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21 Mar 2024
“सन्तुष्टता की शक्ति चेहरे और चलन में धारण कर ब्रह्मा बाप समान बनो, सदा खुश रहो और खुशी बांटो"
21 March 2024 · हिंदी
21-03-2024 मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 21-03-2024
प्राणप्यारे अव्यक्तमूर्त मात-पिता बापदादा के अति स्नेही, सदा खुशी के खजाने से सम्पन्न, सन्तुष्ट भव के वरदानी, कदम-कदम परमात्म श्रीमत पर चलकर ब्रह्मा बाप समान बनने वाले देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, निमित्त बेहद सेवाधारी टीचर्स बहिनें, ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद के साथ होली के पावन पर्व की सभी को बहुत-बहुत हार्दिक शुभ बधाईयां।
बाद समाचार - पूरे ब्राह्मण परिवार की शान हम सबकी प्रमुख आदरणीय दादी रतनमोहिनी जी, जिन्होंने अपने शरीर की आयु के 100 वर्ष पूरे किये हैं। त्याग तपस्या और अथक सेवाओं द्वारा आपने पूरे ब्राह्मण परिवार पर अपनी अलौकिक छाप छोड़ी है। अभी मधुबन में उनका यह शताब्दी महोत्सव खूब धूमधाम से मना रहे हैं। एक ओर होली का पावन पर्व है, तो दूसरी ओर यह शताब्दी महोत्सव, 22 मार्च से 25 मार्च तक शान्तिवन के विशाल डायमण्ड हाल में भिन्न-भिन्न कार्यक्रम चलेंगे, जो आप सभी दूर बैठे लाइव देखते खुशियां मनाते रहना जी।
देखो, अव्यक्त वतनवासी मीठा बाबा कैसे अलौकिक रीति से हम बच्चों की पालना कर रहे हैं। इस 2023-2024 वर्ष के अव्यक्त मिलन की सीजन का यह लास्ट 10 वां टर्न है। इसमें महाराष्ट्र, आन्ध्रप्रदेश तथा देश विदेश से अनेकानेक स्थानों के करीब 20 हजार भाई बहिनें बड़े उमंग-उत्साह के साथ बाबा के बेहद घर में पहुंच गये हैं। सभी अनुभव युक्त क्लासेज़ तथा अव्यक्त महावाक्यों द्वारा खूब भरपूर हो रहे हैं। इतनी बड़ी सभा होते भी सभी भाई बहिनें दत्तचित होकर, एकाग्रता के साथ बाबा के महावाक्य सुनते, अलौकिक दृष्टि और शक्ति का अनुभव करते हैं। यह भी कमाल है मीठे बाबा की, जो सभी को अनेकानेक वरदानों से भरपूर कर सन्तुष्टमणि बना देते हैं। आज के महावाक्यों में भी मीठे बाबा ने कहा कि जो सन्तुष्टमणियां हैं वह माया वा प्रकृति की हलचल से सदा परे रहती हैं। वे कभी माया से हार नहीं खा सकती। आज बापदादा ने सभी बच्चों को सन्तुष्टमणि भव का वरदान दिया है। यही ब्रह्मा बाप की विशेषता रही है। हम सबको ब्रह्मा बाप समान बनना है तो जैसे ब्रह्मा बाप कदम-कदम श्रीमत पर चलकर सन्तुष्टता के आधार से फरिश्ता बने, ऐसे हर संकल्प बोल और कर्म में ब्रह्मा बाप को फालो करना है।
इस पूरी सीज़न में बापदादा द्वारा जो भी होमवर्क हम बच्चों को मिला है, उसे आने वाली अगली सीज़न तक हमें रिवाइज करते सम्पन्नता और सम्पूर्णता को समीप लाना है, साथ-साथ अपनी चलन और चेहरे द्वारा पूरे विश्व में बापदादा को प्रत्यक्ष करना है।
अभी अप्रैल मास में स्व-उन्नति और विश्व सेवा के लिए 2024-2025 के लिए वार्षिक मीटिंग है फिर मधुबन के सभी स्थानों पर नये पुराने बाबा के बच्चों के लिए भिन्न-भिन्न कार्यक्रम चलते रहेंगे।
