“ सदा शुभचिंतक बनो , शुभचिंतन करो , शुभ वृत्ति से शुभ वायुमण्डल बनाओ तथा जीरो और हीरो की स्मृति में रहो ”
प्राणप्यारे अव्यक्त बापदादा के अति लाडले, सदा अपनी शक्तिशाली मन्सा द्वारा प्रकृति सहित पूरे विश्व को सकाश देने वाले, गुप्त रूप से अन्तर्मुखी बन सदा तीव्र पुरुषार्थ करने वाले, स्नेही सो समान निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सर्व ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें,
ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी।
बाद समाचार - आज हम सबके अति प्रिय ब्रह्मा बाबा के पुण्य स्मृति दिवस पर देश विदेश में सभी परमात्म स्नेह में समाये हुए हैं इसलिए प्यारे बापदादा भी अपना विराट रूप धारण कर बांहे पसार सभी स्नेही बच्चों को अपनी बांहों में समा रहे हैं। पाण्डव भवन का दृश्य तो सदा अलौकिक रहता ही है। इस दिन विशेष अमृतवेले 2 बजे से ही सभी चारों धामों की मौन परिक्रमा करते हुए, साकार बाप के स्नेह में समाये हुए अपनी झोली अनेकानेक वरदानों से भरते हैं। ठण्डी-ठण्डी हवाओं के बीच यह कितना सुन्दर दृश्य होता है। सबके दिलों में एक बाबा ही समाया हुआ रहता है।
मधुबन के चारों धामों को हर वर्ष की भांति इस बार भी बहुत सुन्दर वैरायटी फूल मालाओं से सजाया गया है। प्रात:काल साकार व अव्यक्त महावाक्यों की मधुर मुरली सुनकर सभी बाबा के बच्चे शान्तिस्तम्भ पर विशेष अपनी मौन श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उसके पश्चात दूध फल का नाश्ता करके सभी स्थानों पर योग तपस्या में लवलीन हो जाते हैं। इस बार सेवा का टर्न पंजाब ज़ोन का है, पंजाब में तो वैसे भी पांचों नदियों का संगम होता, (पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखण्ड, जम्मू-कश्मीर) अमृतवेले से शान्तिवन के सभी यादगार स्थानों की यात्रा करते, विशाल डायमण्ड हाल में तपस्या करते रहे, इनके साथ देश के अन्य स्थानों से तथा डबल विदेशी बाबा के बच्चे भी काफी संख्या में पहुंचे हुए हैं। इतने सब बच्चे होते भी चारों ओर अव्यक्ति वातावरण है। दोपहर में सभी ने ब्रह्माभोजन पान किया और शाम के समय प्यारे बापदादा को भोग लगाते हुए, बाबा के अव्यक्ति महावाक्य वीडियो द्वारा सुने। यह महावाक्य अव्यक्त पार्ट के 40 वर्ष पूरे होने पर बापदादा ने उच्चारित किये हैं इसलिए सभी को 4 के साथ 0 का अलग-अलग महत्व सुनाया है, जो आप सभी ने मधुर महावाक्यों से सुन लिया होगा।
ज्ञानी तू आत्मा बच्चों को बाबा सदा स्नेह की सबजेक्ट पर विशेष ध्यान खिंचवाते हैं क्योंकि स्नेह ही मेहनत को मुहब्बत में बदल देता है। स्नेह की शक्ति पहाड़ जैसी समस्या को रूई अथवा पानी जैसा हल्का बना देती है। स्नेह की छत्रछाया सदा सेफ रखती है। स्नेह से भगवान को हम अपना दोस्त बना लेते हैं इसलिए कहते हैं खुदा दोस्त। खुदा, दोस्ती के नाते सब समस्यायें सहज कर देते हैं। ज्ञान बीज है, लेकिन प्रेम के पानी से फल की प्राप्ति होती है। स्नेह से जब मेरा बाबा कहते हैं तो सर्व खजानों की चाबी मिल जाती है। स्नेही बच्चों के आगे सदा बापदादा हजूर हाज़िर हो जाता है। बोलो, ऐसे सच्चे स्नेही बाबा के बच्चे स्नेह के झूले में झूलते रहते हो ना।
बाकी तो देश विदेश में सभी स्थानों पर इस जनवरी मास में अव्यक्ति वातावरण के बीच तपस्या की बहुत अच्छी भट्ठियां चल रही हैं। सभी योग तपस्या के बहुत अच्छे-अच्छे अनुभव कर रहे हैं। अच्छा - सभी को बहुत-बहुत याद.. ओम् शान्ति।
18-1-25 ओम् शान्ति “अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज-वीडियो 18-01-09 मधुबन
आज बापदादा चारों ओर के अपने सेवा के साथी बच्चों से मिलने आये हैं। आदि सेवा के साथी और साथ में और भी सेवा के साथी बन बहुत अच्छी सेवा की वृद्धि कर रहे हैं, तो बापदादा अपने साथियों को देख खुश हो रहे हैं। और दिल में गीत गा रहे हैं वाह! मेरे विश्व परिवर्तन सेवा के साथी वाह!
