Ego/Body Consciousness/Insult-अहंकार/देह अभिमान/अपमान

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27/07/1971“बुद्धि रूपी नेत्र क्लीयर और पावरफुल बनाओ”29/08/1971“सबसे सूक्ष्म बन्धन - बुद्धि का अभिमान”27/02/1972“होलीहंस बनने का यादगार - होली”15/03/1972“त्याग और भाग्य”10/06/1972“सूक्ष्म अभिमान और अनजानपन”14/06/1972“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”09/04/1973“उन्नति के पथ पर अग्रसर होने की युक्तियां”23/01/1975“स्वमान की सीट पर सेट होकर कर्म करने वाला ही महान”22/09/1975“स्वमान में स्थित होना ही सर्व खजानें और खुशी की चाबी है”23/01/1977“महीनता ही महानता है”05/06/1977“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”07/06/1977“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”23/01/1979“सदा सुहागिन ही सदा सम्पन्न है”03/02/1979“सर्व पर रहम करो, ‘वहम' और ‘अहम' भाव को मिटाओ”12/11/1979“अमृतवेले के वरदानी समय में पुकार सुनो और उपकार करो”19/10/1981“हर ब्राह्मण चैतन्य तारा मण्डल का श्रृंगार”20/01/1982“प्रीत की रीत निभाने का सहज तरीका - गाना और नाचना”22/01/1982“बधाई और विदाई दो”01/04/1982“भाग्य का आधार त्याग”23/01/1987“सफलता के सितारे की विशेषतायें”31/12/1989“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”03/04/1991“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”02/03/1992“महाशिवरात्रि मनाना अर्थात प्रतिज्ञा करना, व्रत लेना और बलि चढ़ना”26/03/1993“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”18/01/1994“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”18/02/1994“स्वमान की स्मृति का स्विच ऑन करने से देह भान के अंधकार की समाप्ति”23/12/1994“अपने तीन स्वरूप सदा स्मृति में रहें - 1- संगमयुगी ब्राह्मण, 2- ब्राह्मण सो फ़रिश्ता और 3- फ़रिश्ता सो देवता”07/03/1995“ब्राह्मण अर्थात् धर्म सत्ता और स्वराज्य सत्ता की अधिकारी आत्मा”16/03/1995“सर्व प्राप्ति सम्पन्न आत्मा की निशानी - सन्तुष्टता और प्रसन्नता”04/12/1995“यथार्थ निश्चय के फाउण्डेशन द्वारा सम्पूर्ण पवित्रता को धारण करो”03/04/1996“सेवाओं के साथ-साथ बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा पुराने वा व्यर्थ संस्कारों से मुक्त बनो”03/04/1997“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”12/12/1998“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”03/02/2002“लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ, सर्व खजानों में सम्पन्न बनो''11/03/2002“विशेषतायें परमात्म देन हैं - इन्हें विश्व सेवा में अर्पण करो''08/10/2002“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''30/11/2002“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''15/12/2002“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”28/02/2003“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''30/11/2003“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''15/12/2003“प्रत्यक्षता के लिए साधारणता को अलौकिकता में परिवर्तन कर दर्शनीय मूर्त बनो''21/10/2005“सम्पूर्ण और सम्पन्न बनने की डेट फिक्स कर समय प्रमाण अब एवररेडी बनो”03/02/2006“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''14/03/2006“परमात्म मिलन की अनुभूति के लिए उल्टे मैं पन को जलाने की होली मनाओ, दृष्टि की पिचकारी द्वारा सर्व आत्माओं को सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द का रंग लगाओ''16/11/2006“अपने स्वमान की शान में रहो और समय के महत्व को जान एवररेडी बनो”

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