अच्छा - सभी को बहुत-बहुत याद - ओम् शान्ति।
21-3-24 ओम् शान्ति “अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज-वीडियो 20-03-12 मधुबन
आज चाहे सम्मुख चाहे दूर के सन्तुष्टमणि बच्चों को देख रहे हैं। हर एक बच्चा अपने सन्तुष्टता की शक्ति से चमकते हुए मुस्कराते मिलन मना रहे हैं। यह सन्तुष्टता की शक्ति सबसे महान है इसलिए इसमें सर्व प्राप्तियां हैं। सन्तुष्टता की शक्ति धारण करने वाली सन्तुष्टमणियां स्वयं को भी प्रिय, बाप को भी प्रिय, परिवार को भी प्रिय हैं क्योंकि सन्तुष्टता जहाँ है वहाँ सर्वशक्तियां सन्तुष्टता में समाई हुई हैं। सन्तुष्टता की शक्ति का वायुमण्डल चारों ओर फैलता है। सन्तुष्टमणि वाली आत्मायें कभी भी माया से हार नहीं खा सकती, माया हार खाती है। सन्तुष्टमणि आत्मायें सर्व की दिल को अपना बना सकती हैं। सन्तुष्टमणि आत्मा चाहे माया, चाहे प्रकृति के भिन्न-भिन्न हलचल को ऐसे अनुभव करती जैसे एक कार्टून को देख रहे हैं। ऐसे हर एक बच्चा अपने को सन्तुष्टता की शक्ति में सम्पन्न समझते हो? अपने से पूछो कि मैं सन्तुष्टमणि हूँ? कई बच्चे कहते हैं कभी-कभी रहते हैं, सदा नहीं लेकिन बापदादा को कभी-कभी शब्द अच्छा नहीं लगता है। बापदादा सदा हर एक बच्चे को यादप्यार देते हैं, खुशी देते हैं। तो बापदादा को यह कभी-कभी शब्द अच्छा नहीं लगता, सदा खुशनुमा। तो बापदादा यही चाहते हैं कि इस कभी-कभी शब्द को क्या परिवर्तन कर सकते हो! कभी-कभी शब्द ब्राह्मणों की डिक्शनरी में ही नहीं है, सदा। तो सभी बच्चे जो बाप के प्यारे, माया के प्रभाव से न्यारे बने हैं, क्या वह आज इस कभी-कभी शब्द को समाप्त कर सकते हैं? कर सकते हैं? क्योंकि बापदादा बहुत समय से कह रहे हैं कोई भी हलचल अचानक आनी है। उसकी तैयारी के लिए, अगर अभी भी कभी-कभी के संस्कार होंगे तो क्या सदाकाल के राज्यभाग्य के अधिकारी बन सकेंगे? ब्रह्मा बाप से सबका दिल का प्यार है। ब्रह्मा बाबा से वायदा है कि साथ हैं, साथ चलेंगे, साथ राज्य करेंगे। यह वायदा पक्का है ना! कांध हिलाओ। पक्का है? कितना पक्का! ब्रह्मा बाप ने कभी-कभी शब्द बोला! आप सबको भी सदा अमृतवेले यादप्यार दिया और सदा बाप के साथ मिलकर ज्ञान की बातें, स्नेह की बातें, उमंग-उल्हास की बातें सुनाई। अगर सभी से हाथ उठवायें कि बापदादा से प्यार है तो सभी दो दो हाथ उठायेंगे। है ना! पक्का? जब प्यार है तो प्यार वाले के एक-एक शब्द से भी प्यार होता है। ब्रह्मा बाप ने कभी शिव पिता से यह नहीं कहा कि कभी-कभी होता है। सदा फॉलो फादर किया और साथ में आपको भी कराया क्योंकि ब्रह्मा बाप का बच्चों से जिगरी प्यार है इसीलिए आपका नाम भी क्या है? ब्रह्माकुमारी, शिवकुमारी नाम नहीं है। तो ब्रह्मा बाप से प्यार अर्थात् ब्रह्मा बाप का कहना और ब्रह्माकुमार कुमारी का मानना। प्यार अर्थात् न्योछावर। तो किस पर न्योछावर होंगे? उनकी आज्ञा पर। जो बोला वह किया क्योंकि ब्रह्मा बाप के साथ शिव बाप है। अकेला नहीं। बापदादा, बापदादा कहते हो ना!
