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18 Jan 2023
"वर्ल्ड अथॉरिटी के डायरेक्ट बच्चे हैं - इस स्मृति को इमर्ज रख सर्व शक्तियों को ऑर्डर से चलाओ '"
18 January 2023 · हिंदी
18-01-2023 मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 18-01-2023
प्राण प्यारे अव्यक्त बापदादा के अति स्नेही, सदा स्नेह की लहरों में लहराने वाले, स्नेह के सागर में समाये हुए स्मृति सो समर्थ स्वरूप निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सभी बाबा के नूरे रत्न, ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - इस जनवरी मास में चारों ओर सभी ईश्वरीय परिवार के भाई बहिनें बहुत अच्छी योग तपस्या कर रहे हैं। सभी के दिल में यही उमंग है कि अब हमें बाप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण बनना ही है। बापदादा ने हम सभी बच्चों को सर्व समर्थियों का वरदान देकर मास्टर सर्वशक्तिवान बनाया है। बाबा कहते बच्चे, जिस समय जिस शक्ति की आवश्यकता हो, उसका आह्वान करो और उसी समय हाज़िर हो जाए। यह शक्तियां ही संगमयुग की विशेष परमात्म प्रॉपर्टी है। सिर्फ अधिकार से स्मृति स्वरूप की सीट से आर्डर करो, वर्ल्ड अथॉरिटी के डायरेक्ट बच्चे हैं, इस स्मृति का नशा सदा इमर्ज रहे, तो समय पर शक्ति काम आयेगी। बापदादा समय प्रमाण बार-बार यही इशारा देते हैं बच्चे अब बचत की स्कीम बनाओ। व्यर्थ की लीकेज को समाप्त करो। इस वरदानी मास में तो सभी ने ऐसा ही अनुभव किया है। स्मृति दिवस के दिन तो अमृतवेले से ही सभी बच्चे बाबा के प्यार में समा जाते हैं। बहुत से सेवाकेन्द्रों पर चार धाम भी बनाये हुए हैं, सब चारों धामों में जाते, बाबा से मीठी मीठी रूहरिहान करते हैं।
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मधुबन के चारों धामों को बहुत सुन्दर वैरायटी रंग-बिरंगे सुन्दर फूल मालाओं से सजाया गया है। सभी ठण्डी-ठण्डी हवाओं के बीच अमृतवेले से ही बापदादा के स्नेह में समाते अपनी-अपनी झोली अनेक वरदानों से भरपूर करके शिक्षाओं भरे साकार व अव्यक्त परमात्म महावाक्य सुने। फिर प्यारे बापदादा को भोग स्वीकार कराया गया। उसके पश्चात सभी मधुबन के चारों धामों की यात्रा करते बाबा के स्नेह में समाये रहे। मधुबन का वायुमण्डल ऐसा ही अनुभव हो रहा है जैसे सूक्ष्मवतन साकार में उतर आया है।
इस बार 18 जनवरी पर दिल्ली और आगरा ज़ोन के भाई बहिनों की सेवा का टर्न है, इनके साथ और भी अनेक स्थानों से देश विदेश के भाई बहिनें अव्यक्त मिलन की अनुभूतियां करने मधुबन पहुंचे हुए हैं। सभी खूब रिफ्रेश हो रहे हैं। अच्छा। सभी को याद... ओम् शान्ति।
18-1-23 ओम् शान्ति “अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज-वीडियो 18-01-04 मधुबन
