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15 Nov 2024
“बाप के स्नेह में समाते हुए, शक्तियों द्वारा मन को कन्ट्रोल कर सदा मनजीत, जगतजीत बनो''
15 November 2024 · हिंदी
मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 02-02-2013
प्राणप्यारे अव्यक्तमूर्त मात-पिता बापदादा के अति स्नेही, सदा मन के मालिक बन मनजीत, जगतजीत बनने वाली आत्मायें, सदा खुश रहने और सबको खुशी बांटने वाले सच्चे सेवाधारी, निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश की सभी वरदानी आत्मायें, ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - मीठा बाबा हम बच्चों को अशरीरी बनने का सहज विधि बताते हैं बच्चे, सदा के स्नेही बनो। एक बाप के स्नेह में लवलीन रहो, यह लवलीन स्थिति सहज अशरीरी बना देगी। अपने सभी स्नेही बच्चों को बापदादा तीन वरदान देते हैं, बाप के स्वरूप में वर्से का, शिक्षक रूप में श्रेष्ठ शिक्षा का और सतगुरू के रूप में वरदानों का... यह तीनों वरदान हम सबको मिले हुए हैं। ऐसे वरदानी बच्चों को बापदादा अभी मनजीत, जगतजीत देखना चाहते हैं इसके लिए बाबा कहते बच्चे, मन को शक्तियों द्वारा कन्ट्रोल कर मनजीत, जगतजीत बनो।
वर्तमान सीज़न में प्यारे अव्यक्त बापदादा अपनी शक्तिशाली दृष्टि और मधुर अनमोल महावाक्यों द्वारा अपने सभी बच्चों की विशेष अव्यक्त पालना कर रहे हैं। इस अलौकिक अव्यक्त मिलन के कार्यक्रम में इस बार कर्नाटक ज़ोन की सेवाओं का टर्न है, उनके साथ तामिलनाडु और गुजरात के भाई बहिनें भी पहुंचे हुए हैं। साथ-साथ ज्ञान सरोवर में डबल विदेशी बाबा के बच्चों की बहुत अच्छी रिमझिम है। अनेक देशों से बाबा के बच्चे पहुंच गये हैं। सभी अपने-अपने टर्न का इन्तजार करते रहते हैं। नये पुराने अनेकानेक बाबा के बच्चे हर टर्न में मधुबन में पहुंच जाते हैं। साथ-साथ बाबा के अन्य स्थानों पर भी नई-नई आत्माओं के लिए सेवाओं के कार्यक्रम चलते रहते हैं। बाबा के सभी स्थान सदा ही फुल रहते हैं।
बाकी आप सभी ने दीपावली का पावन पर्व खूब उमंग-उत्साह के साथ मनाया होगा। इस बार मधुबन में तो विशेष दीपराज बाप के साथ मंगल-मिलन मनाने निमित्त योग के कार्यक्रम चले। यह यज्ञ का स्थापना दिवस है इसलिए सभी स्थानों पर विशेष अपनी निमित्त दादियों को और प्यारे बापदादा को भोग भी लगाया गया।
अच्छा - सभी को बहुत-बहुत याद.... ओम् शान्ति।
आज बापदादा हर एक बच्चे को देख हर्षित हो रहे हैं। हर एक बच्चा चाहे सम्मुख है, चाहे दूर है लेकिन बापदादा के स्नेह में लवलीन है। बापदादा भी हर बच्चे के स्नेह को देख हर्षित हो रहे हैं। हर एक बच्चे का चेहरा स्नेह में समाया हुआ है और बापदादा भी हर बच्चे को देख, लवलीन बच्चों को देख, स्नेह में समाये हुए बच्चों को देख खुश हो रहे हैं। हर एक बच्चे में तीन वरदान देख रहे हैं। एक बाप के स्वरूप में वर्से का वरदान, दूसरा शिक्षक के रूप में श्रेष्ठ शिक्षा का वरदान, तीसरा गुरू के रूप में वरदानों का वरदान। तीनों ही वरदान का स्वरूप देख हर्षित हो रहे हैं। चाहे यहाँ बैठे हैं, चाहे दूर बैठे हैं लेकिन हर बच्चा स्नेह में लवलीन है। बाप भी बच्चों के स्नेह में लवलीन हैं। यह स्नेह हर बच्चे को लव में लीन का अनुभव करा रहा है। यह स्नेह अशरीरी बनाने का साधन है।
