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कर्म / कृति - Action - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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कर्म / कृति - Action
कर्म / कृति - Action
131 unique murli dates in this topic
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తెలుగు
131 murlis in हिंदी
18/05/1969
“रूहानी ज्ञान-योग के ज्योतिषी”
26/05/1969
“सम्पूर्ण स्नेही की परख”
16/07/1969
“किसी भी कार्य में सफल होने का साधन - साहस को नहीं छोड़ना और आपसी स्नेह कायम रखना”
23/07/1969
“सफलता का आधार - परखने की शक्ति”
28/09/1969
“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”
25/10/1969
“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”
09/11/1969
“भविष्य को जानने की युक्तियां”
28/11/1969
“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”
25/12/1969
“अनासक्त बनने के लिए तन और मन को अमानत समझो”
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
14/05/1970
“समर्पण का गुह्य अर्थ”
29/05/1970
“समीप रत्नों की निशानियां”
07/06/1970
“दिव्य मूर्त बनने की विधि”
27/07/1970
“अव्यक्त बनने के लिए मुख्य शक्तियों की धारणा”
30/07/1970
“महारथी अर्थात् महानता”
06/08/1970
“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”
31/12/1970
“अमृतवेले से परिवर्तन शक्ति का प्रयोग”
21/01/1971
“अब नहीं तो कब नहीं”
26/01/1971
“ज़िम्मेवारी उठाने से फायदे”
01/03/1971
“सिद्धि स्वरूप बनने की सहज विधि”
15/04/1971
“त्रिमूर्ति बाप के बच्चों का त्रिमूर्ति कर्तव्य”
29/04/1971
“बेहद के पेपर में पास होने का साधन”
06/05/1971
“बापदादा का विशेष श्रृंगार - ‘नूरे-रत्न'”
24/05/1971
“पोज़ीशन में ठहरने से अपोज़ीशन समाप्त”
01/08/1971
“स्वयं की स्टेज़ को सेट करने की विधि”
05/10/1971
“सम्पूर्णता की निशानी 16 कलायें”
26/10/1971
“कर्म का आधार वृत्ति”
21/01/1972
“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”
03/02/1972
“स्वयं को जानने से संयम और समय की पहचान”
15/05/1972
“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”
20/05/1972
“सार-स्वरूप बनने से संकल्प और समय की बचत”
27/05/1972
“रावण से विमुख और बाप के सम्मुख रहो”
10/06/1972
“सूक्ष्म अभिमान और अनजानपन”
21/06/1972
“विश्व-महाराजन बनने वालों की विश्व-कल्याणकारी स्टेज”
24/06/1972
“एवररेडी बन अन्तिम समय का आह्वान करो”
11/07/1972
“निर्णय शक्ति को बढ़ाने की कसौटी - ‘साकार बाप के चरित्र'”
18/07/1972
“कमजोरियों की समाप्ति समारोह करने वाले ही तीव्र पुरुषार्थी हैं”
22/07/1972
“नष्टोमोहा बनने की भिन्न-भिन्न युक्तियाँ”
02/08/1972
“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”
04/08/1972
“सर्विसएबुल, सेंसीबुल और इसेंसफुल की निशानियां”
09/11/1972
“ज्ञान सितारों का सम्बन्ध ज्ञान सूर्य और ज्ञान चन्द्रमा के साथ”
12/11/1972
“अलौकिक कर्म करने की कला”
24/12/1972
“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”
13/04/1973
“भक्त और भावना का फल”
02/08/1973
“यथार्थ विधि से सिद्धि की प्राप्ति”
23/09/1973
“विश्व की आत्माओं को लाइट व माइट देने वाला ही विश्व-अधिकारी”
14/07/1974
“बाप समान सफलता-मूर्त बनने का साधन - सर्व के प्रति शुभ भावना”
09/01/1975
“सम्पूर्ण बनने में सबसे बड़ा विघ्न अलबेलापन”
19/10/1975
“वृक्षपति द्वारा कल्प-वृक्ष की दुर्दशा का आंखों देखा हाल”
26/10/1975
“विकारी देह रूपी साँप से सारी कमाई खत्म”
06/02/1976
“बाबा के सहयोगी - राईट हैण्ड और लेफ्ट हैण्ड”
10/01/1977
“जैसा लक्ष्य वैसा लक्षण”
02/02/1977
“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”
06/02/1977
“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”
21/05/1977
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”
29/05/1977
“पुरुषार्थ की रफ्तार में रुकावट का कारण और उसका निवारण”
10/06/1977
“मन्त्र और यन्त्र के निरन्तर प्रयोग से अन्तर समाप्त”
02/01/1979
“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”
14/01/1979
“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”
30/01/1979
“सर्व बन्धनों से मुक्ति की युक्ति”
28/12/1979
“सिद्धि स्वरूप होने की विधि - एकाग्रता”
19/03/1981
“विश्व के राज्य-अधिकारी कैसे बने?”
