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2 Nov 2023
“भगवान और भाग्य की स्मृति से सदा हर्षित रहो , हर्षित बनाओ"
2 November 2023 · हिंदी
02-11-2023 मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 02-11-2023
प्राणेश्वर अव्यक्त बापदादा की सर्वश्रेष्ठ भाग्यवान आत्मायें, सदा खुशियों के झूले में झूलने वाली, खुशमिजाज़, खुशकिस्मत सभी निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - प्यारे बापदादा की दिव्य और अलौकिक अव्यक्त पालना का अनुभव करते हुए आप सभी निरन्तर आगे बढ़ रहे होंगे। मीठा बाबा कहे बच्चे, वायदा करो कि कुछ भी जाए खुशी कभी नहीं गंवायेंगे। सदा खुश रहेंगे और सबको खुश करेंगे। सदा सन्तुष्ट रहेंगे और सबको सन्तुष्ट करेंगे। भाग्यविधाता बाप ने जो हम सभी बच्चों का भाग्य बनाया है, अमृतवेले से अपने भाग्य को स्मृति में रख सदा हर्षित रहना है और सबको भाग्य बनाने की विधि सुनानी है। चेहरा सदा रूहानियत से मुस्कराता रहे, हमारी मधुर मुस्कान देख दूसरे भी मुस्कराने लगें। बापदादा ने हम बच्चों को यह सेवा की बहुत सुन्दर विधि बताई है।
तो बोलो, हमारे मीठे-मीठे भाई बहिनें सदा ऐसी सेवा कर रहे हो ना! अब तो परमात्म प्रत्यक्षता के दिन सम्मुख दिखाई दे रहे हैं। अभी तक हम सबने वाणी द्वारा ज्ञान सुनाने की सेवायें खूब की हैं, अभी बाबा कहते बच्चे, अपने खुशनुम: चेहरे और मधुर सरल व्यवहार द्वारा सेवा करो। अपनी पवित्र वृत्तियों द्वारा वायुमण्डल को परिवर्तन करने की सेवा करो। तो ऐसी सेवा करते, त्याग, तपस्या और सेवा तीनों में ब्रह्मा बाप समान बनना ही है।
बाकी इस समय मधुबन वरदान भूमि में यू.पी. बनारस तथा पश्चिम नेपाल के भाई बहिनों की सेवा का टर्न है। इसके अलावा विदेश के कई स्थानों से डबल विदेशी बाबा के बच्चे भी मधुबन में पहुंच गये हैं। सब तरफ साकार दुनिया के अलौकिक फरिश्तों की बहुत अच्छी रिमझिम हैं। सभी अपने ब्राह्मण परिवार को देखते, मिलन मनाते, मुस्कराते, खूब उमंग-उत्साह का अनुभव कर रहे हैं। अच्छा - सभी को बहुत-बहुत याद... ओम् शान्ति।
02-11-2023 ओम् शान्ति “अव्यक्त बापदादा'' रिवाइज वीडियो 22-03-2013 मधुबन
आज बापदादा सर्व बच्चों के भाग्य को देख हर्षित हो रहे हैं। सबसे बड़ा भाग्य सभी के मस्तक में चमकता हुआ सितारा, चमकता हुआ दिखाई दे रहा है। सबका मस्तक चमक रहा है। साथ में सबके मुख में ज्ञान वाणी की चमक दिखाई दे रही है। सबके होठों में मुस्कराहट कितनी सुन्दर चमक रही है। हर एक के दिल में दिलाराम बाप की लवलीन मूर्त की झलक दिखाई दे रही है। सभी के हाथों में ज्ञान के खजानों की चमक दिखाई दे रही है। हर एक के पांव में कदम में पदम की झलक दिखाई दे रही है। बोलो, इतने बड़े भाग्य, कितनी झलक से चमक रहे हैं। सोचो, इतना बड़ा भाग्य कैसे बना! स्वयं भाग्य विधाता बाप ने भाग्य बनाया है। खुद भाग्य विधाता ने आपका भाग्य बनाया है। तो अपने भाग्य को देख हर्षित होते रहते हो ना! वाह भाग्य! और रोज़ अमृतवेले अपने भाग्य को देखते रहते हो ना! संगमयुग है ही भाग्य बनाने वाला।
बापदादा हर बच्चे के भाग्य को देख हर्षित होते रहते हैं इसीलिए गायन भी है अगर भाग्य देखना हो तो परमात्म बच्चों का भाग्य देख लो। आप सबको भी अपने भाग्य को देख खुशी होती है ना! दिल से क्या निकलता? वाह मेरा भाग्य! अपने भाग्य को देख अन्य आत्माओं के लिए उमंग आता है, तरस भी होता है लेकिन उमंग आता है कि इन एक-एक आत्मा का भी भाग्य उज्जवल हो जाए। बापदादा ने देखा भाग्य तो सबको प्राप्त हुआ है लेकिन भाग्य का सुख, आनंद नम्बरवार अनुभव करते हैं। कई बच्चों की सूरत से भाग्य से सम्पन्न चेहरे दिखाई दे रहे हैं। ऐसे