
“जब मन को साफ कर पवित्रता और विश्व की हर आत्मा के प्रति शुभ भावना, शुभ कामना का अनुभव करना चाहें, तब यह ध्यान करें।”
इस ध्यान के अनुभव से स्वयं को शरीर को चलाने वाली दिव्य शक्ति, पवित्र आत्मा के रूप में अनुभव किया जा सकता है। परमात्मा से निकलते हुए पवित्रता के प्रकाश को अपने भीतर उतरता हुआ अनुभव करने से मन साफ होने का अनुभव होता है।
यह ध्यान विश्व की हर आत्मा के प्रति मन में शुभ भावना और शुभ कामना का अनुभव करने तथा मन, वचन और कर्म से पवित्र आत्मा बनने के भाव को गहरा करता है।
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ओम शांति।
मैं इस शरीर को चलाने वाली दिव्य शक्ति आत्मा हूँ।
मैं पवित्र आत्मा हूँ।
कुछ क्षण के लिए अनुभव करते हैं कि बिल्कुल मेरी तरह, मेरे पिता परमात्मा निराकार ज्योति-बिंदु स्वरूप मेरे सम्मुख हैं। उनसे निकलता हुआ पवित्रता का प्रकाश मेरे भीतर उतर रहा है।
मेरा मन साफ हो रहा है। विश्व की हर आत्मा के प्रति मेरे मन में शुभ भावना, शुभ कामना है। मैं मन, वचन, कर्म से पवित्र हूँ।
मैं परम पवित्र आत्मा हूँ।
ओम शांति।
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