
“जब आप भोजन को परमात्मा को अर्पित कर उसे शुद्ध, शक्तिशाली और प्रभु प्रसाद के रूप में स्वीकार करना चाहें।”
इस guided meditation के अनुभव से आत्मा स्वयं को अति सूक्ष्म ज्योति बिंदु और चमकते हुए हीरे के रूप में महसूस करती है। परमात्मा के अति शीतल, चांदनी जैसे दिव्य प्रकाश से आत्मा प्रकाशवान होती है और वही दिव्य किरणें भोग की थाली को आलोकित करती हैं।
इस ध्यान से भोजन को परमात्मा को दिल से अर्पित करने का पवित्र भाव जागृत होता है। भोग की थाली का हर एक कण शुद्ध, निर्मल और शक्तिशाली अनुभव होता है, जिससे मन में यह शुभ भावना आती है कि इस भोजन को स्वीकार करने वाले का चित्त शांत हो, कष्ट दूर हों और स्वास्थ्य की अनुभूति हो।
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ओम शांति। अनुभव करें, मैं एक चैतन्य शक्ति आत्मा हूँ, अति सूक्ष्म ज्योति बिंदु, एक चमकता हुआ हीरा हूँ।
मेरे सम्मुख भोग की थाली रखी हुई है, जिसे मुझे परमात्मा को स्वीकार करानी है। परमात्मा सर्व शक्तियों का परम स्रोत हैं। उनका अति शीतल, चांदनी जैसा दिव्य प्रकाश मुझ पर पड़ रहा है। मैं दिव्य आत्मा प्रकाशवान हो रही हूँ।
अब मेरे मस्तक से ये दिव्य प्रकाश की किरणें भोग की थाली पर पड़ रही हैं। परमात्मा से बातें करें, हे मेरे प्यारे परमपिता, मैं आपको दिल से यह भोजन अर्पित करती हूँ। आप इसे स्वीकार करें।
अनुभव करें कि अब दिव्य किरणों से आलोकित यह भोजन प्रभु प्रसाद बन गया है। थाली में रखे हुए भोजन का हर एक कण शुद्ध, निर्मल और शक्तिशाली होता जा रहा है।
मन में यह भाव जागृत करें कि जो भी यह भोजन स्वीकार करेगा, उसके सारे कष्ट दूर हो जाएँगे, उसका चित्त शांत हो जाएगा। इस भोजन को स्वीकार करने वाला स्वस्थ हो जाएगा। ओम शांति।
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