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31 Dec 2024
“इस वर्ष के आरम्भ से बेहद की वैराग्य वृत्ति इमर्ज करो, यही मुक्तिधाम के गेट की चाबी है''
31 December 2024 · हिंदी
मधुबन अव्यक्त बापदादा ओम् शान्ति 31-12-2004
प्राणप्यारे अव्यक्त मूर्त मात-पिता बापदादा के अति स्नेही, राइट हैण्ड, रहमदिल, मास्टर दाता स्वरूप निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सभी नव युग की नई रचना, ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें, ईश्वरीय मधुर याद के साथ नये वर्ष की पदमा-पदम गुणा बधाईयां स्वीकार करना जी।
देखो, नये युग के रचयिता बापदादा अपनी नई रचना को गोल्डन वर्ल्ड की सौगात देने आये हैं। आज हम पुराने युग में, पुरानी साधारण ड्रेस में हैं, कल नये युग में नई गोल्डन ड्रेस में होंगे। तो नये वर्ष के साथ-साथ आने वाले नव युग की सभी को बहुत-बहुत बधाई हो। अब तो समय आ गया है विश्व की सर्व आत्माओं को मुक्ति, जीवनमुक्ति का वर्सा दिलाने का। बाबा कहते बच्चे, अब अपना रहमदिल, कल्याणकारी, हर आत्मा के प्रति मास्टर दाता स्वरूप इमर्ज करो। दुनिया में चारों ओर दु:ख अशान्ति बढ़ती जा रही है, ऐसे समय पर जब सभी मुक्तिदाता बाप को पुकार रहे हैं। तो आप बाबा के राइट हैण्ड बच्चे अपनी श्रेष्ठ मन्सा द्वारा, शुभ भावना, शुभ कामना द्वारा, वाणी द्वारा अथवा सम्बन्ध सम्पर्क द्वारा सभी को कुछ न कुछ दो। उनकी पुकार सुनो। दु:खियों के दु:ख दूर करो। इसके लिए बाबा कहते बच्चे, अब बेहद के वैराग्य वृत्ति को इमर्ज करो, तो सहज ही मुक्तिधाम का गेट खुल जायेगा। इस नये वर्ष में लक्ष्य रखो बाप द्वारा मिला हुआ खजाना संकल्प, श्वांस, सम्पत्ति, ज्ञान, गुण, शक्तियां सब कुछ सफल हों। सफल करने से ही सफलता मिलेगी।
तो बोलो, नये वर्ष में नये उमंग-उत्साह के साथ सब कुछ सफल करते हुए बापदादा को प्रत्यक्ष करने की सेवा करेंगे ना! एक है स्व-स्थिति, दूसरी है सेवा। दोनों बातों पर अटेन्शन रखते हुए अपनी उन्नति की प्लैनिंग के साथ साक्षात्कार मूर्त बन बाप को प्रत्यक्ष करने की सेवा भी करनी है।
यह जनवरी मास विशेष तपस्या मास है, सभी मन और मुख का मौन रख अन्तर्मुखी बन अव्यक्त वतन की सैर करेंगे। आज के इन महावाक्यों में भी बापदादा ने पूरे वर्ष के लिए होमवर्क दिया है, जिस पर आप सभी अवश्य मनन-चिंतन कर पूरा अटेन्शन देना जी।
बाकी इस बार महाराष्ट्र ज़ोन की सेवा का टर्न है। 17 हजार से भी अधिक भाई बहिनें शान्तिवन में पहुंच गये हैं। ठण्डी भी अपना अच्छा रूप दिखा रही है। डबल विदेशी भाई बहिनें भी नया वर्ष मनाने के लिए ज्ञान सरोवर में रिट्रीट कर खूब भरपूर हो रहे हैं। अच्छा! सभी को पुन: नये वर्ष की मुबारक के साथ बहुत-बहुत याद... ओम् शान्ति।