बापदादा हर बच्चे को देख खुश है। क्या गीत गाते हैं? वाह बच्चे वाह! यह स्नेह अशरीरी बनाने वाला है। बाप बच्चों को देख क्या कहते हैं? वाह बच्चे वाह! सदा इस स्नेह में समाये रहो, यह स्नेह ही हर एक को परमात्म प्यार में समाने वाला है। बापदादा हर बच्चे के नयनों में हर एक बच्चे का भाग्य देख रहे हैं। इस एक जन्म में 21 जन्मों का भाग्य बना रहे हैं। हर एक के मन में परमात्म प्यार अनुभव हो रहा है। यह परमात्म प्यार एक जन्म में इतना श्रेष्ठ बना रहा है जो आत्मा लवलीन बन, अशरीरी बन अपने घर परमधाम, साथ में अपने राज्य के अधिकारी बन जायेंगे।
आज बापदादा बच्चों को विशेष वरदान दे रहे हैं - सदा बाप के स्नेह में समाते हुए मनजीत जगतजीत बनो। सदा मन का मालिक बन मनजीत बनो। कई समझते हैं मन के मालिक बनना यह मुश्किल है लेकिन बापदादा कहते हैं मन को आप मेरा मन कहते हो ना! जैसे और कर्मेन्द्रियां मेरी हैं तो वह कन्ट्रोल में हर कार्य करती हैं वैसे मनजीत जगतजीत बनना मुश्किल नहीं है। आज हर बच्चे को बाप मनजीत, जगतजीत बनाने चाहते हैं। मन को शक्तियों द्वारा कन्ट्रोल कर मनजीत बनना ही है। बापदादा हर बच्चे को आज सदा मन का मालिक, मनजीत जगतजीत बनाने चाहते हैं। मन मेरा है, मेरे का मालिक हूँ, जैसे चाहूँ मालिक बन मन को चलाना इससे खुश रहेंगे। जैसे इन हाथ पांव को आर्डर में चलाते हो क्योंकि मेरा है, ऐसे मन को भी शक्ति स्वरूप हो चला सकते हो लेकिन मालिक बन चलाना तो मनजीत जगतजीत बन जायेंगे। इस संगम समय पर परमात्मा बाप द्वारा वरदान मिलते हैं। वरदाता बाप हर बच्चे की झोली वरदानों से भर देते हैं। एक जन्म में अनेक जन्मों का भविष्य बना सकते हो।
आज बापदादा देख रहे हैं कई आत्मायें अपने घर में पहुंच गई हैं। बापदादा सभी को अति स्नेह और शक्ति रूप से मुबारक दे रहे हैं। साथ में वरदान भी दे रहे हैं। वरदान क्या है? सदा शक्ति स्वरूप आत्मा बन इन कर्मेन्द्रियों को चलाने वाले मास्टर बन, मनजीत जगतजीत बन, सदा खुश रहना और खुशी बांटना क्योंकि आज विश्व की आत्मायें अपने-अपने कार्य करते हुए खुशी के बजाए अनेक सरकमस्टांश में अपने को मजबूर समझती हैं। मजबूर को मजबूत करो। खुशी बांटो। संसार की हालत तो देख ही रहे हैं लेकिन अपने को न्यारा और बाप का प्यारा बन उस प्यार में लवलीन रहो। अच्छा।
आज जो आये हैं वह जरा उठना। आज जो विशेष निमंत्रण पर आये हैं उन्हों को उठा रहे हैं। (वी.आई.पीज का गुलदस्ता आया है) बापदादा बच्चों को देख खुश है कि अपने घर में पहुंच गये हैं। अपना घर लगता है? लगता है तो हाथ उठाओ। (सभी ने हाथ उठाया)
बापदादा भी खुश हो रहे हैं बच्चों को देख और गीत गा रहे हैं वाह बच्चे वाह! क्योंकि आज विश्व को आवश्यकता है अपने खुशनुमा जीवन की। तो एक-एक अनेक आत्माओं को परिचय दे इस भारत को जैसे भारत ऊंचा था, वैसे बनाना है। बापदादा भी खुश है। आप सभी अपने परिवार को देख खुश हैं ना! देखो दो-दो हाथ उठा रहे हैं। बहुत अच्छा। आये हैं अपने घर में, अपने बाप अपने परिवार से मिलने। बापदादा यही वरदान देते हैं कि खुशी कभी नहीं गंवाना। खुश रहना और खुशी बांटना।
सेवा का टर्न कर्नाटक ज़ोन का है:- बापदादा इतने सब बच्चों को देख वाह बच्चे वाह! का गीत गा रहे हैं। बापदादा ने देखा हर एक ज़ोन अपने ज़ोन को आगे बढ़ाने के प्रयत्न में लगे हुए हैं और यह जो ज़ोन-ज़ोन आता है, यह सिस्टम भी हर एक को ज्यादा में ज्यादा संख्या में लाने का चांस देता है। बापदादा भी एक-एक बच्चे को देख खुश होते हैं। कर्नाटक वालों को सदा बापदादा यही वरदान देता है कि सदा खुशी-खुशी से कर्नाटक में सभी भाई बहिनों को परमात्म सन्देश जरूर पहुंचाओ। कोई रह नहीं जाये। बापदादा खुश है। अभी बापदादा ने जो कहा है मनजीत, जगतजीत, मन के मालिक बनो, तो यह टाइटल जरूर लेना। टीचर्स भी यह टाइटल लेंगी ना! मनजीत जगतजीत।
