
Apane Karma Hi Manav Ko
Hemanti Shukl
Lyrics
अपने कर्म ही मानव को
ताज तख्त दिलाए
बिना किए ना कोई फल मिलता
किया व्यर्थ ना जाए
जो पुरुषार्थी कर्म से उच्च श्रेष्ठ बन जाता है
उच्च श्रेष्ठ बन जाता है
जो पुरुषार्थी कर्म से उच्च श्रेष्ठ बन जाता है
उच्च श्रेष्ठ बन जाता है
बिन मांगे उसे मोती मिलते
बिन मांगे उसे मोती मिलते
वो सदा मुस्कुराता है
उच्च श्रेष्ठ बन जाता है
उच्च श्रेष्ठ बन जाता है
दुवाएं बनकर जग की सेवा
हार गलेका बन जाए
तपस्या ताज बनकर
जगमे शान और मान बढ़ाए
त्याग सभी राज्य बनकर
सुख आनंद लुटाता है
उच्च श्रेष्ठ बन जाता है
उच्च श्रेष्ठ बन जाता है
गुणों का दान ही भाग्य बनकर
हर संपति ले आता है
कर्म ही राज्य तिलक बन
ये ललाट सजाता है
उसका तीव्र पुरुषार्थ ही
उसका तीव्र पुरुषार्थ ही
उच्च श्रेष्ठ बन जाता है
उच्च श्रेष्ठ बन जाता है
जो पुरुषार्थी कर्म से उच्च श्रेष्ठ बन जाता है
बिन मांगे उसे मोती मिलते
बिन मांगे उसे मोती मिलते
वो सदा मुस्कुराता है
उच्च श्रेष्ठ बन जाता है
उच्च श्रेष्ठ बन जाता है