आज नवयुग रचता बापदादा अपने बच्चों से नव वर्ष मनाने के लिए, परमात्म मिलन मनाने के लिए बच्चों के स्नेह में अपने दूरदेश से साकार वतन में मिलन मनाने आये हैं। दुनिया में तो नव वर्ष की मुबारक एक दो को देते हैं लेकिन बापदादा आप बच्चों को नव युग और नये वर्ष की, दोनों की मुबारक दे रहे हैं। नया वर्ष तो एक दिन मनाने का है। नवयुग तो आप संगम पर सदा मनाते रहते। आप सभी भी परमात्म प्यार की आकर्षण में खींचते हुए यहाँ पहुंच गये हो। लेकिन सबसे दूरदेश से आने वाला कौन? डबल विदेशी? वह तो फिर भी इस साकार देश में ही हैं लेकिन बापदादा दूरदेशी कितना दूर से आये हैं? हिसाब निकाल सकते हैं, कितने माइल से आये हैं? तो दूरदेशी बापदादा चारों ओर के बच्चों को चाहे सामने डायमण्ड हाल में बैठे हैं, चाहे मधुबन में बैठे हैं, चाहे ज्ञान सरोवर में बैठे हैं, गैलरी में बैठे हैं, आप सबके साथ जो दूर बैठे देश विदेश में बापदादा से मिलन मना रहे हैं, बापदादा देख रहे हैं सभी कितने प्यार से, दूर से देख भी रहे हैं, सुन भी रहे हैं। तो चारों ओर के बच्चों को नवयुग और नये वर्ष की पदमगुणा मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो। बच्चों को तो नवयुग नयनों के सामने है ना! बस आज संगम पर हैं, कल अपने नवयुग में राज्य अधिकारी बन राज्य करेंगे। इतना नजदीक अनुभव हो रहा है? आज और कल की ही तो बात है। कल था, कल फिर से होना है। अपने नव युग की, गोल्डन युग की गोल्डन ड्रेस सामने दिखाई दे रही है? कितनी सुन्दर है! स्पष्ट दिखाई दे रही है ना! आज साधारण ड्रेस में हैं और कल नव युग की सुन्दर ड्रेस में चमकते हुए दिखाई देंगे। नव वर्ष में तो एक दिन के लिए एक दो को गिफ्ट देते हैं। लेकिन नव युग रचता बापदादा ने आप सबको गोल्डन वर्ल्ड की सौगात दी है, जो अनेक जन्म चलने वाली है। विनाशी सौगात नहीं है। अविनाशी सौगात बाप ने आप बच्चों को दे दी है। याद है ना! भूल तो नहीं गये हो ना! सेकण्ड में आ जा सकते हो। अभी-अभी संगम पर, अभी-अभी अपनी गोल्डन दुनिया में पहुंच जाते हो कि देरी लगती है? अपना राज्य स्मृति में आ जाता है ना!
आज के दिन को विदाई का दिन कहा जाता है और 12 बजे के बाद बधाई का दिन कहा जायेगा। तो विदाई के दिन, वर्ष की विदाई के साथ-साथ आप सबने वर्ष के साथ और किसको विदाई दी? चेक किया सदा के लिए विदाई दी वा थोड़े समय के लिए विदाई दी? बापदादा ने पहले भी कहा है कि समय की रफ्तार तीव्रगति से जा रही है, तो सारे वर्ष की रिजल्ट में चेक किया कि क्या मेरे पुरुषार्थ की रफ्तार तीव्र रही? या कब कैसे, कब कैसे रही? दुनिया की हालतों को देखते हुए अब अपने विशेष दो स्वरूपों को इमर्ज करो, वह दो स्वरूप हैं - एक सर्व प्रति रहमदिल और कल्याणकारी और दूसरा हर आत्मा के प्रति सदा दाता के बच्चे मास्टर दाता। विश्व की आत्मायें बिल्कुल शक्तिहीन, दु:खी, अशान्त चिल्ला रही हैं। बाप के आगे, आप पूज्य आत्माओं के आगे पुकार रही हैं - कुछ घड़ियों के लिए भी सुख दे दो, शान्ति दे दो। खुशी दे दो, हिम्मत दे दो। बाप तो बच्चों के दु:ख, परेशानी को देख नहीं सकते, सुन नहीं सकते। क्या आप सभी पूज्य आत्माओं को रहम नहीं आता! मांग रहे हैं - दो, दो, दो...। तो दाता के बच्चे कुछ अंचली तो दे दो। बाप भी आप बच्चों को साथी बना के, मास्टर दाता बनाके, अपने राइट हैण्ड बनाके यही इशारा देते हैं - इतनी विश्व की आत्मायें सभी को मुक्ति दिलानी है। मुक्तिधाम में जाना है। तो हे दाता के बच्चे अपने श्रेष्ठ संकल्प द्वारा, मन्सा शक्ति द्वारा, चाहे वाणी द्वारा, चाहे सम्बन्ध-सम्पर्क द्वारा, चाहे शुभ भावना शुभ कामना द्वारा, चाहे वायब्रेशन वायुमण्डल द्वारा किसी भी युक्ति से मुक्ति दिलाओ। चिल्ला रहे हैं मुक्ति दो, बापदादा अपने राइट हैण्डस को कहते हैं रहम करो।
