभा के बीच में अवतरित होते और चारों ओर जैसे ज्ञान सूर्य की किरणें पूरे वायुमण्डल में फैल जाती। सभी अपने-अपने स्थानों पर रहते भी प्यारे बापदादा की शक्तिशाली दृष्टि से, उनके वरदानी बोल से स्वयं को भरपूर अनुभव करते हैं। हर 15 दिन के बाद बापदादा बच्चों को एक नया होमवर्क देते और सभी उसी अनुसार तीव्र पुरुषार्थ करते हैं। अभी यह पहला टर्न उत्तरप्रदेश के भाई बहिनों से शुरू हुआ है। सम्मुख में भल संगठन छोटा है लेकिन चारों ओर बाबा के अनेकानेक बच्चे चात्रक बन अव्यक्त मिलन के अनुभव में समाते हुए सभी अपने-अपने टर्न का इन्तजार कर रहे हैं। इस सीज़न में टोटल 12 ग्रुप में हम सभी विशेष अलौकिक अनुभूतियां करते रहेंगे। अच्छा - सभी को बहुत-बहुत याद... ओम् शान्ति।
10-10-21 ओम् शान्ति अव्यक्त बापदादा वीडियो रिवाइज 15-12-2002 मधुबन
आज चारों ओर के सर्व स्वमानधारी बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं। इस संगम पर जो आप बच्चों को स्वमान मिलता है उससे बड़ा स्वमान सारे कल्प में किसी भी आत्मा को प्राप्त नहीं हो सकता है। कितना बड़ा स्वमान है, इसको जानते हो? स्वमान का नशा कितना बड़ा है, यह स्मृति में रहता है? स्वमान की माला बहुत बड़ी है। एक एक दाना गिनते जाओ और स्वमान के नशे में लवलीन हो जाओ। यह स्वमान अर्थात् टाइटल्स स्वयं बापदादा द्वारा मिले हैं। परमात्मा द्वारा स्वमान प्राप्त हैं इसलिए इस स्वमान के रूहानी नशे को कोई अथॉरिटी नहीं जो हिला सके क्योंकि आलमाइटी अथॉरिटी द्वारा प्राप्ति है।
तो बापदादा ने आज अमृतवेले सारे विश्व के सर्व बच्चों के तरफ चक्कर लगाते देखा कि हर एक बच्चे की स्मृति में कितने स्वमानों की माला पड़ी हुई है। माला को धारण करना अर्थात् स्मृति द्वारा उसी स्थिति में स्थित रहना। तो अपने को चेक करो - यह स्मृति की स्थिति कहाँ तक रहती है? बापदादा देख रहे थे कि स्वमान का निश्चय और उसका रूहानी नशा दोनों का बैलेन्स कितना रहता है? निश्चय है - नॉलेजफुल बनना और रूहानी नशा है - पावरफुल बनना। तो नॉलेजफुल में भी दो प्रकार देखे - एक है नॉलेजफुल। दूसरे हैं नॉलेजेबुल (ज्ञान स्वरूप) तो अपने से पूछो - मैं कौन? बापदादा जानते हैं कि बच्चों का लक्ष्य बहुत ऊंचा है। लक्ष्य ऊंचा है ना, क्या ऊंचा है? सभी कहते हैं बाप समान बनेंगे। तो जैसे बाप ऊंचे ते ऊंचा है तो बाप समान बनने का लक्ष्य कितना ऊंचा है! तो लक्ष्य को देख बापदादा बहुत खुश होते हैं लेकिन.... लेकिन बतायें क्या? लेकिन क्या... वह टीचर्स वा डबल फारेनर्स सुनेंगे? समझ तो गये होंगे। बापदादा लक्ष्य और लक्षण समान चाहते हैं। अभी अपने से पूछो कि लक्ष्य और लक्षण अर्थात् प्रैक्टिकल स्थिति समान है? क्योंकि लक्ष्य और लक्षण का समान होना - यही बाप समान बनना है। समय प्रमाण इस समानता को समीप लाओ।
वर्तमान समय बापदादा बच्चों की एक बात देख नहीं सकते। कई बच्चे भिन्न-भिन्न प्रकार की बाप समान बनने की मेहनत करते हैं, बाप की मोहब्बत के आगे मेहनत करने की आवश्यकता ही नहीं है, जहाँ मोहब्बत है वहाँ मेहनत नहीं। जब उल्टा नशा देह-अभिमान का नेचर बन गई, नेचुरल बन गया। क्या देह-अभिमान में आने में पुरुषार्थ करना पड़ता? या 63 जन्म पुरुषार्थ किया? नेचर बन गई, नेचुरल बन गया। जो अभी भी कभी-कभी यही कहते हो कि देही के बजाए देह में आ जाते हैं। तो जैसे