बच्चों को बाप भी स्नेही स्वरूप से कहते हैं वाह भाग्यवान बच्चे वाह! खुशी होती है, कांध हिलाओ। होती है! अच्छा हाथ हिलाओ। वाह! बापदादा कई बार सुना चुके हैं कि बाप हर बच्चे को चेक करते हैं, सदा भाग्य स्वरूप स्मृति में रहता है या कभी कभी? जो समझते हैं हम सदा भाग्यवान हैं और भाग्यवान बनाते रहते हैं, वह हाथ उठाओ। पीछे वाले भी हाथ उठाते हैं। बापदादा देख रहे हैं, मुबारक हो। भाग्यवान का चेहरा सदा खुशकिस्मत, खुशनुमा होगा। तो हर एक अपने को चेक करे कि अमृतवेले से लेके रात तक खुशमिजाज़ और खुशकिस्मत रहा? खुशी कभी कम भी नहीं होनी चाहिए। बापदादा ने देखा कई बच्चे ऐसे खुशमिजाज़ रहते हैं जो उनका चेहरा देख दूसरा भी बदल जाता है।
आज बापदादा एक शब्द बच्चों से वापस लेने चाहते हैं। तैयार हैं! तैयार हैं? हाथ उठाओ, देंगे! फिर वापस नहीं लेंगे! हाथ उठाओ, अच्छी तरह से सोच समझके हाथ उठाओ। बापदादा को कई बच्चे कहते हैं शक्ति स्वरूप या खुशमिजाज़ रहते तो हैं लेकिन कभी-कभी। यह कभी-कभी का शब्द बापदादा को पसन्द नहीं है क्योंकि हर बच्चे से बाप का अति प्यार है। तो कभी-कभी शब्द बाप को पसन्द नहीं, सदा बाप समान दिखाई दे। ऐसे भी बच्चे हैं लेकिन बाप चाहते हैं हर बच्चा सदा खुशी में उड़ता रहे। सदा रूहानियत में मुस्कराता रहे, दूसरों को भी मुस्करा दे। आपको पसन्द है, सदा पसन्द है या कभी-कभी? जिसको सदा शब्द पसन्द है और प्रैक्टिकल है, वह हाथ उठाओ। पीछे वाले हाथ हिलाओ। भविष्य सदा श्रेष्ठ है और रहेगा। हर एक बच्चे ने संकल्प किया है हम बाप के साथ हैं, बाप के साथ ही रहेंगे। बापदादा भी खुश होते हैं। बापदादा को भी अकेला नहीं अच्छा लगता, सब बच्चों के साथ अच्छा लगता है। बापदादा ने कई बार कहा है खुशी कब गंवाना नहीं और सुनाया भी है खुशी जैसी करामत और कोई में नहीं है। जानते हो ना और जो भी वस्तु होती है वह देने से कम होती है, लेकिन खुशी किसको भी दो, तो कम होगी या बढ़ेगी? तो ऐसी खुशी जो सदा बढ़ती रहती है, उसको कभी नहीं छोड़ना। आपका चेहरा कोई भी देखे सदा खुशमिजाज़। बातें तो आती हैं, कलियुग का अर्थ ही क्या है! कलियुग क्यों कहते हो! कलह-कलेष होगा तब तो कलियुग कहते हो ना! लेकिन हमें उसमें क्या करना है? परिवर्तन। बातों में नहीं आना लेकिन बातों को परिवर्तन कर सेवा के लिए सदा एवररेडी रहना। तो सदा अपना भाग्य याद रहता है ना? भगवान और भाग्य, इससे सदा हर्षित चेहरा रहेगा, जिस हर्षित चेहरे को देख और भी हर्षित हो जाएं।
तो बापदादा आज सभी बच्चों को यही याद दिलाते हैं कि सदा हर्षित रहो और हर्षित बनाओ। सभी बच्चे मधुबन में पहुंचे हैं। हर एक को बाप से प्यार है, बाप का भी बच्चों से प्यार है तो बाप समझते हैं कि हर बच्चा कम से कम ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनें, यह मंजूर है। ब्रह्मा बाप को फॉलो करना है, तैयार हैं! इसमें दो दो-दो हाथ उठाओ। बहुत अच्छा। मुबारक है।
अभी सभी मिलकर यह दृढ़ संकल्प करो, तैयार तो हैं ना, घड़ी-घड़ी हाथ नहीं उठवाते हैं। बापदादा को निश्चय है कि बच्चे अच्छे हैं, चाहे थोड़ा पुरुषार्थ में कभी-कभी विघ्न आते भी हैं लेकिन बाबा और मैं कम्बाइन्ड हैं, कम्बाइन्ड रहेंगे, यह पक्के निश्चयबुद्धि हैं। ठीक बोला! कांध ऐसे करो। जो भी अपने-अपने स्थान से आये हैं, उन एक-एक बच्चे को नाम लेके, उनकी सूरत आगे लाके बापदादा वरदान दे रहे हैं - सदा कोई भी बात आवे ना, जो कायदे प्रमाण होनी नहीं चाहिए लेकिन आ जाए तो जो ऐसी बात आये, उसको उस समय ही अपने दिल से निकाल बाप को दे दो। बाप आपेही सम्भालेगा। देना तो आता है ना! आता है देना? इसमें कांध हिलाओ, देना आता है! लेना आता है, देना भी आता है?