25/03/1981
“महानता का आधार - संकल्प, बोल, कर्म की चेकिंग”
27/03/1981
“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”
29/03/1981
“ज्ञान का सार ‘मैं और मेरा बाबा’”
05/04/1981
“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”
19/10/1981
“हर ब्राह्मण चैतन्य तारा मण्डल का श्रृंगार”
19/03/1982
“कर्म - आत्मा का दर्शन कराने का दर्पण”
08/04/1982
“लौकिक, अलौकिक सम्बन्ध का त्याग”
11/04/1982
“व्यर्थ का त्याग कर समर्थ बनो”
13/04/1982
“त्यागी, महात्यागी की व्याख्या”
28/04/1982
“सर्वन्श त्यागी की निशानियाँ”
09/01/1983
“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”
21/02/1983
“शान्ति की शक्ति”
09/05/1983
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”
01/06/1983
“नये ज्ञान और ज्ञान दाता को अथॉरिटी से प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”
05/03/1984
“शान्ति की शक्ति का महत्व”
24/04/1984
“वर्तमान ब्राह्मण जन्म - हीरे तुल्य”
10/12/1984
“पुराने खाते की समाप्ति की निशानी”
24/03/1985
“अब नहीं तो कब नहीं”
01/01/1986
“नया वर्ष रूहानी प्रभावशाली बनने का वर्ष”
23/01/1987
“सफलता के सितारे की विशेषतायें”
17/10/1987
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - ‘पवित्रता’”
02/11/1987
“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”
22/11/1987
“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”
14/01/1988
“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”
22/01/1988
“हिम्मत का पहला कदम - समर्पणता”
07/03/1988
“भाग्यवान बच्चों के श्रेष्ठ भाग्य की लिस्ट”
31/03/1988
‘वाचा’ और ‘कर्मणा’ - दोनों शक्तियों को जमा करने की ईश्वरीय स्कीम
11/11/1989
“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”
17/12/1989
“सदा समर्थ कैसे बनें?”
25/12/1989
“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”
31/12/1989
“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”
10/01/1990
“होलीहँस की विशेषतायें”
20/01/1990
“ब्रह्मा बाप के विशेष पाँच कदम”
01/03/1990
“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”
07/03/1990
“रूलिंग तथा कन्ट्रोलिंग पॉवर से स्वराज्य की प्राप्ति”
25/03/1990
“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”
31/03/1990
“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”
31/12/1990
“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”
25/02/1991
“सोच और कर्म में समानता लाना ही परमात्म प्यार निभाना है”
26/10/1991
“तपस्या का प्रत्यक्ष-फल - खुशी”
31/12/1991
“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”
02/03/1992
“महाशिवरात्रि मनाना अर्थात प्रतिज्ञा करना, व्रत लेना और बलि चढ़ना”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
12/11/1992
“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”
30/11/1992
“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”
20/12/1992
“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”
18/01/1993
“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
26/03/1993
“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”
10/01/1994
“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”
07/03/1995
“ब्राह्मण अर्थात् धर्म सत्ता और स्वराज्य सत्ता की अधिकारी आत्मा”
04/12/1995
“यथार्थ निश्चय के फाउण्डेशन द्वारा सम्पूर्ण पवित्रता को धारण करो”
13/03/1998
“होली शब्द के अर्थ स्वरूप में स्थित होना अर्थात् बाप समान बनना”
04/02/2001
“समय प्रमाण स्वराज्य अधिकारी बन सर्व रूहानी साधन तीव्रगति से कार्य में लगाओ”
15/12/2001
“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”
25/10/2002
“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''
14/11/2002
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”
15/12/2002
“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”
13/02/2003
“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''
17/10/2003
“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''
15/12/2003
“प्रत्यक्षता के लिए साधारणता को अलौकिकता में परिवर्तन कर दर्शनीय मूर्त बनो''
04/09/2005
“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”
21/10/2005
“सम्पूर्ण और सम्पन्न बनने की डेट फिक्स कर समय प्रमाण अब एवररेडी बनो”
31/12/2005
“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''
02/02/2007
“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”
02/02/2008
“सम्पूर्ण पवित्रता द्वारा रूहानी रॉयल्टी और पर्सनालिटी का अनुभव करते, अपने मास्टर ज्ञान सूर्य स्वरूप को इमर्ज करो”