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15 Dec 2023
“परमात्म प्यार में सम्पूर ्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो"
15 December 2023 · हिंदी
15-12-2023 मधुबनअव्यक्त बापदादाओम् शान्ति 15-12-2023
परमप्यारे अव्यक्त मूर्त मात-पिता बापदादा के अति स्नेही, सदा अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभव कराने वाले, ब्राह्मण जीवन के फाउण्डेशन “पवित्रता'' को दृढ़ता पूर्वक अपनाने वाले, व्यर्थ संकल्पों से भी मुक्त, ऐसे परमात्म प्यार की अधिकारी आत्मायें, निमित्त सेवाधारी टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - संगमयुग परमात्म प्यार की अनुभूति करने का युग है। अभी हम सब का यही अनुभव है कि परमात्म बाप हमारे साथ है। परमात्मा हमारे बिना और हम परमात्मा के बिना रह नहीं सकते। ऐसे परमात्म प्यार में समाये हुए, इस रूहानी प्यार में हम अपनी छोटी बड़ी सभी कमी कमजोरियों को भी सहज कुर्बान कर देते हैं। बापदादा की यही आश है कि अभी मेरा हर ब्राह्मण बच्चा पवित्रता के फाउण्डेशन को इतना मजबूत कर ले, जो परमात्म प्रत्यक्षता के निमित्त बन जाए। इसके लिए स्वराज्य अधिकारी बनने का अभ्यास करना है, जितना-जितना हम “बालक सो मालिक पन'' के स्वमान में रहते हैं उतना सर्व शक्तियों का अधिकार स्वत: मिल जाता है। मीठा बाबा अभी हम बच्चों को ऐसा समर्थ बनाना चाहते हैं जो माया किसी भी रूप में वार न कर सके।
वर्तमान समय बापदादा की अव्यक्त रिवाइज मुरलियों में भी ऐसी गहरी धारणायुक्त शिक्षायें मिल रही हैं, जरूर सभी उसी प्रमाण अपनी श्रेष्ठ स्थिति बनाने का पुरुषार्थ कर रहे होंगे। बाबा को एक “सदा'' शब्द बहुत प्यारा लगता है। बच्चे जो कह देते हैं बाबा कभी तो बहुत अच्छी स्थिति रहती, कभी कम, यह कभी-कभी शब्द बाबा को अच्छा नहीं लगता। तो अभी हम सब सदाकाल के लिए अपनी श्रेष्ठ स्थिति बनायें। सदा खुशी की खुराक खाते, खुशी के खजाने से सम्पन्न रह सबको खुशी का दान देते चलें।
बोलो, ऐसा ही अटेन्शन रख तीव्र पुरुषार्थ की रेस कर रहे हो ना! बाबा के बेहद घर में बाप और बच्चों की बहुत अच्छी रिमझिम चल रही है। देश विदेश के हजारों बच्चे बाबा के घर में भाग-भाग कर आ रहे हैं और अनेक वरदानों वा शक्तियों से सम्पन्न बन खूब रिफ्रेश हो रहे हैं। अभी इस ग्रुप में सेवा का टर्न पंजाब ज़ोन का है। इस ज़ोन में भी 5 नदियों का संगम है, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखण्ड.. सभी स्थानों के भाई बहिनें बाबा मिलन में पहुंच गये हैं। इसके अलावा अन्य कई स्थानों से भी ग्रुपस आये हुए हैं। अच्छा - सभी को बहुत-बहुत याद.... ओम् शान्ति।
15-12-23 ओम् शान्ति “अव्यक्त बापदादा'' रिवाइज-वीडियो 03-02-06 मधुबन
आज बापदादा चारों ओर के अपने प्रभु प्यारे बच्चों को देख रहे हैं। सारे विश्व के चुने हुए कोटों में से कोई इस परमात्म प्यार के अधिकारी बनते हैं। परमात्म प्यार ने ही आप बच्चों को यहाँ लाया है। यह परमात्म प्यार सारे कल्प में इस समय ही अनुभव करते हो। और सभी समय आत्माओं का प्यार, महान आत्माओं का, धर्म आत्माओं का प्यार अनुभव किया लेकिन अभी परमात्म प्यार के पात्र बन गये। कोई आपसे पूछे परमात्मा कहाँ है? तो क्या कहेंगे? परमात्म बाप तो हमारे साथ ही है। हम उनके साथ रहते हैं। परमात्मा भी हमारे बिना रह नहीं सकता और हम भी परमात्मा के बिना रह नहीं सकते। इतना प्यार अनुभव कर रहे हो। फ़लक से कहेंगे वह हमारे दिल में रहता और हम उनके दिल में रहते। ऐसे अनुभवी हैं ना! हैं अनुभवी? क्या दिल में आता? अगर हम नहीं अनुभवी होंगे तो कौन होगा! बाप भी ऐसे प्यार के अधिकारी बच्चों को देख हर्षित होते हैं।
