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संस्कार - Resolves /Personality Traits - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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संस्कार - Resolves /Personality Traits
संस्कार - Resolves /Personality Traits
114 unique murli dates in this topic
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114 murlis in हिंदी
13/03/1969
“प्रेम और शक्ति के गुणों की समानता”
17/04/1969
“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”
18/06/1969
“मरजीवा वह है जो पुराने शूद्रपन के संस्कारों को टच भी न करे”
03/10/1969
“सम्पूर्ण समर्पण की निशानियां”
17/11/1969
“फर्श से अर्श पर जाने की युक्तियाँ”
06/12/1969
“सरल स्वभाव से बुद्धि को विशाल और दूरांदेशी बनाओ”
20/12/1969
“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”
25/12/1969
“अनासक्त बनने के लिए तन और मन को अमानत समझो”
22/01/1970
“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
23/03/1970
“सच्ची होली मनाना अर्थात् बीती को बीती करना”
26/03/1970
“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”
05/04/1970
“सर्व प्वॉइन्ट का सार प्वाइंट (बिन्दी) बनो”
21/05/1970
“भिन्नता को मिटाने की युक्ति”
07/06/1970
“दिव्य मूर्त बनने की विधि”
18/06/1970
“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”
29/06/1970
“समर्पण का विशाल रूप”
11/07/1970
“संगमयुग की डिग्री और भविष्य की प्रालब्ध”
29/10/1970
“दीपमाला का सच्चा रहस्य”
09/12/1970
“पुरुषार्थ का मुख्य आधार कैचिंग पॉवर”
01/03/1971
“सिद्धि स्वरूप बनने की सहज विधि”
29/04/1971
“बेहद के पेपर में पास होने का साधन”
10/06/1971
“सेवा की धरनी तैयार करने का साधन - सर्चलाइट”
25/06/1971
“सेवा और तपस्या की समानता”
11/07/1971
“विश्व-कल्याणकारी बनने के लिए मुख्य धारणाएं”
18/07/1971
“विल पावर और कन्ट्रोलिंग पावर”
27/07/1971
“बुद्धि रूपी नेत्र क्लीयर और पावरफुल बनाओ”
29/08/1971
“सबसे सूक्ष्म बन्धन - बुद्धि का अभिमान”
11/09/1971
“डबल रिफाइन स्टेज”
28/02/1972
“समय का इन्तार न कर एवररेडी रहने वाला ही सच्चा पुरुषार्थी”
04/03/1972
“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”
12/03/1972
“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”
15/03/1972
“त्याग और भाग्य”
02/04/1972
“महिमा योग्य कैसे बनें?”
15/05/1972
“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”
08/06/1972
“सम्पूर्ण स्टेज की परख”
14/06/1972
“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”
16/06/1972
“हर्षित रहना ही ब्राह्मण जीवन का विशेष संस्कार”
22/11/1972
“अन्तिम सर्विस का अन्तिम स्वरूप”
09/04/1973
“उन्नति के पथ पर अग्रसर होने की युक्तियां”
11/04/1973
“परिवर्तन”
04/05/1973
“अधिकारी और अधीन”
08/06/1973
“सर्वश्रेष्ठ शक्ति - परखने की शक्ति”
08/10/1975
“मास्टर ज्ञान-स्वरूप बनने की प्रेरणा”
12/10/1975
“कम्पलेन्ट समाप्त कर कम्पलीट बनने की प्रेरणा”
03/02/1976
“धर्म और कर्म का कम्बाइन्ड रूप”
06/02/1977
“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”
16/04/1977
“ब्राह्मण जन्म की दिव्यता और अलौकिकता”
09/05/1977
“सम्पूर्ण पवित्रता ही विशेष पार्ट बजाने वालों का श्रृंगार है”
12/06/1977
“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”
01/12/1978
“सर्व खजानों की चाबी - एकनामी बनना”
26/12/1978
“इष्ट देव की विशेषतायें”
02/01/1979
“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”
23/11/1979
“नम्रता रूपी कवच द्वारा स्नेह और सहयोग की प्राप्ति”
28/11/1979
“प्रवृत्ति में रहते भी निवृत्ति में कैसे रहें?”
