Distress/Perplexity-परेशानी

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06/05/1971“बापदादा का विशेष श्रृंगार - ‘नूरे-रत्न'”31/05/1972“भविष्य में अष्ट देवता और भक्ति में इष्ट बनने का पुरुषार्थ”18/07/1972“कमजोरियों की समाप्ति समारोह करने वाले ही तीव्र पुरुषार्थी हैं”04/12/1972“महावीर आत्माओं की रूहानी ड्रिल”26/04/1977“स्वतन्‍त्रता ब्राह्मणों का जन्म-सिद्ध अधिकार है”03/05/1977“कर्मों की अति गुह्य गति”09/01/1983“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”03/05/1984“परमात्मा की सबसे पहली श्रेष्ठ रचना - ब्राह्मण”15/11/1989“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”25/01/1994“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”22/03/1996“ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी - सब प्रश्‍नों से पार सदा प्रसन्नचित्त रहना”23/02/1997“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”14/12/1997“व्यर्थ और निगेटिव को अवाइड कर अवार्ड लेने के पात्र बनो”14/03/2006“परमात्म मिलन की अनुभूति के लिए उल्टे मैं पन को जलाने की होली मनाओ, दृष्टि की पिचकारी द्वारा सर्व आत्माओं को सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द का रंग लगाओ''31/10/2007“अपने श्रेष्ठ स्वमान के फ़खुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो”02/02/2008“सम्पूर्ण पवित्रता द्वारा रूहानी रॉयल्टी और पर्सनालिटी का अनुभव करते, अपने मास्टर ज्ञान सूर्य स्वरूप को इमर्ज करो”

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