तो आज बापदादा कभी-कभी शब्द को हर बच्चे के मुख से समाप्त करने चाहते हैं। तो आप सभी बच्चे बाप के साथी हो। प्यार है ना! प्यार में तो अपने आपको न्योछावर भी कर देते हैं, यह तो सिर्फ शब्द को न्योछावर करना है क्योंकि बापदादा हर बच्चे को माला का विजयी रत्न बनाने चाहते हैं। तो अपने को माला का मणका समझते हो? विजयी समझते हो? कई बच्चे कहते हैं ब्राह्मणों की संख्या तो बहुत है और माला 108 की है तो 108 ही आयेंगे ना! लेकिन अगर आप सम्पन्न बनें, विजयी बनें तो 108 की माला है यह नहीं सोचो, बापदादा बीच में लड़िया भी लगा देगा। लेकिन आप विजयी बनो। कई बच्चे सोचते हैं पता नहीं, नम्बर मिलेगा या नहीं मिलेगा। आप अगर सम्पन्न बनें तो बाप नम्बर दे ही देगा क्योंकि बाप का हर बच्चे से प्यार है। सुनाया भी था भले कोई लास्ट बच्चा है, उनसे भी बाप का प्यार है क्योंकि उस बच्चे ने, चाहे स्वभाव के वश है लेकिन बाप को जानके मेरा बाबा तो कहा। दुनिया में कितने बड़े-बड़े मर्तबे वाले उन्होंने बाप को नहीं पहचाना लेकिन उसने तो पहचाना, चाहे कोई कमजोरी वश है लेकिन बाप को तो पहचाना। मेरा बाबा तो प्यार से कहते हैं इसलिए बाप ने पहले भी सुनाया था कि लास्ट बच्चे के ऊपर भी बाप का प्यार तो है ही लेकिन उसके ऊपर खास कल्याण की दृष्टि, कल्याण की वृत्ति भी है कि यह बच्चा कुछ न कुछ आगे बढ़ता रहे। तो बापदादा आज स्पष्ट सुना रहे हैं, कि आप और बातें नहीं सोचो यह कैसे होगा, यह क्या होगा, आप अपने को योग्य आत्मा बनाओ। कर्मयोगी आत्मा बनाओ। बाकी बाप हर बच्चे को ऐसा योग्य बच्चा जो बनेगा उसको सर्व प्राप्ति का वरदान भी देके आगे बढ़ायेगा, पीछे नहीं रखेगा।
तो बापदादा आज अमृतवेले चारों तरफ के चाहे देश, चाहे विदेश में चक्र लगाने गये। वैसे तो बापदादा मैजारिटी चक्र लगाते ही हैं लेकिन आज जब चक्र लगाया, सुनाया था कि बापदादा जब चक्र लगाने जाता है तो विशेष आपके पूर्वज दादियां भी साथ में चक्र लगाने चलती हैं। तो चक्र लगाते क्या देखा? जानते तो हो आप भी। अच्छे-अच्छे संकल्प करते हैं, करके ही दिखायेंगे, बनके ही दिखायेंगे, हाथ में हाथ लेके ही चलेंगे। तो हाथ क्या है? शिव बाप को तो फरिश्ता रूप भी नहीं है तो हाथ कौन सा है? श्रीमत हाथ है। फॉरेन में फैशन है हाथ में हाथ देके चलने का। तो यहाँ हाथ है श्रीमत तो सभी हाथ में हाथ मिलाके चलने वाले हो ना! है ताकत? ब्रह्मा बाप ने देखो कदम-कदम श्रीमत पर चलके आप सभी को करके दिखाया। क्या करना है, कैसे करना है, एक्जैम्पुल है। साकार में एक्जैम्पुल है। निराकार की बात तो छोड़ो लेकिन ब्रह्मा बाप साकार में आपके साथी थे। तो जैसे ब्रह्मा बाप श्रीमत का हाथ में हाथ मिलाके