15/12/1979
“विदेशी बच्चों के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”
24/12/1979
“जहान को रोशन करने वालों की महफिल”
04/01/1980
“वर्तमान राज्य-अधिकारी ही भविष्य राज्य-अधिकारी”
07/01/1980
“संगमयुगी बादशाही और सतयुगी बादशाही”
09/01/1980
“अलौकिक ड्रेस और अलौकिक श्रृंगार”
18/03/1981
“मुश्किल को सहज करने की युक्ति ‘सदा बाप को देखो’”
25/03/1981
“महानता का आधार - संकल्प, बोल, कर्म की चेकिंग”
05/04/1981
“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”
22/01/1982
“बधाई और विदाई दो”
26/04/1982
“बापदादा के दिलतख्तनशीन बनने का सर्व को समान अधिकार”
27/04/1983
“दृष्टि-वृत्ति परिवर्तन करने की युक्तियाँ”
03/03/1984
“स्व अधिकारियों के स्व के राज्य का हालचाल”
24/02/1985
“संगमयुग - सर्व श्रेष्ठ प्राप्तियों का युग”
18/02/1986
“निरन्तर सेवाधारी तथा निरन्तर योगी बनो”
16/03/1986
“रुहानी ड्रिल”
31/03/1986
“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”
07/04/1986
“तपस्वी-मूर्त, त्याग मूर्त, विधाता ही विश्व-राज्य अधिकारी”
18/01/1987
“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”
05/10/1987
“ब्राह्मण जीवन का सुख - सन्तुष्टता व प्रसन्नता”
14/11/1987
“पूज्य देव आत्मा बनने का साधन - पवित्रता की शक्ति”
27/11/1987
“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”
11/11/1989
“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”
19/11/1989
“तन, मन, धन और जन का भाग्य”
09/12/1989
“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”
31/12/1989
“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”
06/01/1990
“होलीहँस की परिभाषा”
13/03/1990
“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”
11/12/1991
“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
12/11/1992
“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”
18/01/1993
“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”
18/11/1993
“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”
25/11/1993
“सहज सिद्धि प्राप्त करने के लिए ज्ञान स्वरूप प्रयोगी आत्मा बनो”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
10/01/1994
“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”
26/11/1994
“परमात्म पालना और परिवर्तन शक्ति का प्रत्यक्ष स्वरूप - सहजयोगी जीवन”
09/01/1996
“बालक सो मालिकपन के नशे में रहने के लिए मन का राजा बनो”
31/12/1996
“नये वर्ष में अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभवी बनाओ”
23/02/1997
“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”
15/03/1999
“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”
30/03/2000
“मन को दुरुस्त रखने के लिए बीच-बीच में 5 सेकेण्ड भी निकाल कर मन की एक्सरसाइज करो”
14/11/2002
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”
13/02/2003
“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''
17/10/2003
“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''
05/03/2004
“कमजोर संस्कारों का संस्कार कर सच्ची होली मनाओ तब संसार परिवर्तन होगा''
15/10/2004
“एक को प्रत्यक्ष करने के लिए एकरस स्थिति बनाओ, स्वमान में रहो, सबको सम्मान दो''
21/10/2005
“सम्पूर्ण और सम्पन्न बनने की डेट फिक्स कर समय प्रमाण अब एवररेडी बनो”
15/11/2005
“सच्चे दिल से बाप व परिवार के स्नेही बन मेहनत मुक्त बनने का वायदा करो और फायदा लो''
15/12/2005
“नये वर्ष में स्नेह और सहयोग की रूपरेखा स्टेज पर लाओ, हर एक को गुण और शक्तियों की गिफ्ट दो”
31/12/2005
“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''
18/01/2006
“संकल्प, समय और बोल के बचत की स्कीम द्वारा सफलता की सेरीमनी मनाओ, निराश आत्माओं में आशा के दीप जगाओ''
03/02/2006
“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''
31/10/2006
“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''
03/03/2007
“परमात्म संग में, ज्ञान का गुलाल, गुण और शक्तियों का रंग लगाना ही सच्ची होली मनाना है”
17/03/2007
“श्रेष्ठ वृत्ति से शक्तिशाली वायब्रेशन और वायुमण्डल बनाने का तीव्र पुरुषार्थ करो, दुआ दो और दुआ लो”
15/10/2007
“संगमयुग की जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए सब बोझ वा बंधन बाप को देकर डबल लाइट बनो”
31/10/2007
“अपने श्रेष्ठ स्वमान के फ़खुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो”
30/11/2007
“सत्यता और पवित्रता की शक्ति को स्वरूप में लाते बालक और मालिकपन का बैलेन्स रखो”
18/02/2008
“विश्व परिवर्तन के लिए शान्ति की शक्ति का प्रयोग करो”
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