अभी तक हिसाब निकालो। चाहे मेगा प्रोग्राम किया है, चाहे कान्फ्रेन्स की है, चाहे भारत में या विदेश में सेन्टर्स भी खोले हैं लेकिन टोटल विश्व के आत्माओं की संख्या के हिसाब से कितनी परसेन्ट में आत्माओं को मुक्ति का रास्ता बताया है? सिर्फ भारत कल्याणकारी हो या विदेश में जो भी 5 खण्ड हैं, तो जहाँ-जहाँ सेवाकेन्द्र खोले हैं वहाँ के कल्याणकारी हो वा विश्व कल्याणकारी हो? विश्व का कल्याण करने के लिए हर एक बच्चे को बाप का हैण्ड, राइड हैण्ड बनना है। किसको भी कुछ दिया जाता है तो किससे दिया जाता है? हाथों से दिया जाता है ना। तो बापदादा के आप हैण्डस हो ना, हाथ हो ना। तो बापदादा राइट हैण्डस से पूछते हैं, कितनी परसेन्ट का कल्याण किया है? कितनी परसेन्ट का किया है? सुनाओ, हिसाब निकालो। पाण्डव हिसाब करने में होशियार हैं ना? इसीलिए बापदादा कहते हैं अब स्व-पुरुषार्थ और सेवा के भिन्न-भिन्न विधियों द्वारा पुरुषार्थ तीव्र करो। स्व की स्थिति में भी चार बातें विशेष चेक करो - इसको कहेंगे तीव्र पुरुषार्थ।
एक बात - पहले यह चेक करो कि निमित्त भाव है? कोई भी रॉयल रूप का मैं पन तो नहीं है? मेरापन तो नहीं है? साधारण लोगों का मैं और मेरा भी साधारण है, मोटा है लेकिन ब्राह्मण जीवन का मेरा और मैं पन सूक्ष्म और रॉयल है। उसकी भाषा मालूम है क्या है? यह तो होता ही है, यह तो चलता ही है। यह तो होना ही है। चल रहे हैं, देख रहे हैं...। तो एक निमित्त भाव, हर बात में निमित्त हैं। चाहे सेवा में, चाहे स्थिति में, चाहे सम्बन्ध-सम्पर्क में चेहरा और चलन निमित्त भाव का हो। और उसकी दूसरी विशेषता होगी - निर्मान भावना। निमित्त और निर्मान भाव से निर्माण करना। तो तीन बातें सुनी - निमित्त, निर्मान और निर्माण और चौथी बात है - निर्वाण। जब चाहे निर्वाणधाम में पहुंच जायें। निर्वाण स्थिति में स्थित हो जाएं क्योंकि स्वयं निर्वाण स्थिति में होंगे तब दूसरों को निर्वाणधाम में पहुंचा सकेंगे। अभी सभी मुक्ति चाहते हैं, छुड़ाओ, छुड़ाओ चिल्ला रहे हैं। तो यह चार बातें अच्छी परसेन्ट में प्रैक्टिकल जीवन में होना अर्थात् तीव्र पुरुषार्थी। तब बापदादा कहेंगे वाह! वाह! बच्चे वाह! आप भी कहेंगे वाह! बाबा वाह! वाह! ड्रामा वाह! वाह! पुरुषार्थ वाह! लेकिन पता है अभी क्या करते हो? पता है? कभी वाह! कहते हो कभी व्हाई (why) कहते हो। वाह! के बजाए व्हाई, और व्हाई हो जाता है हाय। तो व्हाई नहीं, वाह! आपको भी क्या अच्छा लगता है, वाह! अच्छा लगता है या व्हाई? क्या अच्छा लगता है? वाह! कभी व्हाई नहीं करते हो? गलती से आ जाता है। वाह वाह! कितना अच्छा लगता है। हाँ बोलो, वाह वाह वाह!
