असम के गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र के पावन तट स्थित भरलुमुख में “आध्यात्मिक ज्ञान द्वारा भारतीय संस्कृति का पुनरुत्थान” विषय पर दो दिवसीय संत महासम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। गुवाहाटी सेवा केंद्र एवं ब्रह्माकुमारीज़ संस्था के धार्मिक प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में उत्तर-पूर्व भारत में पहली बार देशभर के संतों, महामंडलेश्वरों, जगतगुरुओं एवं आध्यात्मिक विभूतियों का विशाल आध्यात्मिक संगम देखने को मिला।
समारोह के मुख्य अतिथि असम के राज्यपाल महामहिम लक्ष्मण प्रसाद आचार्य जी ने
ब्रह्माकुमारीज़ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “आध्यात्मिक ज्ञान सशक्त एवं शांतिपूर्ण भारत की नींव है।” उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जीवन मनुष्य को दिशा देता है, समाज को जोड़ता है तथा भीतर करुणा और सेवा की भावना जागृत करता है। उन्होंने राजयोग ध्यान, आत्मचिंतन, सकारात्मक सोच, नैतिक जीवन और आत्मानुशासन के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए ब्रह्माकुमारीज के योगदान को सराहनीय बताया।
अयोध्या धाम से पधारे परम पूज्य जगतगुरु रामानंदाचार्य श्री राम दिनेश आचार्य महाराज जी ने कहा कि
भारत साधना की भूमि है और ज्ञान, प्रज्ञा एवं साधना के माध्यम से ही विश्वगुरु बनेगा। उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति युद्ध या विनाश में नहीं, बल्कि विश्व को शांति का संदेश देने में है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि ज्ञान जहां से भी मिले, उसे ग्रहण करना चाहिए, क्योंकि भारत विवाद नहीं, बल्कि संवाद की संस्कृति के लिए जाना जाता है।
धार्मिक प्रभाग की अध्यक्षा बी.के. मनोरमा दीदी ने अपने भाव रखे। वहीं श्री श्री बेगनाटी सत्र, माजुली के सत्राधिकार श्री श्री भवानंद देव गोस्वामी जी ने सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा में ब्रह्माकुमारीज़ के प्रयासों की सराहना की।
मुख्यालय से पधारीं गीता ज्ञान विदुषी बी.के. उषा दीदी ने भारतीय संस्कृति एवं पारंपरिक कुलगुरु व्यवस्था के महत्व पर प्रकाश डाला। धार्मिक प्रभाग के मुख्यालय समन्वयक बी.के. रामनाथ भाई सहित अनेक संत-महात्माओं ने भी विषय पर अपने विचार साझा किए। सम्मानित अतिथियों में श्री श्री 108 श्री महंत महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी महेश योगी जी, आचार्य महामंडलेश्वर संत कमल किशोर जी महाराज, महामंडलेश्वर आशुतोष महाराज, महंत बलराम दास महाराज तथा महामंडलेश्वर गिरीश दास जी महाराज सहित अनेक आध्यात्मिक विभूतियां उपस्थित रहीं।
वक्ताओं ने भारतीय संस्कृति को केवल परंपराओं तक सीमित न रखते हुए उसे संस्कारों, साधना, नैतिक मूल्यों और आत्मिक जागृति के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति की पहचान उसके संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों में है तथा स्वयं की ज्योति जगाकर ही समाज और विश्व को प्रकाशमान किया जा सकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ गुवाहाटी सबजोन प्रभारी बी.के. सोनाली दीदी के स्वागत संबोधन से हुआ। मंगलदोई यूथ क्लब की भानु देवी सहारिया एवं समूह द्वारा क्षत्रिय नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई।
इस संत महासम्मेलन में गुवाहाटी के हजारों नागरिकों, अनुयायियों एवं आध्यात्मिक जिज्ञासुओं ने सहभागिता की और शांति, पवित्रता, भाईचारे तथा नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
यह आयोजन भारतीय संस्कृति के आध्यात्मिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने, संत परंपरा और समाज के बीच संवाद को मजबूत करने तथा शांतिपूर्ण एवं संस्कारवान भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।




