आज चारों ओर स्नेह की लहरों में सभी बच्चे समाये हुए हैं। सभी के दिल में विशेष ब्रह्मा बाप की स्मृति इमर्ज है। अमृतवेले से लेके साकार पालना वाले रत्न और साथ में अलौकिक पालना वाले रत्न दोनों के दिल के यादों की मालायें बापदादा के पास पहुंच गई हैं। सभी के दिल में बापदादा के स्मृति की तस्वीर दिखाई दे रही है। और बाप के दिल में सर्व बच्चों की स्नेह भरी दिल समाई हुई है। सभी के दिल से एक ही स्नेह भरा गीत बज रहा है - “मेरा बाबा'' और बाप की दिल से यही गीत बज रहा है -“मेरे मीठे-मीठे बच्चे''। यह आटोमेटिक गीत, अनहद गीत कितना प्यारा है। बापदादा चारों ओर के बच्चों को स्नेह भरी स्मृति के रिटर्न में दिल के स्नेह भरी दुआयें पदमगुणा दे रहे हैं।
बापदादा देख रहे हैं अभी भी देश वा विदेश में बच्चे स्नेह के सागर में लवलीन हैं। यह स्मृति दिवस विशेष सभी बच्चों के प्रति समर्थ बनाने का दिवस है। आज का दिन ब्रह्मा बाप द्वारा बच्चों की ताजपोशी का दिन है। ब्रह्मा बाप ने निमित्त बच्चों को विश्व सेवा की जिम्मेवारी का ताज पहनाया। स्वयं अननोन बनें और बच्चों को साकार स्वरूप में निमित्त बनाने का, स्मृति का तिलक दिया। स्वयं समान अव्यक्त फरिश्ते स्वरूप का, प्रकाश का ताज पहनाया। स्वयं करावनहार बन करनहार बच्चों को बनाया इसलिए इस दिवस को स्मृति दिवस सो समर्थी दिवस कहा जाता है। सिर्फ स्मृति नहीं, स्मृति के साथ-साथ सर्व स्मृतियाँ बच्चों को वरदान में प्राप्त हैं। बापदादा सभी बच्चों को सर्व स्मृतियों स्वरूप देख रहे हैं। मास्टर सर्व शक्तिवान स्वरूप में देख रहे हैं। शक्तिवान नहीं, सर्व-शक्तिवान। यह सर्व शक्तियां बाप द्वारा हर एक बच्चे को वरदान में मिली हुई हैं। दिव्य जन्म लेते ही बापदादा ने वरदान दिया - सर्वशक्तिवान भव! यह हर जन्म दिवस का वरदान है। इन शक्तियों को प्राप्त वरदान के रूप से कार्य में लगाओ। हर एक बच्चे को मिली हैं लेकिन कार्य में लगाने में नम्बरवार हो जाते हैं। हर शक्ति के वरदान को समय प्रमाण आर्डर कर सकते हो। अगर वरदाता के वरदान के स्मृति स्वरूप बन समय अनुसार किसी भी शक्ति को आर्डर करेंगे तो हर शक्ति हाज़िर होनी ही है। वरदान की प्राप्ति के, मालिकपन के स्मृति स्वरूप में हो आप आर्डर करो और शक्ति समय पर कार्य में नहीं आये, हो नहीं सकता। लेकिन मालिक, मास्टर सर्वशक्तिवान के स्मृति की सीट पर सेट हो, बिना सीट पर सेट के कोई आर्डर नहीं माना जाता है। जब बच्चे कहते हैं कि बाबा हम आपको याद करते तो आप हाज़िर हो जाते हो, हज़ूर हाज़िर हो जाता है। जब हज़ूर हाज़िर हो सकता तो शक्ति क्यों नहीं हाज़िर होगी! सिर्फ विधि पूर्वक मालिकपन के अथॉरिटी से आर्डर करो। यह सर्व शक्तियां संगमयुग की विशेष परमात्म प्रॉपर्टी है। प्रॉपर्टी किसके लिए होती है? बच्चों के लिए प्रॉपर्टी होती है। तो अधिकार से स्मृति स्वरूप की सीट से आर्डर करो, मेहनत क्यों करो, आर्डर करो। वर्ल्ड अथॉरिटी के डायरेक्ट बच्चे हो, यह स्मृति का नशा सदा इमर्ज रहे।