तो इस वर्ष में कुछ करके दिखाना। सिर्फ हाथ नहीं उठाना। हाथ उठाना बहुत सहज है। मन का हाथ उठाना क्योंकि बहुत काम रहा हुआ है। बापदादा तो नज़र करते हैं, विश्व की आत्माओं के ऊपर तो बहुत तरस पड़ता है। अब प्रकृति भी तंग हो गई है। प्रकृति खुद तंग हो गई है, तो क्या करे? आत्माओं को तंग कर रही है। और बाप बच्चों को देखके तरस में आ जाते हैं। आप सबको तरस नहीं आता? सिर्फ खबर सुनकर चुप हो जाते हो, बस, इतनी आत्मायें चली गई। वो आत्मायें सन्देश से तो वंचित रह गई। अभी तो दाता बनो, रहमदिल बनो। यह तब होगा, रहम तब आयेगा जब इस वर्ष के आरम्भ से अपने में बेहद की वैराग्य वृत्ति इमर्ज करो। बेहद की वैराग्य वृत्ति। यह देह की, देहभान की स्मृति, यह भी बेहद के वैराग्य की कमी है। छोटी-छोटी हद की बातें स्थिति को डगमग करती हैं, कारण? बेहद की वैराग्य वृत्ति कम है, लगाव है। वैराग्य नहीं है लगाव है। जब बिल्कुल बेहद के वैरागी बन जायेंगे, वृत्ति में भी वैरागी, दृष्टि में भी बेहद के वैरागी, सम्बन्ध-सम्पर्क में, सेवा में सबमें बेहद के वैरागी... तभी मुक्तिधाम का दरवाजा खुलेगा। अभी तो जो आत्मायें आ रही हैं फिर जन्म लेंगी, फिर दु:खी होंगी। अब मुक्तिधाम का गेट खोलने के निमित्त तो आप हो ना? ब्रह्मा बाप के साथी हो ना! तो बेहद की वैराग्य वृत्ति है गेट खोलने की चाबी। अभी चाबी नहीं लगी है, चाबी तैयार ही नहीं की है। ब्रह्मा बाप भी इन्तजार कर रहा है, एडवांस पार्टी भी इन्तजार कर रही है, प्रकृति भी इन्तजार कर रही है, तंग हो गई है बहुत। माया भी अपने दिन गिनती कर रही है। अभी बोलो, हे मास्टर सर्वशक्तिवान, बोलो क्या करना है?
