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Sin-पाप - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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Sin-पाप
Sin-पाप
17 unique murli dates in this topic
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17 murlis in हिंदी
21/07/1973
“रूहानी जज़ और जिस्मानी जज़”
23/05/1974
“हद की आकर्षणों या विभूतियों से परे रहने वाला ही सच्चा वैष्णव”
27/05/1974
“विश्व-कल्याण के निमित्त बनी आत्माओं के वचन भी सदा कल्याणकारी”
04/07/1974
“स्व-स्थिति की श्रेष्ठता से व्यर्थ संकल्पों की हलचल समाप्त”
28/04/1977
“सदा सुहागिन की निशानियाँ”
29/05/1977
“पुरुषार्थ की रफ्तार में रुकावट का कारण और उसका निवारण”
02/01/1979
“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”
16/01/1979
“तिलक, ताज और तख्तधारी बनने की युक्तियाँ”
07/03/1981
“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”
18/04/1982
“ऊंचे से ऊंचे ब्राह्मण कुल की लाज रखो”
09/01/1983
“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”
02/11/1987
“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”
14/01/1988
“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”
03/04/1991
“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
21/11/1992
“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”
13/02/2003
“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''