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30 Nov 2024
"समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो"
30 November 2024 · हिंदी
मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 30-11-2005
प्राणप्यारे अव्यक्त बापदादा के अति स्नेही, सदा स्वयं को हद के सर्व बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनने वाले, एक बाप दूसरा न कोई, इसी महामंत्र से सदा देह भान से स्वतंत्र रहने वाले, समय के पहले स्वयं को सदा एवररेडी बनाने वाली निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - समय की समीपता को देखते हुए बापदादा अपने बच्चों को सम्पन्न और समान बनने का सहज पुरुषार्थ बतलाते बच्चे, अब हद के बन्धनों से मुक्त बनो। सबसे पहले देह भान से, पुराने स्वभाव संस्कार से स्वतंत्र बनो। कोई भी छोटी कर्मेन्द्रिय भी अपने बंधन में बांध न ले। सदा अपने स्वमान की स्मृति में रहो और विशेष सहनशक्ति और रियलाइजेशन की शक्ति को धारण कर स्वयं को परिवर्तन करो। समय प्रमाण अब अपनी स्थिति लाइट, माइट हाउस बनाओ। बीच-बीच में अशरीरी बनने की ड्रिल करते रहो।
ऐसी अनेकानेक सुन्दर विधियां बापदादा अपने बच्चों को बताते हुए उड़ती कला में उड़ा रहे हैं। वर्तमान हलचल के वातावरण में अपनी स्थिति हर एक को अचल अडोल एकरस बनानी है। सदा निर्विघ्न, निर्विकल्प, निर्मान और निर्मल बनना है। इस पर भी आप सभी गहराई से आपस में रूहरिहान करते हुए विशेष मनन-चिंतन करना जी।
इस बार विशेष सेवा का टर्न यू.पी. बनारस क्षेत्र का है। सभी बहुत लगन से बापदादा के यज्ञ की सेवायें करते अनेकों की दुआयें जमा कर रहे हैं। हर टर्न में डबल विदेशी बाबा के बच्चे भी भाग-भाग कर मधुबन में पहुंच जाते हैं। भारत के अन्य प्रान्तों से भी अनेक भाई बहिनों की बहुत सुन्दर रिमझिम है। मौसम भी बहुत सुहावना है। न अधिक ठण्डी है, न गर्मी। सभी ज्ञान योग से स्वयं को खूब भरपूर कर रहे हैं। अच्छा - सभी को बहुत-बहुत याद.... ओम् शान्ति।
आज चारों ओर के सम्पूर्ण समान बच्चों को देख रहे हैं। समान बच्चे ही बाप के दिल में समाये हुए हैं। समान बच्चों की विशेषता है - वह सदा निर्विघ्न, निर्विकल्प, निर्मान और निर्मल होंगे। ऐसी आत्मायें सदा स्वतंत्र होती हैं, किसी भी प्रकार के हद के बन्धन में बंधायमान नहीं होती। तो अपने आप से पूछो ऐसी बेहद की स्वतंत्र आत्मा बने हैं! सबसे पहली स्वतत्रंता है देहभान से स्वतंत्र। जब चाहे तब देह का आधार ले, जब चाहे देह से न्यारे हो जाए। देह की आकर्षण में नहीं आये। दूसरी बात - स्वतंत्र आत्मा कोई भी पुराने स्वभाव और संस्कार के बन्धन में नहीं होगी। पुराने स्वभाव और संस्कार से मुक्त होगी। साथ-साथ किसी भी देहधारी आत्मा के सम्बन्ध-सम्पर्क में आकर्षित नहीं होगी। सम्बन्ध-सम्पर्क में आते न्यारे और प्यारे होंगे। तो अपने को चेक करो - कोई भी छोटी सी कर्मेन्द्रिय