पूज्य आत्मा - Worship worthy soul

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24/06/1974“राजयोगी ही विश्व-राज्य के अधिकारी”23/04/1977“बाप द्वारा प्राप्त सर्व खज़ानों को बढ़ाने का आधार है - महादानी बनना”16/06/1977“एक ही पढ़ाई द्वारा नम्बरवार पूज्य पद पाने का गुह्य रहस्य”07/12/1978“बाप समान सम्पूर्ण बनने के चिन्ह”12/12/1978“परोपकारी कैसे बनें?”30/11/1979“स्वमान में स्थित आत्मा के लक्षण”03/01/1983“हर गुण, हर शक्ति को निजी स्वरूप बनाओ बाप समान बनो”13/04/1983“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”30/04/1983“परम पूज्य बनने का आधार”09/05/1983“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”19/05/1983“साक्षी दृष्टा कैसे बनें?”25/12/1983“संगमयुग के दिन बड़े ते बड़े मौज मनाने के दिन”21/11/1984“स्व-दर्शन धारी ही दिव्य दर्शनीय मूर्त”17/10/1987“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - ‘पवित्रता’”10/11/1987“शुभचिन्तक-मणि बन विश्व को चिन्ताओं से मुक्त करो”10/01/1994“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”15/12/1999“संकल्प शक्ति के महत्व को जान इसे बढ़ाओ और प्रयोग में लाओ”15/12/2004“बापदादा की विशेष आशा - हर एक बच्चा दुआयें दे और दुआयें ले''31/10/2007“अपने श्रेष्ठ स्वमान के फ़खुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो”15/12/2007“समय के महत्व को जान, कर्मों की गुह्य गति का अटेन्शन रखो, नष्टोमोहा, एवररेडी बनो”02/02/2008“सम्पूर्ण पवित्रता द्वारा रूहानी रॉयल्टी और पर्सनालिटी का अनुभव करते, अपने मास्टर ज्ञान सूर्य स्वरूप को इमर्ज करो”

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