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सम्पूर्ण आत्मा - Complete soul - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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सम्पूर्ण आत्मा - Complete soul
सम्पूर्ण आत्मा - Complete soul
46 unique murli dates in this topic
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46 murlis in हिंदी
20/10/1969
“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”
26/03/1970
“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”
02/04/1970
“सम्पूर्ण स्टेज की निशानियां”
05/04/1970
“सर्व प्वॉइन्ट का सार प्वाइंट (बिन्दी) बनो”
07/06/1970
“दिव्य मूर्त बनने की विधि”
27/07/1970
“अव्यक्त बनने के लिए मुख्य शक्तियों की धारणा”
30/07/1970
“महारथी अर्थात् महानता”
05/11/1970
“डिले इज़ डेन्जर”
30/11/1970
“वर्कर्स की वन्डरफुल सर्कस”
03/12/1970
“सामना करने के लिए कामनाओं का त्याग”
21/01/1971
“अब नहीं तो कब नहीं”
01/03/1971
“सिद्धि स्वरूप बनने की सहज विधि”
13/03/1971
“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानियाँ”
11/09/1971
“डबल रिफाइन स्टेज”
03/10/1971
“निर्मानता के गुण से विश्व निर्माता”
05/10/1971
“सम्पूर्णता की निशानी 16 कलायें”
09/10/1971
“पॉवरफुल वृत्ति से सर्विस में वृद्धि”
28/02/1972
“समय का इन्तार न कर एवररेडी रहने वाला ही सच्चा पुरुषार्थी”
08/06/1972
“सम्पूर्ण स्टेज की परख”
13/04/1973
“भक्त और भावना का फल”
24/04/1973
“अलौकिक जन्म-पत्री”
17/05/1973
“जैसा लक्ष्य वैसा लक्षण”
08/06/1973
“सर्वश्रेष्ठ शक्ति - परखने की शक्ति”
21/07/1973
“रूहानी जज़ और जिस्मानी जज़”
04/07/1974
“स्व-स्थिति की श्रेष्ठता से व्यर्थ संकल्पों की हलचल समाप्त”
07/02/1975
“सन्तुष्टता ही सम्पूर्णता की निशानी है”
09/09/1975
“ग्लानि को गायन समझकर रहमदिल बनो”
10/12/1978
“विस्तार को न देख सार अर्थात् बिन्दु को देखो”
12/12/1978
“परोपकारी कैसे बनें?”
24/12/1979
“जहान को रोशन करने वालों की महफिल”
20/01/1981
“मन, बुद्धि, संस्कार के अधिकारी ही वरदानी मूर्त”
04/10/1981
“संकल्प शक्ति का महत्व”
18/11/1981
“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”
24/03/1982
“ब्राह्मण जीवन की विशेषता है - पवित्रता”
13/06/1982
“एक का मन्त्र याद रहे तो सबमें एक दिखाई देगा (टीचर्स के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात)”
22/02/1984
“संगम पर चार कम्बाइन्ड रूपों का अनुभव”
20/01/1986
“पुरुषार्थ और परिवर्तन के गोल्डन चांस का वर्ष”
22/01/1986
“बापदादा की आशा - सम्पूर्ण और सम्पन्न बनो”
20/02/1986
“उड़ती कला से सर्व का भला”
01/03/1986
“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”
11/04/1986
“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर बनाने की युक्ति”
18/11/1987
“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”
11/11/1989
“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”
13/02/1991
“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”
03/04/1991
“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
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