अपने दिल में वायदा करो कि हम कभी भी खुशी नहीं गंवायेंगे। कर सकते हो? खुशी नहीं गंवायेंगे, जो कर सकते हैं, वह हाथ उठाओ। जिन्होंने भी वायदा किया उन्हों को बापदादा की तरफ से दिल की मुबारक है, मुबारक है, मुबारक है। अच्छा।
सेवा का टर्न - यू.पी. बनारस , पश्चिम नेपाल का है:- भले पधारे अपने घर में। सभी सदा यह संकल्प करना कि मुझे ब्रह्मा बाप समान बनना ही है। फॉलो ब्रह्मा बाबा। कोई भी कार्य ऐसा हो उसमें चेक करो, ब्रह्मा बाप ने किया! आपकी वह 10 प्वाइंटस निकली हुई हैं। उस 10 प्वाइंट में देखना कि ब्रह्मा बाप ने क्या-क्या किया! और फॉलो ब्रह्मा बाप करना। तो जो भी ग्रुप आये हैं, बापदादा हर ग्रुप को विशेष मुबारक दे रहे हैं। बापदादा ने देखा हर ग्रुप को उमंग-उत्साह बहुत है, हम करके दिखायेंगे और हर ग्रुप में ऐसी शक्ति है जो करके दिखा सकते हैं । बापदादा सभी ग्रुप को उम्मींदवार विजयी रूप में देख रहे हैं। एक-एक को बापदादा अपने शुभ भावना और शुभकामना का वरदान दे रहे हैं।
डबल विदेशी :- डबल विदेशियों को डबल मुबारक हो। बापदादा विदेशियों पर एक बात पर बहुत खुश है। विदेशी मधुबन का लाभ बड़ी अच्छी रीति से लेते हैं। चाहे दूर हैं लेकिन मधुबन का लाभ लेने का प्लैन अच्छा बनाते हैं। सब रिफ्रेश भी हो जाते, सर्विस के प्लैन भी बनाते और सर्विस में उमंग-उत्साह भी अच्छा दिलाते हैं। बापदादा ने देखा कि विदेश भी सेवा में कम नहीं है। इन्डिया जैसे भिन्न-भिन्न प्रोग्राम से आगे बढ़ रही है, ऐसे विदेशी भी हर साल जो प्रोग्राम बनाते हैं वह बहुत अच्छा बनाते हैं और बना हुआ प्लैन प्रैक्टिकल में भी लाते हैं इसलिए बापदादा सब इन्डियन भाई बहिनों की तरफ से आपको विशेष मुबारक दे रहे हैं। अच्छा।
चारों ओर के सब बच्चे देख भी रहे हैं, सुन भी रहे हैं। बापदादा को खुशी होती है कि यह साइंस के साधन बच्चों को सुख का अनुभव करा रहे हैं इसलिए बापदादा ने बच्चों को पहले ही कहा था कि यह साइंस आपको बहुत सहयोग देगी। तो दे रही है और और भी आगे देती रहेगी। बाबा देखते हैं कैसे सभी सम्मुख देखने की कोशिश करते हैं और उन्हों को अनुभव होता भी जाता है इसलिए साइंस वालों को भी मुबारक हो, जो आप बच्चों को सैलवेशन मिल गई है। सब देखते भी हैं, सुनते भी हैं। मैजारिटी इसका लाभ उठा रहे हैं इसलिए बापदादा बच्चों का उमंग-उत्साह देख खुश है। सभी एक-एक बच्चे को दूर बैठे नजदीक अनुभव करने वालों को बहुत-बहुत यादप्यार और जो साइंस के साधन से मुक्त होकर बैठे हैं और कुछ न कुछ तरीके अपनाते हैं उन्हों को भी बहुत-बहुत यादप्यार। अच्छा।