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8 June 1973 · हिंदी
सर्वशक्तियों में से विशेष शक्ति को जानते हो? अपने को मास्टर सर्वशक्तिमान तो समझते हो ना? सर्वशक्तियों में से सर्वश्रेष्ठ शक्ति कौन-सी है। जैसे पढ़ाई में अनेक सब्जेक्ट्स होते हैं लेकिन उनमें से एक विशेष होता है। वैसे ही सर्व-शक्तियाँ आवश्यक तो हैं लेकिन इन शक्तियों में से सभी से श्रेष्ठ शक्ति कौन-सी है? जो आवश्यक हैं, जिसके बग़ैर महारथी व महावीर बनना मुश्किल है। हैं तो सभी आवश्यक। एक का दूसरे से सम्बन्ध है लेकिन फिर भी नम्बर वन जो सर्वशक्तियों को नजदीक लाने वाली है वह कौन-सी है? (परखने की शक्ति)
सेल्फ रियलाइजेशन करना भी परखने की शक्ति है। सेल्फ रियलाइजेशन का अर्थ ही है अपने आपको परखना व जानना। पहले बाप को परखेंगे तब जानेंगे या पहचान सकेंगे। और जब पहचानेंगे तब बाप के समीप व समान बन सकेंगे। परखने की शक्ति है नम्बर वन। परखना जिसको कॉमन शब्दों में पहचान कहते हैं। पहले-पहले ज्ञान का आधार ही है बाप को पहचानना अर्थात् परखना कि यह बात का कर्तव्य चल रहा है। पहले परखने की शक्ति आवश्यक है। परखने की शक्ति को नॉलेजफुल की स्टेज कहते हैं।
परखने की शक्ति का विस्तार क्या है और उससे प्राप्ति क्या-क्या होती है? इस विषय पर आपस में रूह-रुहान कर सकते हो। आपस में हम सरीखे खेलने वाले होते हैं तो खेल में भी मजा आता है। खेल-खेल में मेल भी हो जाता है। इस खेल में भी आपस में खेलते-खेलते दोस्त बन जाते हैं। वह हुआ स्थूल खेल। यहाँ भी खेल-खेल में आत्माओं की समीपता का मेल होता है। आत्माओं के संस्कार स्वभाव का मेल होता है। खेल के साथी बहुत पक्के होते हैं, जीवन के अन्त तक अपना साथ निभाते हैं। रूहानी खेल के साथ अन्त तक आपस में मेल निभाते हो, तब तो इस मेल की निशानी ‘माला' बनी हुई है। सभी बातों में जब अन्त में एक दूसरे के समीप हो जाते, मेल हो जाता तब दाना दाने से मिल माला बनती है। यह मेल की निशानी (माला) है। अच्छा!