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90 murlis in हिंदी

02/02/1969“अव्यक्त मिलन के अनुभव की विधि”04/03/1969“जो बीता उसे हो ली करना ही होली मनाना है”17/05/1969“जादू मंत्र का दर्पण”24/01/1970“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”24/05/1971“पोज़ीशन में ठहरने से अपोज़ीशन समाप्त”22/06/1971“तीव्र पुरुषार्थी की निशानियाँ”04/07/1971“याद की सहज विधि”28/07/1971“आकार में निराकार को देखने का अभ्यास”03/10/1971“निर्मानता के गुण से विश्व निर्माता”24/10/1971“नज़र से निहाल करने की विधि”27/02/1972“होलीहंस बनने का यादगार - होली”21/06/1972“विश्व-महाराजन बनने वालों की विश्व-कल्याणकारी स्टेज”08/06/1973“सर्वश्रेष्ठ शक्ति - परखने की शक्ति”21/07/1973“रूहानी जज़ और जिस्मानी जज़”02/05/1974“अब बाप समान सर्व गुण सम्पन्न बनो”20/05/1974“बापदादा के दिल रूपी तख्त पर विराजमान बच्चे ही खुशनसीब हैं”23/05/1974“हद की आकर्षणों या विभूतियों से परे रहने वाला ही सच्चा वैष्णव”22/01/1976“वर्तमान लास्ट समय का फास्ट पुरुषार्थ”16/05/1977“माया के वार का सामना करने के लिए दो शक्तियों की आवश्यकता”19/05/1977“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”02/01/1978“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”13/01/1978“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”18/01/1978“बापदादा की सेवा का रिटर्न”27/11/1978“अल्पकाल के नाम और मान से न्यारे ही सर्व के प्यारे बन सकते हैं”03/12/1978“पाप और पुण्य की गुह्य गति”05/12/1978“मरजीवा जन्म का निजी संस्कार - पहली स्मृति और पहला बोल”16/01/1979“तिलक, ताज और तख्तधारी बनने की युक्तियाँ”26/11/1979“प्रीत की रीति”28/01/1980“सम्पूर्ण ब्रह्मा और ब्राह्मणों के सम्पूर्ण स्वरूप के अन्तर का कारण और निवारण”09/03/1981“मेहनत समाप्त कर निरन्तर योगी बनो”18/03/1981“मुश्किल को सहज करने की युक्ति ‘सदा बाप को देखो’”27/03/1981“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”05/04/1981“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”13/11/1981“परखने और निर्णय शक्ति का आधार - साइलेन्स की शक्ति”21/11/1981“छोड़ो तो छूटो”29/12/1981“दूरदेशी बच्चों से दूर देशी बापदादा का मिलन”08/01/1982“लण्डन ग्रुप के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”29/03/1982“सच्चे वैष्णव अर्थात् सदा गुण ग्राहक”25/12/1982“विधि, विधान और वरदान”15/01/1983“सहजयोगी और प्रयोगी की व्याख्या”27/04/1983“दृष्टि-वृत्ति परिवर्तन करने की युक्तियाँ”19/05/1983“साक्षी दृष्टा कैसे बनें?”14/01/1984“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”02/04/1984“बिन्दु का महत्व”26/11/1984“सच्चे सहयोगी ही सच्चे योगी”26/12/1984“सत्यता की शक्ति”02/03/1985“वर्तमान ईश्वरीय जन्म - अमूल्य जन्म”22/03/1986“सुख, शान्ति और खुशी का आधार - पवित्रता”23/01/1987“सफलता के सितारे की विशेषतायें”21/10/1987“दीपराज और दीपरानियों की कहानी”25/10/1987“चार बातों से न्यारे बनो”18/01/1988“‘स्नेह’ और ‘शक्ति’ की समानता”16/02/1988“सदा उत्साह में रहकर उत्सव मनाओ”20/02/1988“तन, मन की थकावट मिटाने का साधन - ‘शक्तिशाली याद’”15/03/1988“नई दुनिया की तस्वीर का आधार वर्तमान श्रेष्ठ ब्राह्मण जीवन”22/02/1990“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”19/03/1990“उड़ती कला का आधार उमंग-उत्साह के पंख”04/12/1991“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”31/12/1991“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”18/01/1992“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”02/03/1992“महाशिवरात्रि मनाना अर्थात प्रतिज्ञा करना, व्रत लेना और बलि चढ़ना”16/03/1992“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”15/04/1992“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”24/09/1992“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”30/11/1992“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”18/01/1993“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”25/11/1993“सहज सिद्धि प्राप्त करने के लिए ज्ञान स्वरूप प्रयोगी आत्मा बनो”09/12/1993“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”23/12/1993“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”16/11/1995“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”22/12/1995“सर्व प्राप्ति सम्पन्न जीवन की विशेषता है - अप्रसन्नता मुक्त और प्रसन्नता युक्त”18/01/1996“सदा समर्थ रहने की सहज विधि - शुभचिंतन करो और शुभचिंतक बनो”10/03/1996“‘करनहार’ और ‘करावनहार’ की स्मृति से कर्मातीत स्थिति का अनुभव”18/01/1997“अपनी सूरत से बाप की सीरत को प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”03/04/1997“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”31/01/1998“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”13/03/1998“होली शब्द के अर्थ स्वरूप में स्थित होना अर्थात् बाप समान बनना”12/12/1998“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”13/02/1999“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”25/11/2000“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”31/12/2000“बचत का खाता जमा कर अखण्ड महादानी बनो”20/02/2001“शिव जयन्ती, व्रत लेने और सर्व समर्पण होने का यादगार है''15/12/2001“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”17/03/2003“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''17/10/2003“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''31/12/2003“इस वर्ष निमित्त और निर्माण बन जमा के खाते को बढ़ाओ और अखण्ड महादानी बनो''03/02/2005“सेवा करते उपराम और बेहद वृत्ति द्वारा एवररेडी बन ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न बनो''18/01/2007“अब स्वयं को मुक्त कर मास्टर मुक्तिदाता बन सबको मुक्ति दिलाने के निमित्त बनो”18/01/2008“सच्चे स्नेही बन, सब बोझ बाप को देकर मौज का अनुभव करो, मेहनत मुक्त बनो”02/04/2008”इस वर्ष चारों ही सब्जेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बनो, लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”

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