परमात्म प्यार की निशानी - जिससे प्यार होता है उसके पीछे सब कुर्बान करने के लिए सहज तैयार हो जाते हैं। तो आप सब भी जो बाप चाहते हैं कि हर एक बच्चा बाप समान बन जाए, हर एक के चेहरे से बाप प्रत्यक्ष दिखाई दे, ऐसे बने हो ना? बापदादा की दिल पसन्द स्थिति जानते हो ना! बाप के दिल पसन्द स्थिति है ही सम्पूर्ण पवित्रता। इस ब्राह्मण जन्म का फाउण्डेशन भी सम्पूर्ण पवित्रता है। सम्पूर्ण पवित्रता की गुह्यता को जानते हो? संकल्प और स्वप्न में भी रिंचक मात्र अपवित्रता का नाम-निशान न हो। बापदादा आजकल के समय की समीपता प्रमाण बार-बार अटेन्शन खिंचवा रहे हैं कि सम्पूर्ण पवित्रता के हिसाब से व्यर्थ संकल्प, यह भी सम्पूर्णता नहीं है। तो चेक करो व्यर्थ संकल्प चलते हैं? किसी भी प्रकार के व्यर्थ संकल्प सम्पूर्णता से दूर तो नहीं करते? जितना-जितना पुरुषार्थ में आगे बढ़ते जाते हैं, उतना रॉयल रूप के व्यर्थ संकल्प व्यर्थ समय तो समाप्त नहीं कर रहे हैं? रॉयल रूप में अभिमान और अपमान व्यर्थ संकल्प के रूप में वार तो नहीं करते? अगर अभिमान रूप में कोई भी परमात्म देन को अपनी विशेषता समझते हैं तो उस विशेषता का भी अभिमान नीचे ले आता है। विघ्न रूप बन जाता है और अभिमान भी सूक्ष्म रूप में यही आता, जो जानते भी हो - मेरापन आया, मेरा नाम, मान, शान होना चाहिए, यह मेरापन अभिमान का रूप ले लेता है। यह व्यर्थ संकल्प भी सम्पूर्णता से दूर कर लेते हैं क्योंकि बापदादा यही चाहते हैं - स्वमान, न अभिमान, न अपमान। यही कारण बनते हैं व्यर्थ संकल्प आने के।
बापदादा हर बच्चे को डबल मालिकपन के निश्चय और नशे में देखने चाहते हैं। डबल मालिकपन क्या है? एक तो बाप के खजानों के मालिक और दूसरा स्वराज्य के मालिक। स्वराज्य अधिकारी मालिक, इसमें विशेष विघ्न डालता है मन। मन के मालिक बन कभी भी मन के परवश नहीं हो। कहते हैं स्वराज्य अधिकारी हैं, तो स्वराज्य अधिकारी अर्थात् राजा हैं, जैसे ब्रह्मा बाप ने हर रोज़ चेकिंग कर मन के मालिक बन विश्व के मालिक का अधिकार प्राप्त कर लिया। ऐसे यह मन बुद्धि राजा के हिसाब से तो मंत्री हैं, यह व्यर्थ संकल्प भी मन में उत्पन्न होते हैं, तो मन व्यर्थ संकल्प के वश कर देता है। अगर आर्डर से नहीं चलाते तो मन चंचल बनने के कारण परवश कर लेता है। तो चेक करो। वैसे भी मन को घोड़ा कहते हैं, क्योंकि चंचल है ना! और आपके पास श्रीमत का लगाम है। अगर श्रीमत का लगाम थोड़ा भी ढीला होता है तो मन चंचल बन जाता है। क्यों लगाम ढीला होता? क्योंकि कहाँ न कहाँ साइडसीन देखने में लग जाते हैं। और लगाम ढीला होता तो मन को चांस मिलता है। तो मैं बालक सो मालिक हूँ, इस स्मृति में सदा रहो। चेक करो खजाने का भी मालिक तो स्वराज्य का भी मालिक, डबल मालिक हूँ?