देह-अभिमान, नेचर और नेचुरल रहा वैसे अभी देही-अभिमानी स्थिति भी नेचुरल और नेचर हो, नेचर बदलना मुश्किल होती है। अभी भी कभी-कभी कहते हो ना कि मेरा भाव नहीं है, नेचर है। तो उस नेचर को नेचुरल बनाया है और बाप समान नेचर को नेचुरल नहीं बना सकते! उल्टी नेचर के वश हो जाते हैं और यथार्थ नेचर बाप समान बनने की, इसमें मेहनत क्यों? तो बापदादा अभी सभी बच्चों की देही-अभिमानी रहने की नेचुरल नेचर देखने चाहते हैं। ब्रह्मा बाप को देखा चलते-फिरते कोई भी कार्य करते देही-अभिमानी स्थिति नेचुरल नेचर थी।
बापदादा ने समाचार सुना कि आजकल विशेष दादियां यह रूहरिहान करती हैं - फरिश्ता अवस्था, कर्मातीत अवस्था, बाप समान अवस्था नेचुरल कैसे बनें? नेचर बन जाए, यह रूहरिहान करते हो ना! दादी को भी यही बार-बार आता है ना - फरिश्ता बन जाएं, कर्मातीत बन जाएं, बाप प्रत्यक्ष हो जाए। तो फरिश्ता बनना वा निराकारी कर्मातीत अवस्था बनने का विशेष साधन है - निरहंकारी बनना। निरंहकारी ही निराकारी बन सकता है इसलिए बाप ने ब्रह्मा द्वारा लास्ट मत्र निराकारी के साथ निरहंकारी कहा। देह अहंकार वा देह अभिमान सिर्फ अपनी देह या दूसरे की देह में फंसना, इसको ही देह अहंकार या देह-भान नहीं कहा जाता है। देह अहंकार भी है, देह भान भी है। अपनी देह या दूसरे की देह के भान में रहना, लगाव में रहना - उसमें तो मैजारिटी पास हैं। जो पुरुषार्थ की लगन में रहते हैं, सच्चे पुरुषार्थी हैं, वह इस मोटे रूप से परे हैं। लेकिन देह-भान के सूक्ष्म अनेक रूप हैं, इसकी लिस्ट आपस में निकालना। बापदादा आज नहीं सुनाते हैं। आज इतना ही इशारा बहुत है क्योंकि सभी समझदार हैं। आप सब जानते हो ना, अगर सभी से पूछेंगे ना, तो सब बहुत होशियारी से सुनायेंगे। लेकिन बापदादा सिर्फ छोटा सा सहज पुरुषार्थ बताते हैं कि सदा मन-वचन-कर्म, सम्बन्ध-सम्पर्क में लास्ट मंत्र तीन शब्दों का (निराकारी, निरहंकारी, निर्विकारी) सदा याद रखो। संकल्प करते हो तो चेक करो - महामंत्र सम्पन्न है? ऐसे ही बोल, कर्म सबमें सिर्फ तीन शब्द याद रखो और समानता करो। यह तो सहज है ना? सारी मुरली नहीं कहते हैं याद करो, तीन शब्द। यह महामंत्र संकल्प को भी श्रेष्ठ बना देगा। वाणी में निर्मानता लायेगा। कर्म में सेवा भाव लायेगा। सम्बन्ध-सम्पर्क में सदा शुभ भावना, श्रेष्ठ कामना की वृत्ति बनायेगा।
बापदादा सेवा का समाचार भी सुनते हैं, सेवा में आजकल भिन्न-भिन्न कोर्स कराते हो, लेकिन अभी एक कोर्स रह गया है। वह है हर आत्मा में जो शक्ति चाहिए, वह फोर्स का कोर्स कराना। शक्ति भरने का कोर्स, वाणी द्वारा सुनाने का कोर्स नहीं, वाणी के साथ-साथ शक्ति भरने का कोर्स भी हो। जिससे अच्छा-अच्छा कहें नहीं लेकिन अच्छा बन जाएं। यह वर्णन करें कि आज मुझे शक्ति की अंचली मिली। अंचली भी अनुभव हो तो उन आत्माओं के लिए बहुत है। कोर्स कराओ लेकिन पहले अपने को कराके फिर कहो। तो सुना बापदादा क्या चाहते हैं? लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ। लक्ष्य सभी का देखकर बापदादा बहुत-बहुत खुश होते हैं। अब सिर्फ समान बनाओ, तो बाप समान बहुत सहज बन जायेंगे।
बापदादा तो बच्चों को समान से भी ऊंचा, अपने से भी ऊंचा देखते हैं। सदा बापदादा बच्चों को सिर का ताज कहते हैं। तो ताज तो सिर से भी ऊंचा होता है ना! टीचर्स - सिर के ताज हो?