डबल विदेशी:- डबल विदेशी, बापदादा अभी डबल विदेशी नहीं कहते। बापदादा कहते डबल पुरुषार्थी और बापदादा ने देखा विदेश वाले पुरुषार्थ में अटेन्शन भी विशेष दे रहे हैं। बापदादा आप आये हुए विदेशियों को बहुत-बहुत वरदान देते हैं कि सदा बढ़ते रहेंगे और अनेकों को बापदादा का वरदान दिलायेंगे। बाबा ने देखा है कि सेवा का शौक भी अच्छा है, साथ-साथ स्व को आगे बढ़ाने का पुरुषार्थ भी अच्छा चल रहा है इसलिए बापदादा विशेष डबल प्यार देते हैं। जहाँ जो भी हैं वह अटेन्शन देके टेन्शन फ्री रहते हैं। बापदादा खुश हैं, बढ़ रहे हो और बढ़ते रहेंगे। एक बाप दूसरा न कोई, इस पुरुषार्थ में अटेन्शन है और अटेन्शन टेन्शन को समाप्त कर रहा है। तो बापदादा डबल विदेशियों को डबल प्यार दे रहे हैं।
तो सभी आगे के लिए क्या लक्ष्य रखेंगे? सभी को यही लक्ष्य रखना है कि स्वयं भी शक्तिशाली बन औरों को भी बापदादा का परिचय दे वारिस बनाने की सेवा करेंगे। अभी हर एक सेन्टर अपने आने वाले भाई बहनों को वारिस क्वालिटी बनाओ। वारिस क्वालिटी अर्थात् जो सदा बाप के साथी बन खुद भी चले और अनेकों को भी बाप के साथी बनावे। बापदादा खुश है चारों ओर की सर्विस अच्छी बढ़ा रहे हैं। हर एक को उमंग है। प्रोग्राम तो सब करते हैं लेकिन हर एक प्रोग्राम से वारिस कितने बनायें, समीप कितने आये? यह रिजल्ट जरूर देनी है। बाकी आज जो बापदादा ने बताया मनजीत, जगतजीत यह सभी को अवश्य बनना है। मन के व्यर्थ संकल्पों को समाप्त कर व्यर्थ को विदाई दे दो, नहीं तो व्यर्थ संकल्प भी समय निकाल देते हैं। तो आज का पाठ मनजीत जगतजीत बनना ही है। मेरा मन है, तो मेरे के ऊपर राज्य होता है। तो हर एक यह स्वरूप अपना बनाओ और दूसरों को भी सहयोग दो।
अच्छा! सभी यहाँ से जाते क्या करेंगे? आप समान बनायेंगे ना! हर एक को यह संकल्प हो कि हमें जो जानते नहीं हैं उनको परिचय दे सन्देश तो दे दो, कोई आपको उल्हना नहीं देवे। आपने तो हमें बताया नहीं। अपना उल्हना जरूर उतारो। जो भी कनेक्शन में हैं उन्हों को सन्देश देना, आपका फर्ज है। अड़ोसी-पड़ोसी, सम्पर्क वाले यह उल्हना नहीं दें, हमको तो इतना पता ही नहीं था। प्रोग्राम कर रहे हैं, अच्छा है। शिवरात्रि पर कम से कम यह तो पता पड़ जाए, आपके परिचय वालों को तो शिव परमात्मा का कार्य चल रहा है। उल्हना नहीं दें कि हमको तो आपने बताया ही नहीं क्योंकि समय पर कोई भरोसा नहीं, कुछ भी होना है, अचानक होना है। यह अचानक की बात सभी को ध्यान में रखनी है। अपना भविष्य और औरों का भविष्य जितना बनाना चाहो अभी चांस है। बापदादा एक-एक बच्चे को मुबारक दे रहे हैं। आगे बढ़ भी रहे हो लेकिन रफ्तार को और तेज करो। चारों ओर के बच्चे बापदादा ने देखा कितनी याद में बैठते हैं और बापदादा भी चक्र लगाके सभी बच्चों को प्यार भी देते हैं और प्यार के साथ-साथ मुबारक भी देते हैं। चारों ओर उमंग अच्छा है। अब दु:ख से छुड़ाओ। अब अपना राज्य आने दो। तो सभी बच्चों को चाहे विदेश, चाहे देश, चाहे गांव, हर एक बच्चे को बापदादा बहुत-बहुत-बहुत याद और प्यार दे रहे हैं। अच्छा। ओम् शान्ति।