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30 Nov 2023
"स्व -उपकारी बन अपकारी पर भी उपकार करो , सर्व शक्ति , सर्व गुण सम्पन्न सम्मान दाता बनो"
30 November 2023 · हिंदी
30-11-2023 मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 30-11-2023
आज स्नेह के सागर अपने चारों ओर के स्नेही बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं। चाहे साकार रूप में सम्मुख हैं, चाहे स्थूल रूप में दूर बैठे हैं लेकिन स्नेह, सभी को बाप के पास बैठे हैं - यह अनुभव करा रहा है। हर बच्चे का स्नेह बाप को समीप अनुभव करा रहा है। आप सभी बच्चे भी बाप के स्नेह में सम्मुख पहुंचे हो। बापदादा ने देखा कि हर एक बच्चे के दिल में बापदादा का स्नेह समाया हुआ है। हर एक के दिल में “मेरा बाबा'' इसी स्नेह का गीत बज रहा है। स्नेह ही इस देह और देह के सम्बन्ध से न्यारा बना रहा है। स्नेह ही मायाजीत बना रहा है। जहाँ दिल का स्नेह है वहाँ माया दूर से ही भाग जाती है। स्नेह की सबजेक्ट में सर्व बच्चे पास हैं। एक है स्नेह, दूसरा है सर्वशक्तिवान बाप द्वारा सर्वशक्तियों का खजाना।
तो आज बापदादा एक तरफ तो स्नेह को देख रहे हैं, दूसरे तरफ शक्ति सेना की शक्तियों को देख रहे हैं। जितना स्नेह समाया हुआ है उतना ही सर्व शक्तियां भी समाई हुई हैं? बापदादा ने सभी बच्चों को एक जैसी सर्व शक्तियां दी हैं, मास्टर सर्वशक्तिवान बनाया है। किसको सर्व शक्तिवान, किसको शक्तिवान नहीं बनाया है। आप सब भी अपना स्वमान मास्टर सर्वशक्तिवान कहते हो। तो बापदादा चारों ओर के बच्चों से पूछते हैं, कि हर एक अपने में सर्व शक्तियों का अनुभव करते हैं? सदा सर्व शक्तियों पर अधिकार है? सर्व शक्तियाँ बापदादा का वर्सा है, तो अपने वर्से पर अधिकार है? है अधिकार? टीचर्स बोलो, अधिकार है? सोच के बोलना। पाण्डव अधिकार है? सदा है या कभी-कभी है? जिस समय जिस शक्ति की आवश्यकता है तो आप शक्ति सेना के आर्डर से वह शक्ति हाज़िर हो जाती है? समय पर जी हज़ूर हाज़िर करती है? सोचो, देखो, अधिकारी आर्डर करे और शक्ति जी हज़ूर हाज़िर कहे, जिस भी शक्ति का आह्वान करो, जैसा समय, जैसी परिस्थिति वैसे शक्ति कार्य में लगा सको। ऐसे अधिकारी आत्मायें बने हो? क्योंकि बाप ने वर्सा दिया और वर्से को आपने अपना बनाया, अपना बनाया है ना! तो अपने पर अधिकार होता है। जिस समय जिस विधि से आवश्यकता हो, उस समय कार्य में लग जाए। मानो समाने के शक्ति की आपको आवश्यकता है और आर्डर करते हो समाने की शक्ति को, तो आपका आर्डर मान जी हाज़िर हो जाती है? हो जाती है तो कांध हिलाओ, हाथ हिलाओ। कभी-कभी होती है या सदा होती है? समाने की शक्ति हाज़िर होती है लेकिन 10 बारी समा लिया और 11 वें बारी थोड़ा नीचे ऊपर होता है? सदा और सहज हाज़िर हो जाए, समय बीतने के बाद नहीं आवे, करने तो यह चाहते थे लेकिन हो गया, यह