संस्कार - Resolves /Personality Traits
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13/03/1969“प्रेम और शक्ति के गुणों की समानता”17/04/1969“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”18/06/1969“मरजीवा वह है जो पुराने शूद्रपन के संस्कारों को टच भी न करे”03/10/1969“सम्पूर्ण समर्पण की निशानियां”17/11/1969“फर्श से अर्श पर जाने की युक्तियाँ”06/12/1969“सरल स्वभाव से बुद्धि को विशाल और दूरांदेशी बनाओ”20/12/1969“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”25/12/1969“अनासक्त बनने के लिए तन और मन को अमानत समझो”22/01/1970“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”25/01/1970“यादगार कायम करने की विधि”23/03/1970“सच्ची होली मनाना अर्थात् बीती को बीती करना”26/03/1970“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”05/04/1970“सर्व प्वॉइन्ट का सार प्वाइंट (बिन्दी) बनो”21/05/1970“भिन्नता को मिटाने की युक्ति”07/06/1970“दिव्य मूर्त बनने की विधि”18/06/1970“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”29/06/1970“समर्पण का विशाल रूप”11/07/1970“संगमयुग की डिग्री और भविष्य की प्रालब्ध”29/10/1970“दीपमाला का सच्चा रहस्य”09/12/1970“पुरुषार्थ का मुख्य आधार कैचिंग पॉवर”01/03/1971“सिद्धि स्वरूप बनने की सहज विधि”29/04/1971“बेहद के पेपर में पास होने का साधन”10/06/1971“सेवा की धरनी तैयार करने का साधन - सर्चलाइट”25/06/1971“सेवा और तपस्या की समानता”11/07/1971“विश्व-कल्याणकारी बनने के लिए मुख्य धारणाएं”18/07/1971“विल पावर और कन्ट्रोलिंग पावर”27/07/1971“बुद्धि रूपी नेत्र क्लीयर और पावरफुल बनाओ”29/08/1971“सबसे सूक्ष्म बन्धन - बुद्धि का अभिमान”11/09/1971“डबल रिफाइन स्टेज”28/02/1972“समय का इन्तार न कर एवररेडी रहने वाला ही सच्चा पुरुषार्थी”04/03/1972“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”12/03/1972“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”15/03/1972“त्याग और भाग्य”02/04/1972“महिमा योग्य कैसे बनें?”15/05/1972“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”08/06/1972“सम्पूर्ण स्टेज की परख”14/06/1972“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”16/06/1972“हर्षित रहना ही ब्राह्मण जीवन का विशेष संस्कार”22/11/1972“अन्तिम सर्विस का अन्तिम स्वरूप”09/04/1973“उन्नति के पथ पर अग्रसर होने की युक्तियां”11/04/1973“परिवर्तन”04/05/1973“अधिकारी और अधीन”08/06/1973“सर्वश्रेष्ठ शक्ति - परखने की शक्ति”08/10/1975“मास्टर ज्ञान-स्वरूप बनने की प्रेरणा”12/10/1975“कम्पलेन्ट समाप्त कर कम्पलीट बनने की प्रेरणा”03/02/1976“धर्म और कर्म का कम्बाइन्ड रूप”06/02/1977“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”16/04/1977“ब्राह्मण जन्म की दिव्यता और अलौकिकता”09/05/1977“सम्पूर्ण पवित्रता ही विशेष पार्ट बजाने वालों का श्रृंगार है”12/06/1977“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”01/12/1978“सर्व खजानों की चाबी - एकनामी बनना”26/12/1978“इष्ट देव की विशेषतायें”02/01/1979“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”23/11/1979“नम्रता रूपी कवच द्वारा स्नेह और सहयोग की प्राप्ति”28/11/1979“प्रवृत्ति में रहते भी निवृत्ति में कैसे रहें?”15/12/1979“विदेशी बच्चों के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”24/12/1979“जहान को रोशन करने वालों की महफिल”04/01/1980“वर्तमान राज्य-अधिकारी ही भविष्य राज्य-अधिकारी”07/01/1980“संगमयुगी बादशाही और सतयुगी बादशाही”09/01/1980“अलौकिक ड्रेस और अलौकिक श्रृंगार”18/03/1981“मुश्किल को सहज करने की युक्ति ‘सदा बाप को देखो’”25/03/1981“महानता का आधार - संकल्प, बोल, कर्म की चेकिंग”05/04/1981“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”22/01/1982“बधाई और विदाई दो”26/04/1982“बापदादा के दिलतख्तनशीन बनने का सर्व को समान