डबल फारेनर्स खड़े हो जाओ अच्छा है, देखो कितना बाप से प्यार है, कितने समुद्र पार करके आते हैं। बापदादा को डबल विदेशियों पर नाज़ है, प्यार तो सभी से है लेकिन प्यार के साथ नाज़ भी है कि बाप का सन्देश कोने-कोने में फैलाने के लिए निमित्त बन गये। नहीं तो इण्डिया की बहिनें पहले तो लैंग्वेज (भाषा) सीखें फिर सन्देश देवें। लेकिन आप लोगों ने देखो चैरिटी बिगन्स एट होम करके दिखाया है। तो बहुत अच्छा सन्देश-वाहक बने हो। एक-एक बच्चे की विशेषता देख-देख बापदादा बहुत खुश होते हैं। एक बात की डबल विदेशियों में विशेषता है। भारत के विशेषता की लिस्ट अपनी है लेकिन अभी डबल विदेशियों के विशेषता की बात है। तो डबल विदेशी अनुभव से कहते हैं हम ब्रह्मा के बच्चे हैं। हैं विदेशी लेकिन अनुभव से कहते हैं सिर्फ दिमाग से नहीं। दिल से कहते हैं हम ब्रह्माकुमार हैं, हम ब्रह्माकुमारी हैं। दिल से, अनुभव से कहते हो ना! कहने से नहीं कहते, सुनने से नहीं कहते, अनुभव से कहते हैं। रूहानी नशा है ना, ब्रह्माकुमार-ब्रह्माकुमारी बनने का। है नशा? जितना नशा है उतना जोर से हाथ हिलाओ। यह तो बापदादा भी वेरीफाय करते हैं कि ब्रह्माकुमार और ब्रह्माकुमारी का नशा है।
यू.पी. के सेवाधारियों से:- हर एक ने अपना एक टर्न में अविनाशी पुण्य का खाता बना दिया। थोड़े समय की सेवा अनेक जन्मों के पुण्य की लकीर, भाग्य की बना ली। तो चतुरसुजान निकले ना! एक जन्म में अनेक जन्मों का बना दिया। बापदादा सेवाधारियों को देख विशेष खुश होता है, क्यों? क्यों खुश होता है? क्योंकि आप सब पुरानों को याद होगा कि ब्रह्मा बाप जब साइन करते थे तो क्या करते थे? वर्ल्ड सर्वेन्ट। सेवाधारी। और निराकार बाप भी किसलिए आया है? सेवाधारी बनकर आया है ना? इसलिए बापदादा को सेवाधारी बहुत याद आते, प्यारे लगते हैं। और यह भी अच्छा है जो मैजारिटी सभी आत्माओं को यज्ञ सेवा का पुण्य प्रोग्राम प्रमाण मिल जाता है। यह भी अच्छा है। अच्छा।
यू.पी. की सेवाधारी टीचर्स ठीक है ना? बहुत अच्छा। बापदादा ने कहा ना टीचर्स को सदा बापदादा गुरूभाई के रूप में देखता है। अच्छा।
बापदादा ने जो रूहानी एक्सरसाइज़ दी है, वह सारे दिन में कितने बार करते हो? और कितने समय में करते हो? निराकारी और फरिश्ता। बाप और दादा, अभी-अभी निराकारी, अभी-अभी फरिश्ता स्वरूप। दोनों में देह-भान नहीं है। तो देह-भान से परे होना है तो यह रूहानी एक्सरसाइज़ कर्म करते भी अपनी ड्युटी बजाते हुए भी एक सेकण्ड में अभ्यास कर सकते हो। यह एक नेचुरल अभ्यास हो जाए - अभी-अभी निराकारी, अभी-अभी फरिश्ता। अच्छा। (बापदादा ने ड्रिल कराई)
ऐसे निरन्तर भव! चारों ओर के बापदादा की याद में मगन रहने वाले बाप समान बनने के लक्ष्य को लक्षण में समान बनाने वाले, जो कोने-कोने में साइंस के साधनों से दिन वा रात जाग करके बैठे हुए हैं, उन बच्चों को भी बापदादा यादप्यार, मुबारक और दिल की दुआयें दे रहे हैं। बापदादा जानते हैं सभी के दिल में इस समय दिलाराम बाप की याद समाई हुई है। हर एक कोने-कोने में बैठे हुए बच्चों को बापदादा पर्सनल नाम से यादप्यार दे रहे हैं। नामों की माला जपें तो रात पूरी हो जायेगी। बापदादा सभी बच्चों को याद देते हैं, चाहे पुरुषार्थ में कौन सा भी नम्बर हो लेकिन बापदादा सदा हर बच्चे के श्रेष्ठ स्वमान को यादप्यार देते हैं और नमस्ते करते हैं। यादप्यार देने के समय बापदादा के सामने चारों ओर का हर बच्चा याद है। कोई एक बच्चा भी किसी भी कोने में, गांव में, शहर में, देश में, विदेश में, जहाँ भी है, बापदादा उसको स्वमान याद दिलाते हुए यादप्यार देते हैं। सब यादप्यार के अधिकारी हैं क्योंकि बाबा कहा तो यादप्यार के अधिकारी हैं ही। आप सभी सम्मुख वालों को भी बापदादा स्वमान के मालाधारी स्वरूप में देख रहे हैं। सभी को बाप समान स्वमान स्वरूप में यादप्यार और नमस्ते।