होली हंस - Holy swans
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11/06/1971“तीनों लोकों में बापदादा के पास रहने वाले रत्नों की निशानियाँ”27/02/1972“होलीहंस बनने का यादगार - होली”18/07/1972“कमजोरियों की समाप्ति समारोह करने वाले ही तीव्र पुरुषार्थी हैं”19/07/1972“संगठन का महत्व तथा संगठन द्वारा सर्टीफिकेट”25/01/1979“सम्मान देना ही सम्मान लेना है”17/12/1979“होली हंस और अमृतवेला रूपी मानसरोवर”04/01/1982“सतगुरु का प्रथम वरदान - मनमनाभव”16/04/1982“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”28/04/1982“सर्वन्श त्यागी की निशानियाँ”17/04/1983“कर्मातीत स्थिति के लिए समेटने और समाने की शक्तियों की आवश्यकता”11/05/1983“हे युवकों विश्व परिवर्तन के कार्य में निमित्त बनो”01/03/1986“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”06/12/1987“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”18/12/1987“कर्मातीत स्थिति की गुह्य परिभाषा”03/03/1988“होली कैसे मनायें तथा सदाकाल का परिवर्तन कैसे हो?”21/12/1989“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”06/01/1990“होलीहँस की परिभाषा”10/01/1990“होलीहँस की विशेषतायें”17/03/1991“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”26/10/1991“तपस्या का प्रत्यक्ष-फल - खुशी”16/03/1992“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”12/11/1992“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”25/01/1994“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”09/03/1994“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”15/11/1999“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”19/03/2000“निर्माण और निर्मान के बैलेन्स से दुआओं का खाता जमा करो”20/02/2005“दिल से मेरा बाबा कहो और सर्व अविनाशी खजानों के मालिक बन बेफिक्र बादशाह बनो''