आज अमृतवेले से चारों ओर स्नेह की मालायें बापदादा को डाल रहे थे। तीन प्रकार की मालायें थी एक थी बाप समान बनने के उमंग-उत्साह की, दूसरी थी अति बिछुड़ी हुई बंधन वाली बांधेली गोपिकाओं की, उन्हों की मालायें तो थी लेकिन चमकते हुए अति अमूल्य आंसुओं की माला भी थी। एक-एक आंसू मोती समान चमक रहे थे और तीसरी माला कुछ-कुछ बच्चों के उल्हनों की थी।
आज अमृतवेले से लेके सभी में विशेष स्नेह समाया हुआ दिखाई दे रहा था। बापदादा ने विराट रूप जैसे बांहें पसार सब बच्चों को बांहों में समा लिया। वैसे आज का दिन स्नेह के साथ सर्व पावर्स की विल देने का भी था। एक बच्ची को हाथ में हाथ मिलाके, साथ में सभी बच्चों को (शक्ति सेना और पाण्डवों को) विल पावर्स की विल की। बापदादा ने देखा कई बच्चे पाण्डव भी और शक्तियां भी, गुप्त रूप से अन्तर्मुखी बन पुरुषार्थ में तीव्र गति से चल रहे हैं। बाहर से दिखाई नहीं देते हैं लेकिन पुरुषार्थी अच्छे हैं। बापदादा ने आज सभी बच्चों का विशेष रूप देखा, स्नेह की सबजेक्ट सभी के चेहरों को चमका रही थी। ज्ञानी तू आत्मा बच्चे तो हैं लेकिन स्नेह की सबजेक्ट आवश्यक है क्योंकि स्नेही मेहनत कम और मुहब्बत के अनुभव में सहज रहते हैं। स्नेह की शक्ति कैसी भी पहाड़ जैसी समस्या हो, पहाड़ को भी रूई बना देती है। पहाड़ को भी पानी जैसा हल्का बना देती है। स्नेह एक छत्रछाया है। छत्रछाया के कारण वह सदा सेफ रहता है। सहज होता है। स्नेह से परमात्मा वा भगवान को भी अपना दोस्त बना देते हैं। जो यादगार है खुदा दोस्त का। खुदा को दोस्त बनाके कोई भी समस्या दोस्ती के नाते से सहज कर देते हैं। बाप को अपना साथी बना देते हैं। ज्ञान बीज है, लेकिन प्रेम का पानी बीज में प्राप्ति के फल लगा देता है। तो ऐसे बाप के स्नेही बच्चे बाप को याद करना मेहनत नहीं समझते हैं लेकिन भूलना मुश्किल समझते हैं। स्नेही कभी स्नेह को भूल नहीं सकता। मेरा बाबा कहा, दिल के स्नेह से और सर्व खजानों की चाबी मिल जाती है। तो दोनों, बापदादा ऐसे स्नेही, जिनके आगे बापदादा भी हज़ूर हाज़िर हो जाता है। याद तो सब करते हैं लेकिन कोई थोड़ी-थोड़ी मेहनत से करते हैं और कोई सदा स्नेह के सागर में लवलीन रहते हैं। दुनिया वाले कहते हैं आत्मा परमात्मा में लीन हो जाती लेकिन आत्मा परमात्मा के प्यार में लवलीन हो जाती है। लीन नहीं होती लवलीन होती है।