बापदादा हर एक बच्चे को पदम-पदमगुणा भाग्यवान चलन और चेहरे में देखने चाहते हैं। कई बच्चे कहते हैं भाग्यवान तो बने हैं लेकिन चलते-फिरते भाग्य इमर्ज हो, वह मर्ज हो जाता है और बापदादा हर समय, हर बच्चे के मस्तक में भाग्य का सितारा चमकता हुआ देखने चाहते हैं। कोई भी आपको देखे तो चेहरे से, चलन से भाग्यवान दिखाई दे तब आप बच्चों द्वारा बाप की प्रत्यक्षता होगी क्योंकि वर्तमान समय मैजारिटी अनुभव करने चाहते हैं, जैसे आजकल की साइन्स प्रत्यक्ष रूप में दिखाती है ना! अनुभव कराती है ना! गर्म का भी अनुभव कराती है, ठण्डाई का भी अनुभव कराती है, तो साइलेन्स की शक्ति से भी अनुभव करने चाहते हैं। जितना-जितना स्वयं अनुभव में रहेंगे तो औरों को भी अनुभव करा सकेंगे। बापदादा ने इशारा दिया ही है कि अभी कम्बाइन्ड सेवा करो। सिर्फ आवाज से नहीं, लेकिन आवाज के साथ अनुभवी मूर्त बन अनुभव कराने की भी सेवा करो। कोई न कोई शान्ति का अनुभव, खुशी का अनुभव, आत्मिक प्यार का अनुभव..., अनुभव ऐसी चीज़ है जो एक बारी भी अनुभव हुआ तो छोड़ नहीं सकते हैं। सुनी हुई चीज़ भूल सकती है लेकिन अनुभव की चीज़ भूलती नहीं है। वह अनुभव कराने वाले के समीप लाती है।
अब तक यह आवाज नहीं फैला है कि यह परमात्म ज्ञान है। ब्रह्माकुमारियां कार्य अच्छा कर रही हैं, ब्रह्माकुमारियों का ज्ञान बहुत अच्छा है लेकिन यही परमात्म ज्ञान है, परमात्म कार्य चल रहा है यह आवाज फैले। यह आवाज बाप के नजदीक लायेगा और जितना बाप के नजदीक आयेंगे उतना अनुभव स्वत: ही करते रहेंगे। तो अभी ऐसा प्लैन बनाओ, ऐसे भाषण तैयार करो, ऐसे परमात्म अनुभूति के प्रैक्टिकल सबूत बनो। तभी बाप की प्रत्यक्षता प्रैक्टिकल में दिखाई देगी। अभी ‘अच्छा है' - यहाँ तक पहुंचे हैं, ‘अच्छा बनना है', वह लहर परमात्म प्यार की अनुभूति से होगी। तो अनुभवी मूर्त बन अनुभव कराओ। अभी डबल मालिकपन की स्मृति से समर्थ बन समर्थ बनाओ। अच्छा।
सेवा का टर्न पंजाब ज़ोन का है:- हाथ हिलाओ। अच्छा है। पंजाब को सभी कामन रीति से शेर कहते हैं, पंजाब शेर और बापदादा कहते हैं शेर अर्थात् विजयी। तो सदा पंजाब वालों को अपने मस्तक के बीच विजय का तिलक अनुभव करना है। विजय का तिलक मिला हुआ है। यह सदा स्मृति रहे हम ही कल्प कल्प के विजयी हैं। थे, हैं और कल्प-कल्प बनेंगे। अच्छा है। बहुत अच्छा। इनएडवांस मुबारक हो। अच्छा।