इस वर्ष में कोई नवीनता तो करेंगे ना! नया वर्ष कहते हैं तो नवीनता तो करेंगे ना! अभी बेहद के वैराग्य की, मुक्तिधाम जाने की चाबी तैयार करो। आप सभी को भी तो पहले मुक्तिधाम में जाना है ना। ब्रह्मा बाप से वायदा किया है - साथ चलेंगे, साथ आयेंगे, साथ में राज्य करेंगे, साथ में भक्ति करेंगे...। तो अभी तैयारी करो, इस वर्ष में करेंगे कि दूसरा वर्ष चाहिए? जो समझते हैं इस वर्ष में अटेन्शन प्लीज, बार-बार करेंगे वह हाथ उठाओ। करेंगे? फिर तो एडवांस पार्टी आपको बहुत मुबारक देगी। वह भी थक गये हैं। अच्छा।
अच्छा - बापदादा खुश है जो बापदादा ने डायमण्ड हाल बनवाया है, उसको सफल कर रहे हैं इसीलिए सफलता भव। हर सेकण्ड को, हर संकल्प को, हर बोल को, हर कदम को, हर वस्तु को सफल करो और सफल कराओ। 12 बजे के बाद इस नये वर्ष में बापदादा की तरफ से पहला वरदान अपने को देना - सफलता भव। संकल्प भी असफल नहीं हो क्योंकि आपका एक शुभ संकल्प विश्व का कल्याण करने वाला है। इतना अमूल्य है। एक-एक सेकण्ड विश्व कल्याण का आधार है इसीलिए सफल करो सफलता मूर्त बनो। बस यह चेक करो सेकण्ड जो बीता, संकल्प जो चला, सफल हुआ? तो सभी आज मैजारिटी पट पर बैठे हैं। अपने राज्य में यह नहीं होगा। लेकिन वहाँ न बाप आयेगा, न आप आयेंगे। बैठेंगे कहाँ। अभी मजा ले लो। पट में नहीं बैठे हो, बापदादा तो आपको दिलतख्त पर देख रहे हैं। लेकिन दृश्य बहुत अच्छा लग रहा है। सब बिन्दु होकर बैठे हैं। सर्दी लग रही है। सर्दी भाग गई ना! अच्छा!
अभी-अभी एक सेकण्ड में बिन्दु बन बिन्दु बाप को याद करो और जो भी कोई बातें हों उसको बिन्दु लगाओ। लगा सकते हो? बस एक सेकण्ड में “मैं बाबा का, बाबा मेरा।'' अच्छा।
सेवा का टर्न महाराष्ट्र वालों का है:- अच्छा - हर ज़ोन को सेवा का गोल्डन चांस मिलता है। इन 15-20 दिनों में सच्चे ब्राह्मणों की सेवा कर अपने पुण्य की कोठियां भर देते हैं क्योंकि अच्छी सेवा करते हैं तो सबके दिल से क्या निकलता है? बहुत अच्छा, बहुत अच्छा, बहुत अच्छा। तो यह दुआयें पुण्य के खाते में जमा हो जाती हैं। तो किसी को भी पुण्य का खाता जमा करना सहज है, योगबल से तो होता ही है लेकिन यह कर्म करते भी अगर पुण्य का खाता जमा करना है तो कर्मयोगी स्थिति में यज्ञ सेवा करो तो आपका खाता भरपूर हो ही जायेगा। यह सहज विधि है। महाराष्ट्र तो है, महाराष्ट्र की संख्या भी महा है। सेन्टर्स भी ज्यादा हैं, गीता पाठशालायें तो बेशुमार हैं। अच्छा है।
डबल विदेशी बहुत आये हैं:- डबल विदेशी तो शान्तिवन वा मधुबन का विशेष श्रृंगार हैं। बापदादा देखते हैं एक-एक बच्चा विशेष डबल हीरो है। रत्न भी है और हीरो पार्ट बजाने वाले भी हैं। तो हर एक विदेशी डबल हीरो है। देखो कितने देशों में और वहाँ से ही तैयार होके वहाँ ही सेवा कर रहे हैं। अच्छा 45 देश वालों को पदमापदम मुबारक हो।
अभी चारों ओर के सर्व नये युग के मालिक बच्चों को, चारों ओर के नये वर्ष मनाने के उमंग-उत्साह वाले बच्चों को सदा उड़ते रहना और उड़ाते रहना, ऐसे उड़ती कला वाले बच्चों को, सदा तीव्र पुरुषार्थ द्वारा विजय माला के मणके बनने वाले विजयी रत्नों को बापदादा का नये वर्ष और नये युग की दुआओं के साथ-साथ पदमगुणा थालियां भर-भर के मुबारक हो, मुबारक हो। एक हाथ की ताली बजाओ। अच्छा।