तो आज का दिन मुहब्बत में लवलीन का है। मेहनत समाप्त हो मुहब्बत के रूप में बदल जाती है। तो बापदादा ने सभी बच्चों की रिजल्ट भी देखी, होमवर्क मैजारिटी ने किया है। बाप समान बनने का लक्ष्य बार-बार रिवाइज भी किया, रियलाइज़ भी किया। 75 परसेन्ट बच्चों की रिजल्ट अच्छी रही। और यह बाप समान बनना ही है, कुछ भी तूफान आये, है ही कलियुग के समाप्ति का समय, तो तूफान तो आयेंगे, परिवर्तन का समय है ना, लेकिन आप बच्चों के लिए तूफान क्या है! तूफान, तूफान नहीं लेकिन तोहफा है क्योंकि बापदादा के वरदान का हाथ सभी पुरुषार्थी बच्चों के माथे पर है। जिन्होंने दृढ़ संकल्प अर्थात् दृढ़ता की चाबी कार्य में लगाई उन्होंने अभी की रिजल्ट प्रमाण सफलता भी प्राप्त की है लेकिन सदाकाल के लिए तूफान को तोहफा बनाए, समस्या को समाधान रूप दे आगे बढ़ते चलो। तो बापदादा अभी की रिजल्ट में खुश है। जो योग तपस्या की है उसमें लक्ष्य दृढ़ रखा है, बनना ही है।
40 वर्ष अव्यक्त पालना के पूरे हुए हैं। तो 40 वर्ष में पहले क्या आता - बिन्दू, जीरो। तो जीरो याद दिलाता कि मैं हीरो, सच्चा हीरो, महान हीरो हूँ और हीरो पार्टधारी बन हर कार्य हीरो समान करना है। तो जीरो, हीरो यह सदा याद रहे और बाकी जो चार है, उसमें चार बातें नेचुरल जीवन में करनी है, दृढ़ता पूर्वक करनी हैं, करेंगे? तैयार हैं? कुछ भी पेपर आवे लेकिन चार बातें अपने जीवन में करनी ही है। पक्का? पक्का? पक्का? पीछे वाले, पक्के हैं ना! कच्चे को माया खा जाती है इसीलिए पक्का रहना। एक बात - सदा शुभचिंतक, कोई की कमजोरी देख वा सुन रहमदिल बन शुभ चिंतक बन उनको सहयोग देना ही है। कमजोरी को नहीं देखना है लेकिन सहयोग देना ही है। इसको कहते हैं शुभ चिंतक। पक्का रहेगा ना! सहारे दाता, रहमदिल बन सहयोग दो। उससे किनारा या घृणा नहीं करना, क्षमा करना। परवश के ऊपर कभी घृणा नहीं की जाती है। सहारा दिया जाता है। तो शुभ चिंतक और दूसरा है शुभ चिंतन। आजकल बापदादा देखते हैं - मैजारिटी बच्चों में कभी-कभी व्यर्थ संकल्प बहुत चलता है, इसमें अपनी जमा हुई शक्तियां व्यर्थ चली जाती हैं, इसलिए शुभ चिंतन के लिए स्वमान का कोई न कोई अपना टाइटिल मन को होमवर्क दे दो, मन का टाइमटेबल बनाओ, कर्म का तो टाइमटेबल बनाते हो लेकिन मन का टाइमटेबल बनाओ। अमृतवेले मिलन मनाने के बाद मन को कोई न कोई स्वमान दे दो लेकिन जैसे सुनाया है कि 12-13 बारी सभी को टाइम मिलता है, उसमें रियलाइज भी करो, रिवाइज भी करो तो मन बिजी रहने से व्यर्थ संकल्प में समय नहीं जायेगा, मेहनत नहीं करनी पड़ेगी, हर समय संगमयुग जो मौज का युग है, उसी मौज में रहेंगे। तो दूसरा सुनाया - शुभचिंतन। चेक करो और चेंज करो। तीसरा है - शुभ वृत्ति। अशुभ वृत्ति वायुमण्डल भी अशुद्ध फैलाती है इसीलिए शुभ वृत्ति। और चौथा है हर एक को यह जिम्मेवारी लेनी है कि मुझे, मेरा काम है खास, दूसरे को नहीं देखना है, मेरा काम है शुभ वायुमण्डल बनाना। जैसे कभी भी वायुमण्डल में बदबू होती है तो क्या करते हो? खुशबू फैलाते हो ना! बदबू सहन नहीं होती, कोई न कोई खुशबू का साधन अपनाते हो, ऐसे साधारण वायुमण्डल वा अशुभ वायुमण्डल बदलना ही है। चाहे छोटा है, चाहे नया है, लेकिन सबकी जिम्मेवारी है। दृढ़ संकल्प करना है मुझे शुभ वायुमण्डल बनाना ही है। यह प्रतिज्ञा प्रत्यक्षता करेगी। प्रतिज्ञा करते हो, बापदादा खुश होता है लेकिन प्रतिज्ञा में कभी-कभी दृढ़ता नहीं होती है इसीलिए सफलता जो चाहते हो, जितनी चाहते हो उतनी नहीं होती। सारे विश्व का, प्रकृति का, आत्माओं का, आत्माओं में ब्राह्मण आत्मायें भी आ जाती हैं, हर एक अपने सेवास्थान का ऐसा वायुमण्डल दृढ़ता से बनाओ, कुछ त्याग करना पड़े तो कर लो, यह त्याग करे तो मैं करूं, नहीं। सिस्टम ठीक हो तो... तो तो नहीं करो। मुझे तो करना ही है। विश्व परिवर्तक हूँ, यह स्वमान है ना! सभी विश्व परिवर्तक हो ना! हाथ उठाओ। अच्छा विश्व परिवर्तक! बहुत अच्छा। तो पहले बापदादा देखने चाहते हैं, है भी होगा भी लेकिन इस वर्ष में बापदादा छोटे या बड़े सेवाकेन्द्र का चक्कर लगावे तो वायुमण्डल कैसा हो? जैसे आज का दिन स्नेह और शक्ति का है, ऐसे गांव-गांव का सेन्टर, बड़ा सेन्टर सभी का वायुमण्डल चैतन्य मन्दिर हो। निगेटिव को पॉजिटिव बनाना इसमें पहले मैं। पहले आप नहीं करना, पहले मैं, क्योंकि बापदादा और एडवांस पार्टी और आजकल तो प्रकृति भी इन्तजार कर रही है। इन्तजाम करने वाले आप हो, आपको इन्तजार नहीं करना है, इन्तजाम करना है।
आज चारों ओर भय फैला हुआ है, सबके दिल में एक ही संकल्प है मैजारिटी दुनिया वालों के, कल क्या होगा! आपको पता है कल क्या होगा! तो परिवर्तन करने में पहले मैं निमित्त बनूंगा, यह संकल्प कौन करता है? इसमें हाथ उठाओ। करना पड़ेगा, करना पड़ेगा। बदलना पड़ेगा। रक्षक बनना पड़ेगा। कुछ छोड़ना पड़ेगा और प्यार लेना पड़ेगा। मन का हाथ उठाया या यह हाथ उठाया? किसने मन का हाथ उठाया? क्योंकि मन बदला तो विश्व बदला। तो इस वर्ष में क्या स्लोगन होगा? क्या स्लोगन होगा? “नो प्राबलम''। विजय का झण्डा दिल में लहरेगा और सभी खुशी की डांस सदा मन में करेंगे, मन की डांस है खुशी। तो हर समय खुशी की डांस करेंगे। और दाता के बच्चे हो तो जो भी आवे हर एक को कोई न कोई गुण की गिफ्ट दो। तो एक सेकण्ड में वह दृढ़ संकल्प, दाता का संकल्प लिफ्ट बन जायेगा और सेकण्ड में परमधाम, सूक्ष्मवतन, स्थूल मधुबन साकार वतन, जहाँ चाहेंगे वहाँ बिना मेहनत के सेकण्ड में पहुंच जायेंगे। कोई भी सामने आये उसको खाली हाथ नहीं भेजना, कोई न कोई गुण की, चेहरे से, चलन से, मुख से गुण की सौगात के बिना नहीं मिलना।