तो अपने अधिकार की समर्थी में रहो। स्वयं भी समर्थ रहो और सर्व आत्माओं को भी समर्थी दिलाओ। सर्व आत्मायें इस समय समर्थी अर्थात् शक्तियों की भिखारी हैं, आपके जड़ चित्रों के आगे मांगते रहते हैं। तो बाप कहते हैं “हे समर्थ आत्मायें सर्व आत्माओं को शक्ति दो, समर्थी दो।'' इसके लिए सिर्फ एक बात का अटेन्शन हर बच्चे को रखना आवश्यक है - जो बापदादा ने इशारा भी दिया, बापदादा ने रिजल्ट में देखा कि मैजारिटी बच्चों का संकल्प और समय व्यर्थ जाता है। जैसे बिजली का कनेक्शन अगर थोड़ा भी लूज़ हो वा लीक हो जाए तो लाइट ठीक नहीं आ सकती। तो यह व्यर्थ की लीकेज़ समर्थ स्थिति को सदाकाल की स्मृति बनाने नहीं देती, इसलिए वेस्ट को बेस्ट में चेन्ज करो। बचत की स्कीम बनाओ। परसेन्टेज़ निकालो - सारे दिन में वेस्ट कितना हुआ, बेस्ट कितना हुआ? अगर मानो 40 परसेन्ट वेस्ट है, 20 परसेन्ट वेस्ट है तो उसको बचाओ। ऐसे नहीं समझो थोड़ा सा ही तो वेस्ट जाता है, बाकी तो सारा दिन ठीक रहता है लेकिन यह वेस्ट की आदत बहुत समय की आदत होने के कारण लास्ट घड़ी में धोखा दे सकती है। नम्बरवार बना देगी, नम्बरवन नहीं बनने देगी। जैसे ब्रह्मा बाप ने आदि में अपनी चेकिंग के कारण रोज़ रात को दरबार लगाई। किसकी दरबार? बच्चों की नहीं, अपनी ही कर्मेन्द्रियों की दरबार लगाई। आर्डर चलाया - हे मन मुख्य मंत्री यह तुम्हारी चलन अच्छी नहीं, आर्डर में चलो। हे संस्कार आर्डर में चलो। क्यों नीचे ऊपर हुआ, कारण बताओ, निवारण करो। हर रोज़ आफीशल दरबार लगाई। ऐसे रोज़ अपनी स्वराज्य दरबार लगाओ। कई बच्चे बापदादा से मीठी-मीठी रूहरिहान करते हैं। पर्सनल रूहरिहान करते हैं, बतायें। कहते हैं हमको अपने भविष्य का चित्र बताओ, हम क्या बनेंगे? जैसे आदि रत्नों को याद होगा कि जगत अम्बा माँ से सभी बच्चे अपना चित्र मांगते थे, मम्मा आप हमको चित्र दो, हम कैसे हैं। तो बापदादा से भी रूहरिहान करते अपना चित्र मांगते हैं। आप सबकी भी दिल तो होती होगी कि हमको भी चित्र मिल जाए तो अच्छा है। लेकिन बापदादा कहते हैं - बापदादा ने हर एक बच्चे को एक विचित्र दर्पण दिया है, वह दर्पण कौन सा है? वर्तमान समय आप स्वराज्य अधिकारी हो ना! हो? स्वराज्य अधिकारी हो? हो तो हाथ उठाओ। स्व-राज्य अधिकारी हो? अच्छा। कोई-कोई नहीं उठा रहे हैं। थोड़ा-थोड़ा हैं क्या? अच्छा। सभी स्वराज्य अधिकारी हो, मुबारक हो। तो स्वराज्य अधिकार का चार्ट आपके लिए भविष्य पद की शक्ल दिखाने का दर्पण है। यह दर्पण सबको मिला हुआ है ना? क्लीयर है ना? कोई ऐसे काले दाग तो नहीं लगे हुए हैं ना! अच्छा, काले दाग तो नहीं होंगे, लेकिन कभी-कभी जैसे गर्म पानी होता है ना, वह कोहरे के मुआफिक आइने पर आ जाता है। जैसे फागी होती है ना, तो आइने पर ऐसा हो जाता है जो आइना क्लीयर नहीं दिखाता है। नहाने के समय तो सबको अनुभव होगा। तो ऐसा अगर कोई एक भी कर्मेन्द्रिय अभी तक भी आपके पूरे कन्ट्रोल में नहीं है, है कन्ट्रोल में लेकिन कभी-कभी नहीं भी है। अगर मानों कोई भी कर्मेन्द्रिय, चाहे ऑख हो, चाहे मुख हो, चाहे कान हो, चाहे पाँव हो, पाँव भी कभी-कभी बुरे संग के तरफ चला जाता है। तो पाँव भी कन्ट्रोल में नहीं हुआ ना। संगठन में बैठ जायेंगे, रामायण और भागवत की उल्टी कथायें