
Prabhu Aap Ki Udarta Ka
Kavita Krishnamurthy
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Lyrics
प्रभु आप की उदारता का पार है नहीं
कहीं पार है नहीं
वो कौन जिससे प्रभु तुम्हे प्यार है नहीं
तुम्हे प्यार है नहीं
प्रभु आप की उदारता का पार है नहीं
कहीं पार है नहीं
भूलो पे भूल करके नहीं खुद कबूल करते
तुम हो क्षमा के सागर चितपे न अपने धरते
चितपे न अपने धरते
करुणामयी नजरमें कम दुलार है नहीं
दुलार है नहीं
प्रभु आप की उदारता का पार है नहीं
कहीं पार है नहीं
ये चन्द्र सूर्य सारे धरती गगन सितारे
ये लुत्फ ये नजारे जलवे है सब तुम्हारे
जलवे है सब तुम्हारे
कैसे कहूं की होता है दीदार क्यों नहीं
दीदार क्यों नहीं
प्रभु आप की उदारता का पार है नहीं
कहीं पार है नहीं
रहते हो तुम कहीं पर रहती नजर है हमपर
वरदानी हाथ तुम्हारे रहते हमारे सिरपर
रहते हमारे सिरपर
सदा साथ को करे न क्यों साकार है नहीं
साकार है नहीं
प्रभु आप की उदारता का पार है नहीं
कहीं पार है नहीं
वो कौन जिससे प्रभु तुम्हे प्यार है नही
तुम्हे प्यार है नही
प्रभु आप की उदारता का पार है नहीं
कहीं पार है नहीं
कहीं पार है नहीं
कहीं पार है नहीं
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