बन्धन में तो नहीं बांधती? अपना स्वमान याद करो - मास्टर सर्वशक्तिवान, त्रिकालदर्शी, त्रिनेत्री, स्वदर्शन चक्रधारी, उसी स्वमान के आधार पर क्या सर्वशक्तिवान के बच्चे को कोई कर्मेन्द्रिय आकर्षित कर सकती है? क्योंकि समय की समीपता को देखते अपने को देखो - सेकण्ड में सर्व बन्धनों से मुक्त हो सकते हो? कोई भी ऐसा बन्धन रहा हुआ तो नहीं है? क्योंकि लास्ट पेपर में नम्बरवन होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है, सेकण्ड में जहाँ, जैसे मन-बुद्धि को लगाने चाहो वहाँ सेकण्ड में लग जाये। हलचल में नहीं आये। जैसे स्थूल शरीर द्वारा जहाँ जाने चाहते हो, जा सकते हो ना! ऐसे बुद्धि द्वारा जिस स्थिति में स्थित होने चाहो उसमें स्थित हो सकते हो? जैसे साइंस ने लाइट हाउस, माइट हाउस बनाया है, तो सेकण्ड में स्विच ऑन करने से लाइट हाउस चारों ओर लाइट देने लगता है, माइट देने लगता है। ऐसे आप स्मृति के संकल्प का स्विच ऑन करने से लाइट हाउस, माइट हाउस होके आत्माओं को लाइट, माइट दे सकते हो? एक सेकण्ड का आर्डर हो अशरीरी बन जाओ, बन जायेंगे ना! कि युद्ध करनी पड़ेगी? यह अभ्यास बहुतकाल का ही अन्त में सहयोगी बनेगा। अगर बहुतकाल का अभ्यास नहीं होगा तो उस समय अशरीरी बनना, मेहनत करनी पड़ेगी इसलिए बापदादा यही इशारा देते हैं कि सारे दिन में कर्म करते हुए भी बार-बार यह अभ्यास करते रहो। इसके लिए मन के कन्ट्रोलिंग पावर की आवश्यकता है। अगर मन कन्ट्रोल में आ गया तो कोई भी कर्मेन्द्रिय वशीभूत नहीं कर सकती।
अभी सर्व आत्माओं को आपके द्वारा शक्ति का वरदान चाहिए। आत्माओं की आप मास्टर सर्वशक्तिवान आत्माओं के प्रति यही शुभ इच्छा है कि बिना मेहनत के वरदान द्वारा, दृष्टि द्वारा, वायब्रेशन द्वारा हमें मुक्त करो। अभी मेहनत करके सब थक गये हैं। आप सब तो मेहनत से मुक्त हो गये हो ना! कि अभी भी मेहनत करनी पड़ती है? सुनाया था - मेहनत से मुक्त होने का सहज साधन है - दिल से बाप के अति स्नेही बन जाना। आप ब्राह्मण आत्माओं का जन्म का वायदा है, याद है वायदा? जब बाप ने अपना बनाया, ब्राह्मण जीवन दी तो ब्राह्मण जीवन का आप सबका वायदा क्या है? एक बाप दूसरा न कोई। याद है वायदा? याद है तो कांध हिलाओ। अच्छा हाथ हिला रहे हैं। याद है पक्का या कभी-कभी भूल जाता है? देखो 63 जन्म तो भूलने वाले बने, अब यह एक जन्म स्मृति स्वरूप बने हो। तो बाप बच्चों से पूछ रहे हैं बचपन का वायदा याद है? कितना सहज करके दिया है - एक बाप में संसार है। एक बाप से सर्व सम्बन्ध हैं। एक बाप से सर्व प्राप्तियां हैं। एक ही पढ़ाने वाला भी है और पालना करने वाला भी है। सबमें एक है। चाहे परिवार भी है, ईश्वरीय परिवार लेकिन परिवार भी एक बाप का है। अलग-अलग बाप का परिवार नहीं है। एक ही परिवार है। परिवार में भी एक दो में आत्मिक स्नेह है, स्नेह नहीं आत्मिक स्नेह। बापदादा जन्म के वायदे याद दिला रहे हैं, और