डबल विदेशी:- बापदादा कहते हैं कि डबल फॉरेनर्स सबसे पहले तो मधुबन का बहुत बढ़िया श्रृंगार हैं। कितना अच्छा लगता है। देश विदेश एक मत होके एकाग्र बुद्धि से विश्व सेवा कर रहे हैं। सब प्रकार के एक स्टेज पर बैठते हैं और सब कहते हैं कि एक बाप दूसरा न कोई, ऐसे है? या दूसरा कोई है? व्यर्थ संकल्प हैं तो भी दूसरा है। आज बापदादा सब संकल्प की विधि को एक शुभ संकल्प बनाने चाहते हैं। डबल फॉरेनर्स शुरू करो - दृढ़ संकल्प वेस्ट खत्म, बेस्ट। ठीक है? करेंगे डबल फॉरेनर्स? करेंगे? आप में संस्कार रूप में भी है, जो संकल्प किया वह करके दिखाते हो। तो सारे फॉरेन में वेस्ट का नाम निशान न हो, न वेस्ट टाइम, न वेस्ट बोल, न वेस्ट संकल्प, न वेस्ट कर्म, न वेस्ट सम्बन्ध-सम्पर्क। ठीक है? पसन्द है? अच्छा। एक्जैम्पुल बनेंगे ना! अच्छा।
जो भी उमंग-उत्साह से आगे बढ़ने चाहे वह बढ़ सकता है। ऐसे नहीं डबल फारेनर्स ने हाथ उठाया और आप सभी इण्डिया वाले क्या करेंगे? नम्बरवन तो लेना चाहते हैं ना! सभी के दिल में यह उमंग आना चाहिए कि हमने कहा नहीं है लेकिन करके दिखायेंगे। तो इण्डिया वाले ऐसे करेंगे? हिम्मत दिखायेंगे?
हाँ, मधुबन वाले भी करेंगे? मधुबन वाले बड़ा हाथ उठाओ। मधुबन वालों के लिए बापदादा कहते हैं जो चुल पर सो दिल पर, मधुबन वालों को बहुत बड़ी लिफ्ट है। लिफ्ट पर अगर चढ़ने चाहो तो बहुत जल्दी सम्पन्न बन सकते हो। लोग तो मधुबन में आते हैं, आप मधुबन में रहते हैं। सिर्फ अलबेले नहीं बनना बस। लिफ्ट को छोड़कर सीढ़ी नहीं चढ़ो, लिफ्ट में चढ़ो। देखो, मधुबन वालों को हर साल, हर सीजन में सम्मुख मुरली सुनने का मिलता है, औरों को नहीं मिलता है। तो मधुबन वाले सभी को मुस्कराके मिलते अपने चेहरे से बाप को प्रत्यक्ष कर सकते हैं। जो ‘मेरा बाबा' कहते हैं ना, वह मेरे बाबा का चेहरे से चलन से दिखाई दे। कर भी रहे हैं, ऐसे नहीं है नहीं कर रहे हैं, कर रहे हैं। अभी और थोड़ा फास्ट करना है, बाकी कर भी रहे हैं। आज किसने कहा था मधुबन वालों से मिलना है, तो बापदादा मिला ना। अच्छा।
सभी तरफ के सर्व रूहानी गुलाब बच्चों को सदा बाप के अति प्यारे और देहभान से अति न्यारे, बापदादा के दिल के दुलारे बच्चों को, सदा एक बाप, एकाग्र मन और एकरस स्थिति में स्थित रहने वाले बच्चों को, चारों ओर के भिन्न-भिन्न समय पर भिन्न-भिन्न स्थान में रहते भी साइंस के साधनों से मधुबन में पहुंचने वाले, सम्मुख देखने वाले, सभी लाडले, सिकीलधे, कल्प-कल्प के परमात्म प्यार के पात्र अधिकारी बच्चों को बापदादा का यादप्यार और दिल की दुआयें, पदम-पदम गुणा स्वीकार हो और साथ में डबल मालिक बच्चों को बापदादा की नमस्ते।