फरिश्ता बन गया। ऐसे ही फॉलो फादर है ना! फॉलो फादर याद है ना! तो फॉलो क्या करना है? सारी बातें स्पष्ट करके दिखाई, ब्रह्मा बाप के चेहरे और चलन को सभी जानते हैं ना! अपनी बुद्धि द्वारा तो ब्रह्मा बाप को इमर्ज कर सकते हैं ना! जो दिनचर्या, जैसे दिनचर्या ब्रह्मा बाप ने की, साकार तन में होते, साकार में भी सब अनुभव किया। ब्रह्मा बाप के चरित्र तो सब जानते ही हैं। तो फॉलो फादर। आपको पक्का करने के लिए ब्रह्मा बाप के हर कदम रिवाइज भी किये हैं। 8 कदम पढ़ते हो ना, क्या-क्या किया! बस उसको फॉलो करना है। फॉलो करना अर्थात् ब्रह्मा बाप समान बनना। तो सोचो बाप से प्यार है, दोनों बाप से प्यार है। प्यार माना पहले भी सुनाया तो प्यार का प्रैक्टिकल रूप है ब्रह्मा बाप का कहना और बच्चों को बाप समान करना, यह है सच्चा दिल का प्यार। कई बच्चे क्या करते हैं? ब्रह्मा बाप समान करना है, यह सोचते हैं लेकिन पहले करके पीछे सोचते हैं, ब्रह्मा बाप समान तो किया नहीं। लेकिन कर तो लिया। लेकिन फॉलो करना है तो पहले सोचो, संकल्प करने के पहले सोचो क्या यह संकल्प ब्रह्मा बाप का है! अगर है तो प्रैक्टिकल करो। करके पीछे नहीं सोचो। लेकिन पहले सोचके फिर फॉलो करो। ब्रह्मा बाप को फॉलो करना अर्थात् ब्रह्मा बाप समान बनना। हिम्मत है? फॉलो करने की हिम्मत है? जो समझते हैं करना ही है, वह हाथ उठाओ। पहले सोचना फिर करना। करके नहीं सोचना।
तो आज बापदादा विशेष सन्तुष्टता की शक्ति हर एक बच्चे में ब्रह्मा बाप समान देखने चाहते हैं। इस एक सन्तुष्टता की शक्ति में सब शक्तियां आ जायेंगी। तो आज बापदादा का विशेष वरदान है सन्तुष्टता के शक्ति भव! कुछ भी हो अपनी सन्तुष्टता को कभी नहीं छोड़ना। कई बच्चे कहते हैं, रूहरिहान करते हैं ना! तो कहते हैं सन्तुष्ट बनना सहज है, लेकिन सन्तुष्ट बनाना बहुत मुश्किल है। कोई कुछ भी करता है और आप समझते हो कि यह ठीक नहीं है फिर भी दिल में क्यों रखते हो? यह ऐसा करता, यह ऐसा करता, इसका स्वभाव ऐसा है, इसका ऐसा है...। दिल में नहीं रखो क्योंकि आपने दिल में बाप को बिठाया है। बिठाया है ना? कांध हिलाओ। बिठाया है पक्का? कि निकालते भी हो बिठाते भी हो? अगर बिठाया है तो क्या दिल में बाप के साथ बात भी रखेंगे? तो दिल में नहीं रखो।
बापदादा ने पहले भी यह युक्ति सुनाई है कि सदा ऐसी आत्मा के प्रति शुभ भावना, शुभ कामना रखकर अपनी शुभ कामना को कार्य में लगाओ और वैसे भी देखो आप समझते हो यह अच्छा नहीं करती, तो खराब चीज़ है। तो अगर कोई आपको खराब चीज़ देवे तो आप लेंगे? तो जब खराब समझते हो तो बुद्धि में रखना, दिल में रखना तो खराब चीज़ लिया क्यों? ऐसे अपनी दिल में सदा बाप को रखते हुए बाप समान बन जायेंगे। यह तो वायदा है ना, बाप समान बनना है ना! बनना है पक्का? कि पता नहीं बनेंगे या नहीं बनेंगे? यह तो नहीं सोचते? प्यार माना फॉलो फादर। तो बापदादा अभी एक-एक बच्चे को शुभ कामना, शुभ भावना सम्पन्न आत्मा देखने चाहते हैं।
