Search for a command to run...
6 Feb 1976
“बाबा के सहयोगी - राईट हैण्ड और लेफ्ट हैण्ड”
6 February 1976 · हिंदी
बापदादा सभी बच्चों को आज विशेष अपने सहयोगी रूप में देख रहे हैं। बाप के सहयोगी स्वरूप का अपना यादगार जानते हो व देखा है? कौन-सा है? सहयोगी स्वरूप भुजाओं के रूप में दिखाया है। जैसे शरीर के विशेष कार्यकर्ता भुजायें हैं, वैसे बापदादा के कर्तव्य में कार्यकर्ता निमित्त रूप में आप सब बच्चे हैं। सदैव बाप के सहयोगी अर्थात् स्वयं को बाप की भुजायें समझ कार्य करते हो? भुजाओं में भी राइट और लेफ्ट होता है। ऐसे कर्तव्य में, सदा यथार्थ रूप में साथ निभाने वाले साथी को व मददगार को भी कहा जाता है कि यह हमारा राइट हैण्ड है। तो एक है राइट हैण्ड, दूसरे हैं लेफ्ट हैण्ड लेकिन सहयोगी दोनों हैं। इसलिये साकार बाप ब्रह्मा की अनेक भुजायें प्रसिद्ध हैं। राइट हैण्ड किसको कहते हैं? हैण्ड तो सभी हो। बिना हैण्ड के कोई भी कार्य सिद्ध नहीं हो सकता। इसलिये इस साकारी दुनिया में कहावत भी है कि इस कार्य में अंगुली देना वा इस कार्य में हाथ बटाना। तो हाथ अर्थात् बाँहों की व अंगुली की निशानी सहयोग की है। सहयोगी सब हो, लेकिन नम्बरवार हैं।
राइट हैण्ड की विशेषता सदा स्वच्छ अर्थात् शुद्ध और श्रेष्ठ है। जैसे कोई भी श्रेष्ठ व शुद्ध कार्य शरीर के राइट हैण्ड द्वारा ही किया जाता है, ऐसे बापदादा के सहयोगी राइट हैण्ड सदा बोल में, कर्म में और सम्पर्क में श्रेष्ठ और शुद्ध अर्थात् प्योर रहते हैं अर्थात् सदा श्रेष्ठ कार्य अर्थ स्वयं को निमित्त समझ कर चलते हैं। जैसे भुजाओं द्वारा कार्य कराने वाली शक्ति आत्मा है, भुजायें करनहार हैं और आत्मा करावनहार है, ऐसे ही राइट हैण्ड सहयोगी सदैव अपने करावनहार बाप को स्मृति में रखते हुए निमित्त करनहार बनते हैं। स्वयं को करावनहार नहीं समझते, इसीलिये उनके हर कर्म में न्यारेपन, निरहंकारीपन और नम्रतापन के नव-निर्माण की श्रेष्ठता भरी हुई होगी। हर सेकेण्ड, हर संकल्प सम्पूर्ण पवित्र अर्थात् स्वच्छ होगा जिसको सच्चाई और सफाई कहते हैं। राइट हैण्ड विशेष शक्तिशाली होते हैं। वैसे कोई भी विशेष बोझ उठाने के लिये राइट हैण्ड ही उठाया जाता है। ऐसे राइट हैण्ड सहयोगी आत्मा सदैव विश्व-कल्याण, विश्व-परिवर्तक के कार्य के जिम्मेवारी का बोझ अर्थात् रेस्पॉन्सिबिलिटी अति सहज रीति से उठा सकते हैं। अर्थात् वे अपने को रेस्पॉन्सिबुल अनुभव करेंगे, सदा मास्टर सर्वशक्तिमान् की स्थिति अनुभव करेंगे। राइट हैण्ड की विशेषता - कार्य की गति में अर्थात् स्पीड में तीव्रता होती है। ऐसे ही राइट हैण्ड सहयोगी आत्मा भी हर सब्जेक्ट की धारणा में व प्रैक्टिकल स्वरूप को लाने में तीव्र पुरुषार्थी होंगे, सदा एवररेडी होंगे। यह है राइट हैण्ड की विशेषता।
लेफ्ट हैण्ड सहयोगी सदा रहते हैं, लेकिन स्वच्छता के साथ-साथ अस्वच्छता अर्थात् संकल्प, वाणी और कर्म में कभी-कभी कुछ-न-कुछ अशुद्धि भी रह जाती है अर्थात् सम्पूर्ण स्वच्छ नहीं। पुरुषार्थ की गति में भी तीव्रता कम रहती है। करेंगे, सोचेंगे, लेकिन लेफ्ट अर्थात् लेट करेंगे। साथ देंगे, कार्य करेंगे, लेकिन पूरी जिम्मेदारी उठाने की हिम्मत नहीं रखेंगे। सदा उल्लास, हिम्मत रखेंगे, लेकिन निराधार नहीं होंगे। उनकी स्टेज बहुत समय वकील अर्थात लॉयर की होती है। कायदे ज्यादा सोचेंगे लेकिन फायदा कम पायेंगे। स्वयं, स्वयं के जस्टिस नहीं बन सकेंगे। हर छोटी बात में भी फाइनल जजमेन्ट के लिये जस्टिस की आवश्यकता अनुभव करेंगे। राइट हैण्ड लॉ फुल हैं, जस्टिस हैं लेकिन लॉयर नहीं।
अब अपने को चेक करो कि राइट हैण्ड हो या लेफ्ट हैण्ड? लॉयर हो या लॉ फुल हो? बापदादा के तो दोनों ही सहयोगी हैं। सदा अपने को सहयोगी समझने से सहज योगी बन जायेंगे। करावनहार बापदादा के निमित्त करनहार समझ कर चलने से सदैव निश्चिन्त और हर्षित रहेंगे।
तो आज बापदादा अपने सहयोगी भुजाओं को देख रहे हैं। भुजाएं तो सभी हो ना? सभी के दिल में यह शुभ संकल्प सदा रहता है कि हम सब विश्व नव निर्माण करने वाले विश्व-परिवर्तक हैं? विश्व के परिवर्तन के पहले स्वयं का सम्पूर्ण परिवर्तन किया है? जितना स्वयं के परिवर्तन में कमी होगी उतना ही विश्व-परिवर्तन की गति कम होगी। स्वयं के परिवर्तन से ही समय का परिवर्तन कर सकेंगे। स्वयं को देखो तो समय का मालूम स्वत: ही पड़ जायेगा। परिवर्तन के समय की घड़ी आप हो। तो स्वयं की घड़ी में टाइम देखो। सारे विश्व का अर्थात् सर्व आत्माओं का अटेन्शन, अब आप निमित्त बनी हुई समय की घड़ी पर है कि अब और कितना समय रहा हुआ है। इसलिये इस पुरानी दुनिया के समय को समाप्त करने के निमित्त, स्वयं को समझते हुए, स्वयं को सम्पन्न बनाओ। समझा? अच्छा।
ऐसे विश्व-परिवर्तक, रात को दिन में परिवर्तन करने वाले, पुराने को नया बनाने वाले बापदादा के श्रेष्ठ सहयोगी अर्थात् सदा सहजयोगी, ऐसे सदा विश्व के हितकारी, विश्व कल्याणी श्रेष्ठ आत्माओं को बाप-दादा का याद प्यार और नमस्ते।