हिंदी Murlis — 1979

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01/01“नए वर्ष के लिए बाप द्वारा कराया गया दृढ़ संकल्प”02/01“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”04/01“सम्पूर्णता के आईने में निज स्वरूप को देखो”06/01“सूर्यवंशी और चन्द्रवंशी आत्माओं के प्रैक्टिकल जीवन की धारणाओं के चिन्ह”08/01“संगमयुग पर समानता में समीप और भविष्य के सम्बन्ध में समीप”10/01“अब वेस्ट और वेट को समाप्त करो”12/01“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”14/01“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”16/01“तिलक, ताज और तख्तधारी बनने की युक्तियाँ”18/01“18 जनवरी ‘स्मृति दिवस' को सदाकाल का समर्थी दिवस मनाने के लिए शिक्षाएं”23/01“सदा सुहागिन ही सदा सम्पन्न है”25/01“सम्मान देना ही सम्मान लेना है”30/01“सर्व बन्धनों से मुक्ति की युक्ति”01/02“मनन-शक्ति ही माया जीत बनने का साधन”03/02“सर्व पर रहम करो, ‘वहम' और ‘अहम' भाव को मिटाओ”05/02“मधुबन निवासियों के साथ बापदादा की रूहरिहान''12/11“अमृतवेले के वरदानी समय में पुकार सुनो और उपकार करो”14/11“ब्राह्मण जीवन की निशानी है - सदा खुशी की झलक”19/11“बेहद के वानप्रस्थी अर्थात् निरन्तर एकान्त में सदा स्मृति स्वरूप”21/11“विश्व परिवर्तन के लिए सर्व की एक ही वृत्ति का होना आवश्यक”23/11“नम्रता रूपी कवच द्वारा स्नेह और सहयोग की प्राप्ति”26/11“प्रीत की रीति”28/11“प्रवृत्ति में रहते भी निवृत्ति में कैसे रहें?”30/11“स्वमान में स्थित आत्मा के लक्षण”03/12“विश्व-कल्याणकारी ही विश्व का मालिक बन सकता है”05/12“विजय का झण्डा लहराने के लिए रियलाइजेशन कोर्स शुरू करो”10/12“पुण्य आत्माओं के लक्षण”12/12“रूहानी अलंकार और उनसे सजी हुई मूर्तियाँ”15/12“विदेशी बच्चों के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”17/12“होली हंस और अमृतवेला रूपी मानसरोवर”19/12“सहज याद का साधन - स्वयं को खुदाई खिदमतगार समझो”24/12“जहान को रोशन करने वालों की महफिल”26/12“राजयोगी अर्थात् त्रि-स्मृति स्वरूप”28/12“सिद्धि स्वरूप होने की विधि - एकाग्रता”

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