ऐसा नहीं हो। इसको कहा जाता है सर्व शक्तियों के अधिकारी। यह अधिकार बापदादा ने तो सबको दिया है, लेकिन देखने में आता है कि सदा अधिकारी बनने में नम्बरवार हो जाते हैं। सदा और सहज हो, नेचुरल हो, नेचर हो, उसकी विधि है, जैसे बाप को हजूर भी कहा जाता है, कहते हैं हज़ूर हाज़िर है। हाज़िर हज़ूर कहते हैं। तो जो बच्चा हज़ूर की हर श्रीमत पर हाज़िर हज़ूर कर चलता है उसके आगे सर्व शक्तियां भी हज़ूर हाज़िर करती हैं। हर आज्ञा में जी हाज़िर, हर कदम में जी हाज़िर। अगर हर श्रीमत में जी हाज़िर नहीं है तो हर शक्ति भी हर समय हाज़िर हज़ूर नहीं कर सकती है। अगर कभी-कभी बाप की श्रीमत वा आज्ञा का पालन करते हैं, तो शक्तियां भी आपका कभी-कभी हाज़िर होने का आर्डर पालन करती हैं। उस समय अधिकारी के बजाए अधीन बन जाते हैं। तो बापदादा ने यह रिजल्ट चेक की, तो क्या देखा? नम्बरवार हैं। सभी नम्बरवन नहीं हैं, नम्बरवार हैं और सदा सहज नहीं हैं। कभी-कभी सहज हो जाते, कभी थोड़ा मुश्किल शक्ति इमर्ज होती है।
बापदादा हर एक बच्चे को बाप समान देखने चाहते हैं। नम्बरवार नहीं देखने चाहते हैं और आप सभी का लक्ष्य भी है बाप समान बनने का। समान बनने का लक्ष्य है वा नम्बरवार बनने का लक्ष्य है? अगर पूछेंगे तो सब कहेंगे समान बनना है। तो चेक करो - एक सर्व शक्तियां हैं? सर्व पर अण्डरलाइन करो। सर्व गुण हैं? बाप समान स्थिति है? कभी स्वयं की स्थिति, कभी कोई पर-स्थिति विजय तो नहीं प्राप्त कर लेती? पर-स्थिति अगर विजय प्राप्त कर लेती है तो उसका कारण जानते हो ना? स्थिति कमजोर है तब परिस्थिति वार कर सकती है। सदा स्व स्थिति विजयी रहे, उसका साधन है - सदा स्वमान और सम्मान का बैलेन्स। स्वमानधारी आत्मा स्वत: ही सम्मान देने वाला दाता है। वास्तव में किसी को भी सम्मान देना, देना नहीं है, सम्मान देना मान लेना है। सम्मान देने वाला सबके दिल में माननीय स्वत: ही बन जाता है। ब्रह्मा बाप को देखा - आदि देव होते हुए, ड्रामा की फर्स्ट आत्मा होते हुए सदा बच्चों को सम्मान दिया। अपने से भी ज्यादा बच्चों का मान आत्माओं द्वारा दिलाया। इसलिए हर एक बच्चे के दिल में ब्रह्मा बाप माननीय बनें। तो मान दिया या मान लिया? सम्मान देना अर्थात् दूसरे के दिल में दिल के स्नेह का बीज बोना। विश्व के आगे भी विश्व कल्याणकारी आत्मा है, यह तब अनुभव करते जब आत्माओं को स्नेह से सम्मान देते हो।
तो बापदादा ने वर्तमान समय में आवश्यकता देखी सम्मान एक दो को देने की। सम्मान देने वाला ही विधाता आत्मा दिखाई देती है। सम्मान देने वाले ही बापदादा की श्रीमत (शुभ भावना, शुभ कामना) मानने वाले आज्ञाकारी बच्चे हैं। सम्मान देना ही ईश्वरीय परिवार का दिल का प्यार है। सम्मान वाला स्वमान में सहज ही स्थित हो सकता है। क्यों? जिन आत्माओं को सम्मान देता है उन आत्माओं द्वारा जो दुआयें दिल की मिलती हैं, वह दुआओं का भण्डार स्वमान सहज और स्वत: ही याद दिलाता है। इसलिए बापदादा चारों ओर के बच्चों को विशेष अण्डरलाइन करा रहे हैं - सम्मान दाता बनो।
