25 जून 2026 को मंदिरों के पुजारियों का एक भव्य स्नेह मिलन कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें सभी उपस्थित पुजारियों का चंदन तिलक कर, दिव्य गुणों से युक्त स्टीकर, खेस (शॉल) एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर आत्मीय एवं आध्यात्मिक सम्मान किया गया। कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत सौहार्दपूर्ण एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।
इस अवसर पर किशोर सेवा केंद्र की संचालिका बीके रूपा ने
पुजारी शब्द के आध्यात्मिक अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि पुजारी केवल मंदिरों के संरक्षक नहीं होते, बल्कि वे समाज में संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना के संवाहक होते हैं। उन्होंने जीवन में सात्विकता, मर्यादा और आत्मिक शुद्धता के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
मालिया हटीना सेवा केंद्र की संचालिका बीके मीतां (विक्की मीता) ने सभी पुजारियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया और उनके आध्यात्मिक योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनों के साथ आध्यात्मिक मूल्यों पर प्रेरणादायी विचार-विमर्श भी किया गया।
इस अवसर पर “विकसित भारत – नशा मुक्त भारत” अभियान के अंतर्गत सभी उपस्थित पुजारियों एवं प्रतिभागियों को नशा मुक्ति की शपथ भी दिलाई गई। सभी ने संकल्प लिया कि वे समाज में नशा मुक्त, सात्विक और मूल्यनिष्ठ जीवन शैली को बढ़ावा देंगे।
कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि सच्चा पुजारी वही है जो समाज में पूज्य भाव, संस्कृति की रक्षा और आत्मिक शुद्धता को जीवन में धारण करता है तथा दूसरों को भी प्रेरित करता है।
यह स्नेह मिलन कार्यक्रम सामाजिक सद्भाव, आध्यात्मिक जागृति और नशा मुक्त समाज निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में संपन्न हुआ।

