तो इस वर्ष के हर मास की रिजल्ट अपने पास भी रखना और यज्ञ में टीचर द्वारा ओ.के. का कार्ड भेजना, लम्बा पत्र नहीं भेजना, ओ.के. का कार्ड भेजना। कार्ड भी लम्बा नहीं भेजना, जो दुनिया में कार्ड चलता है वह नहीं, टीचर द्वारा जो वरदान का कार्ड मिलता है वह भेजना। गुणों की सौगात, शक्तियों की सौगात कितनी है? लिस्ट गिनती करो तो कितनी बड़ी लिस्ट है। और जितना देंगे उतनी कम नहीं होगी बढ़ती जायेगी। जैसे कहते हैं ना छू मंत्र, तो यह शिव मंत्र कभी कोई गुण आपसे कम नहीं होगा और ही बढ़ेगा क्योंकि कहावत है, दे दान छूटे ग्रहण। अच्छा। आज टर्न किसका है?
सेवा का टर्न पंजाब ज़ोन का है:- यज्ञ सेवा का गोल्डन चांस मिलना यह बहुत बड़ा पुण्य जमा करने का है, हर कदम यज्ञ सेवा करना अर्थात् अपना पुण्य जमा करना। तो इन 10-15 दिन में हर कदम सेवा किया तो कितने पदम बने? यज्ञ सेवा महान सेवा है। और बापदादा ने देखा है कि जो भी ज़ोन यह गोल्डन चांस लेता है वह बहुत सिक व प्यार से सेवा करते हैं। रिजल्ट वेरी गुड होती है। तो आप सबकी भी रिजल्ट अच्छी है और अच्छे ते अच्छी रहेगी। अपना खुशनसीब का टाइटिल सदा याद रखना क्योंकि बाप मिला अर्थात् सर्व प्राप्तियों का भण्डार मिला। तो कहावत है भण्डारा भरपूर, सब दु:ख दूर तो क्या करेंगे! खुश ही रहेंगे ना! अच्छी सेवा भी कर रहे हो। सेवा करना अर्थात् वरदान प्राप्त करना। तो सेवा में सफलतामूर्त हैं ना! कांध हिलाओ। टीचर्स, सफलतामूर्त हैं ना! कहो सफलता तो हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है। बोलो। सफलता हमारे गले का हार है। अच्छा।
अभी सभी सदा जो चार बातें सुनाई और पांचवा जीरो और हीरो सुनाया, तो इन बातों का मनन करते हुए मग्न अवस्था में रहने वाले ब्राह्मण सो फरिश्ता आत्मायें, देवता बनना तो आपका जन्म सिद्ध अधिकार है, फरिश्ता सो देवता है ही, तो सदा स्नेह के लव में लीन, लवलीन रहने वाले, सदा दृढ़ता के संकल्प की चाबी को मन में, बुद्धि में स्मृति में रखने वाले, क्योंकि इस चाबी के पीछे माया बहुत चक्कर लगाती है। तो मन और बुद्धि से सदा समर्थ रहने वाले चारों ओर के बच्चों को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते।