टीचर्स बनेंगी? टीचर्स से बापदादा का विशेष प्यार है। क्यों प्यार है? क्योंकि बाप की गद्दी पर बैठने की हिम्मत रखी है। तो टीचर्स में हिम्मत है ना! हर एक टीचर से बाप यह चाहता है कि हर एक के फीचर से फ्युचर दिखाई दे। निमित्त टीचर्स को बापदादा कह रहे हैं लेकिन आप भी साथी हो ना! बापदादा ने पहले छोटे-छोटे बच्चों को बोर्डिंग में यही शिक्षा दी, खुशनुमा और खुशकिस्मत, हर एक का चेहरा ऐसे हो। तो अभी भी बापदादा यही चाहता है हर एक बच्चा शक्ल से दिखाई दे कि यह खुशनुमा और खुशकिस्मत वाली आत्मा है। वाणी द्वारा सेवा बहुत की और अच्छी की उसका सर्टीफिकेट तो है लेकिन अभी अपने चेहरे और चलन से सेवा में आगे बढ़ो। जैसे कोई गरीब होता है उसको लाटरी मिल गई तो उसका चेहरा और चलन बोलता है ना! उसका चेहरा देख करके सब अनुभव करते हैं आज इसको कुछ मिला है। ऐसे ही आपकी चलन और चेहरे से मान जाएं कि इन्हों को कुछ विशेष प्राप्ति है।
तो आज बापदादा क्या चाहता है? ब्रह्मा बाप समान बनो। फॉलो फादर क्योंकि समय की हालतें तो हलचल में आ भी रही हैं और आनी भी हैं इसलिए बापदादा हर बच्चे को यही शिक्षा देने चाहते हैं कि सदा खुश रहो और खुशी बांटो। जितनी खुशी बांटेंगे उतनी खुशी बढ़ेगी। आपको खुशनुमा देख दूसरे भी 5 मिनट के लिए तो खुश होवे। दु:खी आत्मायें अगर आपको देख करके 5 मिनट भी खुश हो जाएं तो उन्हों के लिए तो बहुत दिलपसन्द बात है। तो आज बापदादा हर एक बच्चे को विशेष सन्तुष्टता की शक्ति चलन और चेहरे से धारण कर और अन्य को भी कराने का विशेष ध्यान खिंचवा रहे हैं। अच्छा।
आज जो सभी पहली बार आये हैं वह उठो। बापदादा सभी के लिए कहते हैं कि बीच-बीच में समय निकाल के चाहे पुराने, चाहे नये सभी को एकदम अशरीरी बनने की ड्रिल जरूर करना है क्योंकि आने वाले समय में सेकण्ड में अशरीरी बनना ही पड़ेगा। तो यह ड्रिल कोई कहे समय नहीं मिला, कितना भी कोई बिजी हो, पानी की प्यास लगती है तो क्या पानी पीने नहीं उठेंगे! जरूरी समझके उठेंगे ना! तो यह एक मिनट अशरीरी बनने की ड्रिल यह प्रैक्टिस जरूर करो। उस समय प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। कई समझते हैं ना, समय आयेगा कर लेंगे। लेकिन नहीं। यह जन्म-जन्म का बॉडीकान्सेस का अभ्यास उस समय अशरीरी बनने नहीं देगा इसलिए अभी से कोई भी समय निकाल सारे दिन में समय प्रति समय जो भी समय निश्चित करो एक सेकण्ड