आधारमूर्त उद्धारमूर्त - Embodiment of foundation
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06/07/1969“सच्ची जेवर बनने के लिए अपनी सब खामियों को निकाल स्वच्छ बनो”14/05/1970“समर्पण का गुह्य अर्थ”30/07/1970“महारथी अर्थात् महानता”06/08/1970“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”21/01/1971“अब नहीं तो कब नहीं”26/01/1971“ज़िम्मेवारी उठाने से फायदे”06/05/1971“बापदादा का विशेष श्रृंगार - ‘नूरे-रत्न'”30/05/1973“संगमयुग - पुरुषोत्तम युग”02/08/1973“यथार्थ विधि से सिद्धि की प्राप्ति”26/06/1974“सर्व सिद्धियों की प्राप्ति के रूहानी नशे में सदा स्थित रहो”16/01/1975“ज्वाला रूप अवस्था”08/02/1975“निश्चय रूपी आसन पर अचल स्थिति”23/10/1975“इन्तज़ार को छोड़कर इन्तज़ाम करो!”07/06/1977“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”12/06/1977“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”22/06/1977“सितारों की दुनिया का रहस्य”04/01/1979“सम्पूर्णता के आईने में निज स्वरूप को देखो”10/12/1979“पुण्य आत्माओं के लक्षण”24/12/1979“जहान को रोशन करने वालों की महफिल”28/11/1981“आप पूर्वजों से सर्व आत्माओं की आशाएं”12/01/1982“विश्व का उद्धार - आधारमूर्त आत्माओं पर निर्भर”28/04/1982“सर्वन्श त्यागी की निशानियाँ”13/03/1986“सहज परिवर्तन का आधार - अनुभव की अथॉरिटी”21/01/1987“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”12/03/1988“तीन प्रकार का स्नेह तथा दिल के स्नेही बच्चों की विशेषतायें”19/11/1989“तन, मन, धन और जन का भाग्य”17/12/1989“सदा समर्थ कैसे बनें?”23/12/1993“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”02/02/2004“पूर्वज और पूज्य के स्वमान में रह विश्व की हर आत्मा की पालना करो, दुआयें दो, दुआयें लो''