सुनेंगे, सुल्टी नहीं। तो कोई भी कर्मेन्द्रिय संकल्प, समय सहित अगर कन्ट्रोल में नहीं है तो इससे ही चेक करो जब स्वराज्य में कन्ट्रोलिंग पावर नहीं है तो विश्व के राज्य में कन्ट्रोल क्या करेंगे! तो राजा कैसे बनेंगे? वहाँ तो सब एक्यूरेट है। कन्ट्रोलिंग पावर, रूलिंग पावर सब स्वत: ही संगमयुग के पुरुषार्थ की प्रालब्ध के रूप में है। तो संगमयुग अर्थात् वर्तमान समय अगर कन्ट्रोलिंग पावर, रूलिंग पावर कम है, तो पुरुषार्थ कम तो प्रालब्ध क्या होगी? हिसाब करने में तो होशियार हो ना! तो इस आइने में अपना फेस देखो, अपनी शक्ल देखो। राजा की आती है, रॉयल फैमिली की आती है, रॉयल प्रजा की आती है, साधारण प्रजा की आती है, कौन सी शक्ल आती है? तो मिला चित्र? इस चित्र से चेक करना। हर रोज़ चेक करना क्योंकि बहुतकाल के पुरुषार्थ से, बहुतकाल के राज्य भाग्य की प्राप्ति है। यह बहुतकाल (पुरुषार्थ का), बहुतकाल की प्रालब्ध का कनेक्शन है इसीलिए अलबेले नहीं बनना, अभी तो विनाश की डेट फिक्स ही नहीं है, पता ही नहीं। अचानक होना है। डेट नहीं बताई जायेगी। ना विश्व की, ना आपके अन्तिम घड़ी की। सब अचानक का खेल है।
ब्रह्मा बाप ने भी मालिक बन अन्दर ही अन्दर ऐसा सूक्ष्म पुरुषार्थ किया जो आपको पता पड़ा, सम्पन्न कैसे बन गया? पंछी उड़ गया। पिंजड़ा खुल गया। साकार दुनिया के हिसाब-किताब का, साकार के तन का पिंजड़ा खुल गया, पंछी उड़ गया। अभी ब्रह्मा बाप भी बहुत सिक व प्रेम से बच्चों का जल्दी आओ, जल्दी आओ, अभी आओ, अभी आओ, यह आह्वान कर रहे हैं। तो पंख तो मिल गये हैं ना! बस सभी एक सेकण्ड में अपने दिल में यह ड्रिल करो, अभी-अभी करो। सब संकल्प समाप्त करो, यही ड्रिल करो “ओ बाबा मीठे बाबा, प्यारे बाबा हम आपके समान अव्यक्त रूपधारी बनें कि बनें।'' (बापदादा ने ड्रिल कराई)
अच्छा - चारों ओर के स्नेही सो समर्थ बच्चों को, चारों ओर के स्वराज्य अधिकारी सो विश्व राज्य अधिकारी बच्चों को, चारों ओर के मास्टर आलमाइटी अथॉरिटी के सीट पर सेट रहने वाले तीव्र पुरुषार्थी बच्चों को, सदा मालिक बन प्रकृति को, संस्कार को, शक्तियों को, गुणों को आर्डर करने वाले विश्व राज्य अधिकारी बच्चों को, बाप समान सम्पूर्णता को, सम्पन्नता को समीप लाने वाले देश विदेश के हर स्थान के कोने-कोने के बच्चों को समर्थ दिवस का, बापदादा का यादप्यार और नमस्ते।
सेवा का टर्न दिल्ली - आगरा का है :- उठो दिल्ली वाले, आगरा वाले उठो। आगरा साथ में है। बापदादा ने देखा है जिस भी ज़ोन को टर्न मिलता है ना, वह बड़ी दिल से, खुली दिल से सभी को चांस दिला देते हैं। अच्छा है यह, डबल फायदा हो जाता है। एक यज्ञ सेवा का और दूसरा यज्ञ सेवा का पुण्य बहुत बड़ा है। एक का लाख गुणा फल मिलता है। यज्ञ की महिमा कम नहीं है।
अभी दिल्ली वाले, दिल्ली को सोने की दिल्ली बनाने के लिए ऐसा कोई प्लैन बनाओ जो सबके दिल से निकले वाह निमित्त दिल्ली वाले, आपने हमको स्वर्ग का राज्य भाग्य दिला दिया। अच्छा। मुबारक हो। बैठ जाओ। ओम् शान्ति।