क्या वायदा किया? सभी ने बड़े उमंग-उत्साह से बाप के आगे दिल से कहा - सब कुछ आपका है। तन-मन-धन सब आपका है। तो दी हुई चीज़ बाप की अमानत के रूप में बाप ने कार्य में लगाने के लिए दिया है, आपने बाप को दे दी, दे दी है ना? या वापस थोड़ा-थोड़ा ले लेते हो? वापस लेते हो तो अमानत में ख्यानत हो जाती है। कोई-कोई बच्चे कहते हैं, रूहरिहान करते हैं ना तो कहते हैं मेरा मन परेशान रहता है, मेरा मन आया कहाँ से? जब मेरा तेरे को अर्पण किया, तो मेरा मन आया कहाँ से? आप सभी तो बिन कौड़ी बादशाह हो गये, अभी आपका कुछ नहीं रहा, बिन कौड़ी हो गये लेकिन बादशाह हो गये। क्यों? बाप का खजाना वह आपका खजाना हो गया, तो बादशाह हो गये ना! परमात्म खजाना वह बच्चों का खजाना। तो बापदादा वायदे याद दिला रहे हैं। तेरे में मेरा नहीं करो। बाप कहते हैं - जब बाप ने आप सबको परमात्म खजानों से मालामाल कर दिया, जिम्मेवारी बाप ने ले ली, किन शब्दों में? आप मुझे याद करो तो सर्व प्राप्ति के अधिकारी हो ही। सिर्फ याद करो। और आपने कहा हम आपके, आप हमारे। यह वायदा है ना! तो बाप कहते हैं खजानों को सदा स्व प्रति और सर्व आत्माओं के प्रति कार्य में लगाओ। जितना कार्य में लगायेंगे उतना ही खजाना बढ़ता जायेगा। सर्वशक्तियों का खजाना, सर्व शक्तियां कार्य में लगाओ। सिर्फ बुद्धि में नॉलेज नहीं रखो मैं सर्वशक्तिवान हूँ, लेकिन सर्व शक्तियों को समय प्रमाण कार्य में लगाओ और सेवा में लगाओ।
बापदादा ने मैजॉरिटी बच्चों के पोतामेल में देखा है दो शक्तियां अगर सदा याद रहें और कार्य में समय पर लगाओ तो सदा ही निर्विघ्न रहो। विघ्न की ताकत नहीं है आपके आगे आने की, यह बाप की गैरन्टी है। वैसे तो सर्व शक्तियां चाहिए लेकिन मैजारिटी देखा गया कि सहनशक्ति और रियलाइजेशन की शक्ति, रियलाइज करते भी हो लेकिन उसको प्रैक्टिकल में स्वरूप में लाने में अटेन्शन कम है इसलिए जिस समय रियलाइज करते हो उस समय चलन और चेहरा बदल जाता है। बहुत अच्छे उमंग-उत्साह में आते हो, हाँ रियलाइज किया लेकिन फिर क्या हो जाता है? अनुभवी तो सभी हैं ना! फिर क्या हो जाता है? उसको हर समय स्वरूप में लाना, उसकी कमी हो जाती है क्योंकि यहाँ स्वरूप बनना है। सिर्फ बुद्धि से जानना अलग चीज़ है, लेकिन उसको स्वरूप में लाना, इसकी आवश्यकता है। कभी-कभी बापदादा को कोई-कोई बच्चों पर रहम भी आता है, बाप समझते हैं बच्चे से मेहनत नहीं होती है तो बच्चे के बजाए बाप ही कर ले। लेकिन ड्रामा का राज़ है “जो करेगा वह पायेगा'' इसलिए बापदादा सहयोग जरूर देता है लेकिन करना फिर भी बच्चे को ही पड़ता है।