में अशरीरी आत्मा हूँ, आत्मा स्वरूप में स्थित हो जाए। बॉडी कान्सेस अपने तरफ खीचें नहीं। यह अभ्यास सभी को करना है। चाहे पुराने चाहे नये क्योंकि बापदादा ने कुछ समय से यह बात कही है। लेकिन करना जरूरी है। नहीं तो श्रीमत का हाथ में हाथ देकरके नहीं चल सकेंगे। आपका वायदा है साथ चलेंगे, साथ राज्य में आयेंगे। तो यह ड्रिल सभी को करना है। बाकी नये जो भी आये हैं, खुश रहो आबाद रहो, आगे से आगे बढ़ते रहो। अच्छा।
सेवा का टर्न महाराष्ट्र , आन्ध्र और मुम्बई का है:- अच्छा। इस ज़ोन की भी संख्या बहुत है। नाम है महाराष्ट्र। तो महा होंगे ना! तो जैसे नाम है वैसे ही संख्या भी महान है।
बापदादा खुश है क्योंकि यह उठे हैं ना तो बापदादा देख करके खुश है। बाकी बापदादा की एक आशा और भी ज़ोन वालों के प्रति रह गई है। वह कौन सी है? हर सेन्टर यह खुशखबरी लिखे कि हमारा सेन्टर निर्विघ्न है, मिलनसार है। सब बाबा के बच्चे एक्यूरेट, जो कार्यक्रम बना हुआ है उस तरफ बिजी हैं। निर्विघ्न हैं। यह अभी किसी ज़ोन का नहीं आया है। तो महाराष्ट्र तो महान कार्य करेंगे ना! किसी भी ज़ोन ने अभी यह खुशखबरी नहीं भेजी है। बनना है, बनना तो आपको ही है और कौन बनेंगे! आपकी तपस्या कम नहीं है। चाहे टीचर है, चाहे स्टूडेन्ट हैं, दुनिया के हिसाब से हर एक महान आत्मायें हैं। अभी-अभी देखना आपको यह निर्विघ्न का थोड़ा सा करो तो सभी आपको जैसे आपके जड़ चित्र में शुभ भावना से देखते हैं, ऐसे आपको चैतन्य रूप में देवियों के रूप में, देवताओं के रूप में देखेंगे। बाकी सेवा सभी ने अच्छी की है। उसकी बापदादा मुबारक दे रहे हैं। अच्छा।
डबल विदेशी भाई बहिनें:- डबल विदेशी, डबल से डबल होते जाते हैं। बापदादा ने देखा कि स्व के ऊपर, स्वमान के ऊपर और अपने वृत्ति के ऊपर अटेन्शन अच्छा दे भी रहे हैं और दिला भी रहे हैं। यज्ञ स्नेही का, यज्ञ सहयोगी का पार्ट भी अच्छा बजा रहे हैं इसलिए बापदादा डबल विदेशियों को अनेक बार की मुबारक दे रहे हैं।
मधुबन वाले तो कहते ही हैं कि डबल विदेशी मधुबन का श्रृंगार हैं। तो बापदादा खुश है, परिवार भी खुश है और सबको मुबारक दे रहे हैं। खुशी है बाप को। कितने देशों से देखो इकट्ठे हुए हैं। अच्छा।
चारों ओर के दूर बैठे दिल में समाने वाले बच्चों को बापदादा भी देख रहे हैं। सभी के प्यार की खुशबू मधुबन में पहुंच रही है। तो सभी को अभी तीव्रगति से चलना है, तीव्र पुरुषार्थ करना है, तीव्रता दुनिया के लोगों में सुख की लानी है। दु:खी को सुखी करना है। यह सुखी करने का सन्देश दे करके सभी को सुखी बनाना है, इस सेवा में तीव्रता है भी और लानी भी है। अच्छा। सबको दिल का बहुत-बहुत यादप्यार स्वीकार हो।