साकार वतन और _Corporeal World Avyakt World
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18/01/1969“पिताश्री जी के अव्यक्त होने के बाद - अव्यक्त वतन से प्राप्त दिव्य सन्देश”26/06/1969“शिक्षा देने का स्वरूप - अपने स्वरूप से शिक्षा देना”18/09/1969“त्रिनेत्री, त्रिकालदर्शी और त्रिलोकीनाथ बनने की युक्तियां”20/10/1969“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”22/01/1970“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”24/01/1970“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”26/01/1970“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”19/06/1970“त्रिमूर्ति लाइट्स का साक्षात्कार”25/06/1970“व्यक्त और अव्यक्त वतन की भाषा में अन्तर”28/07/1972“अपवित्रता और वियोग को संघार करने वाली शक्तियाँ ही असुर संघारनी हैं”04/12/1972“महावीर आत्माओं की रूहानी ड्रिल”25/01/1974“निराकार स्वरूप की स्मृति में रहने तथा आनन्द रस लेने की सहज विधि”05/12/1974“व्यर्थ संकल्पों को समर्थ बनाने से काल पर विजय”09/01/1975“सम्पूर्ण बनने में सबसे बड़ा विघ्न अलबेलापन”29/01/1975“परखने की शक्ति के प्रयोग से सफलता”27/01/1976“तीन श्रेष्ठ ईश्वरीय वरदान”31/05/1977“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”14/02/1978“समीप आत्मा की निशानियाँ”20/02/1988“तन, मन की थकावट मिटाने का साधन - ‘शक्तिशाली याद’”