बापदादा ने देखा है बच्चे संकल्प बहुत अच्छे-अच्छे करते हैं। अमृतवेले बापदादा के पास अच्छे-अच्छे संकल्पों की बहुत-बहुत मालायें आती हैं। यह करेंगे, यह करेंगे, यह करेंगे...., बापदादा भी खुश हो जाते हैं, वाह! बच्चे वाह! फिर करने में कमजोर क्यों बन जाते हैं? इसका कारण देखा गया - ब्राह्मण परिवार में संगठन का वायुमण्डल। कहाँ-कहाँ वायुमण्डल कमजोर भी होता है, उसका असर जल्दी पड़ जाता है। फिर उन्हों की भाषा बतायें क्या होती है? भाषा बड़ी मीठी होती है, भाषा होती है यह तो चलता है, यह तो होता है… ऐसे समय पर क्या संकल्प करो! यह होता है, यह चलता है... यह अलबेलापन लाता है लेकिन उस समय इस भाषा को परिवर्तन करो, सोचो कि बाप का फरमान क्या है? बाप की पसन्दी क्या है? बाप किस बात को पसन्द करता है? बाप ने यह कहा है? किया है? अगर बाप याद आ गया तो अलबेलापन समाप्त हो, उमंग-उत्साह आ जायेगा। तो बापदादा यही चाहते हैं, पूछते हैं ना बाप हमसे क्या चाहते हैं? तो बापदादा यही चाहते हैं कि समय से पहले सब एवररेडी बन जाओ। समय आपका मास्टर नहीं बने। समय के मास्टर आप हो, इसलिए यही बापदादा चाहता है कि समय के पहले सम्पन्न बन विश्व की स्टेज पर बाप के साथ-साथ आप बच्चे भी प्रत्यक्ष हो। अच्छा।
सेवा का टर्न - यू.पी./बनारस का है:- अच्छा - हाथ हिलाओ। बहुत अच्छा किया है, चांस लिया है। टीचर्स भी बहुत आई हैं। अच्छा है। टीचर्स को देखकर बापदादा खुश होते हैं। क्यों? बाप की गद्दी के अधिकारी बने हो। बापदादा टीचर्स को सदा गुरुभाई कहते हैं। बाप समान सेवाधारी बने और प्रवृत्ति में रहने वाले जो भी आये हैं, कुमारियां भी आई हैं, कुमार भी आये हैं। अच्छा किया है, चांस लिया है।
अभी नवीनता, दूसरे बारी कोई नवीनता लेके ही आना। कोई भी ज़ोन कोई नया प्लैन बनाके आये, उसको बापदादा एक्स्ट्रा स्नेह शक्ति का वरदान देंगे। अच्छा।
डबल विदेशी:- अच्छा है, डबल विदेशी स्व पर और सेवा पर अटेन्शन अच्छा दे रहे हैं। लेकिन सिर्फ इसमें एक मात्रा लगानी है। अण्डरलाइन करनी है, जो परिवर्तन का संकल्प लेते हो और अच्छा उमंग-उत्साह, हिम्मत से लेते हो, सिर्फ इसको अण्डरलाइन करते जाओ, करना ही है। बदलना ही है। बदलकर विश्व को बदलना है।
आप तो यहाँ बैठे हो लेकिन बापदादा को दूर बैठे बहुत बच्चों का यादप्यार मिला है और बापदादा एक-एक बच्चे को नयनों में समाते हुए बहुत-बहुत दिल की दुआयें दे रहे हैं। अच्छा।
बापदादा एक सेकण्ड में अशरीरी भव की ड्रिल देखने चाहते हैं, अगर अन्त में पास होना है तो यह ड्रिल बहुत आवश्यक है इसलिए अभी इतने बड़े संगठन में बैठे एक सेकेण्ड में देहभान से परे स्थिति में स्थित हो जाओ। कोई आकर्षण आकर्षित नहीं करे। (ड्रिल) अच्छा।
चारों ओर के तीव्र पुरुषार्थी बच्चों को, सदा स्व-परिवर्तन और विश्व परिवर्तन की सेवा में तत्पर रहने वाले विशेष आत्माओं को, सदा ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी, कर्म की, कर्मेन्द्रियों की आकर्षण से मुक्त आत्माओं को, सदा दृढ़ता को हर संकल्प, हर बोल, हर कर्म में स्वरूप में लाने वाले बाप के समीप और समान बच्चों को बापदादा का दिल की दुआयें और दिल का यादप्यार स्वीकार हो और नमस्ते।
* * * ओम् शान्ति * * *