बापदादा के पास जो भी बच्चा जैसा भी आया, कमजोर आया, संस्कार के वश आया, पापों का बोझ लेके आया, कड़े संस्कार लेकर आया, बापदादा ने हर बच्चे को किस नज़र से देखा! मेरा सिकीलधा लाडला बच्चा है, ईश्वरीय परिवार का बच्चा है। तो सम्मान दिया और आप स्वमानधारी बन गये। तो फॉलो फादर। अगर सहज सर्व गुण सम्पन्न बनना चाहते हो तो सम्मान दाता बनो। समझा! सहज है ना? सहज है या मुश्किल है? टीचर्स क्या समझती हैं, सहज है? कोई को देना सहज है, कोई को मुश्किल है या सभी को देना सहज है? आपका टाइटल है - सर्व उपकारी। अपकार करने वाले पर भी उपकार करने वाले। तो चेक करो - सर्व उपकारी दृष्टि, वृत्ति, स्मृति रहती है? दूसरे पर उपकार करना, स्वयं पर ही उपकार करना है। तो क्या करना है? सम्मान देना है ना! अलग-अलग बातों में धारणा करने के लिए जो मेहनत करते हो, उससे छूट जायेंगे क्योंकि बापदादा देख रहे हैं, कि समय की गति तीव्र हो रही है। समय इन्तज़ार कर रहा है, तो आप सभी को इन्तज़ाम करना है। समय का इन्तजार समाप्त करना है। क्या इन्तज़ाम करना है? अपने सम्पूर्णता और समानता की गति तीव्र करनी है। कर रहे हैं नहीं, तीव्रगति को चेक करो - तीव्रगति है? बाकी स्नेह से नये-नये बच्चे भी पहुंचे हैं, बापदादा नये-नये बच्चों को देख खुश होते हैं। अच्छा
सेवा का टर्न कर्नाटक का है:- कर्नाटक वाले उठो। सेवा के गोल्डन चांस की मुबारक हो। देखो पहला नम्बर लिया है तो पहला नम्बर ही रहना है ना! पुरुषार्थ में, विजयी बनने में सबमें पहला नम्बर लेने वाले। दूसरा नम्बर नहीं लेना, पहला नम्बर। है हिम्मत! हिम्मत है? तो हिम्मत आपकी और हजार गुणा मदद बाप की। अच्छा चांस लिया है। अपने पुण्य का खाता बहुत-बहुत जमा कर लिया। कर्नाटक को सबमें पहला नम्बर लेना चाहिए।
अच्छा - अभी सभी एक सेकण्ड में, एक सेकण्ड एक मिनट नहीं, एक सेकण्ड में “मैं फरिश्ता सो देवता हूँ'' - यह मन्सा ड्रिल सेकण्ड में अनुभव करो। ऐसी ड्रिल दिन में एक सेकण्ड में बार-बार करो। जैसे शारीरिक ड्रिल शरीर को शक्तिशाली बनाती, वैसे यह मन की ड्रिल मन को शक्तिशाली बनाने वाली है। मैं फरिश्ता हूँ, इस पुरानी दुनिया, पुरानी देह, पुराने देह के संस्कार से न्यारी फरिश्ता आत्मा हूँ। अच्छा!
चारों ओर के अति स्नेही, सदा स्नेह के सागर में लवलीन आत्माओं को, सदा सर्व शक्तियों के अधिकारी श्रेष्ठ आत्माओं को, सदा बाप समान बनने वाले बाप के प्यारे आत्माओं को, सदा स्वमान में रहने वाली हर आत्मा को सम्मान देने वाली, सर्व के माननीय बनने वाली आत्माओं को, सदा सर्व उपकारी आत्माओं को बापदादा का दिल का यादप्यार और दिल की दुआयें स्वीकार हो। और साथ-साथ विश्व के मालिक आत्माओं को नमस्ते।