अधिकार”27/04/1983“दृष्टि-वृत्ति परिवर्तन करने की युक्तियाँ”03/03/1984“स्व अधिकारियों के स्व के राज्य का हालचाल”24/02/1985“संगमयुग - सर्व श्रेष्ठ प्राप्तियों का युग”18/02/1986“निरन्तर सेवाधारी तथा निरन्तर योगी बनो”16/03/1986“रुहानी ड्रिल”31/03/1986“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”07/04/1986“तपस्वी-मूर्त, त्याग मूर्त, विधाता ही विश्व-राज्य अधिकारी”18/01/1987“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”05/10/1987“ब्राह्मण जीवन का सुख - सन्तुष्टता व प्रसन्नता”14/11/1987“पूज्य देव आत्मा बनने का साधन - पवित्रता की शक्ति”27/11/1987“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”11/11/1989“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”19/11/1989“तन, मन, धन और जन का भाग्य”09/12/1989“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”31/12/1989“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”06/01/1990“होलीहँस की परिभाषा”13/03/1990“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”11/12/1991“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”12/11/1992“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”18/01/1993“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”18/11/1993“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”25/11/1993“सहज सिद्धि प्राप्त करने के लिए ज्ञान स्वरूप प्रयोगी आत्मा बनो”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”10/01/1994“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”26/11/1994“परमात्म पालना और परिवर्तन शक्ति का प्रत्यक्ष स्वरूप - सहजयोगी जीवन”09/01/1996“बालक सो मालिकपन के नशे में रहने के लिए मन का राजा बनो”31/12/1996“नये वर्ष में अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभवी बनाओ”23/02/1997“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”15/03/1999“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”30/03/2000“मन को दुरुस्त रखने के लिए बीच-बीच में 5 सेकेण्ड भी निकाल कर मन की एक्सरसाइज करो”14/11/2002“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”13/02/2003“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''17/10/2003“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''05/03/2004“कमजोर संस्कारों का संस्कार कर सच्ची होली मनाओ तब संसार परिवर्तन होगा''15/10/2004“एक को प्रत्यक्ष करने के लिए एकरस स्थिति बनाओ, स्वमान में रहो, सबको सम्मान दो''21/10/2005“सम्पूर्ण और सम्पन्न बनने की डेट फिक्स कर समय प्रमाण अब एवररेडी बनो”15/11/2005“सच्चे दिल से बाप व परिवार के स्नेही बन मेहनत मुक्त बनने का वायदा करो और फायदा लो''15/12/2005“नये वर्ष में स्नेह और सहयोग की रूपरेखा स्टेज पर लाओ, हर एक को गुण और शक्तियों की गिफ्ट दो”31/12/2005“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''18/01/2006“संकल्प, समय और बोल के बचत की स्कीम द्वारा सफलता की सेरीमनी मनाओ, निराश आत्माओं में आशा के दीप जगाओ''03/02/2006“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''31/10/2006“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''03/03/2007“परमात्म संग में, ज्ञान का गुलाल, गुण और शक्तियों का रंग लगाना ही सच्ची होली मनाना है”17/03/2007“श्रेष्ठ वृत्ति से शक्तिशाली वायब्रेशन और वायुमण्डल बनाने का तीव्र पुरुषार्थ करो, दुआ दो और दुआ लो”15/10/2007“संगमयुग की जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए सब बोझ वा बंधन बाप को देकर डबल लाइट बनो”31/10/2007“अपने श्रेष्ठ स्वमान के फ़खुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो”30/11/2007“सत्यता और पवित्रता की शक्ति को स्वरूप में लाते बालक और मालिकपन का बैलेन्स रखो”18/02/2008“विश्व परिवर्तन के लिए शान्ति की शक्ति का प्रयोग करो”
