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“जब आत्मबल गिरने लगे और आपको दिव्य ऊर्जा की आवश्यकता हो, यह ध्यान आपको पुनः आत्मशक्ति से भरने के लिए आदर्श है।”
इस ध्यान के पश्चात आत्मा अनुभव करती है कि परमात्मा शिव की सुप्रीम लाइट उसके सामने उतर आई है और यह लाइट आत्मा के भीतर अनंत शक्तियाँ भर देती है। भीतर की हर कमजोरी और कमी जैसे धीरे-धीरे गलकर प्रकाश में बदल जाती है।
मन एक दिव्यता से भर जाता है और आत्मा को अपने "शक्ति स्वरूप" की गहन अनुभूति होती है। यह ध्यान न केवल स्थिरता देता है, बल्कि आंतरिक ऊर्जा को इतना जाग्रत कर देता है कि आत्मा जीवन की हर परिस्थिति में अपने दिव्य बल के साथ टिके रह सकता है।
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ओम शांति।
स्वयं को कुछ पलों के लिए आस-पास चल रहे उतार-चढ़ाव के माहौल से अलग करें।
पूरी तरह अलग हो जाएँ। महसूस करें। मेरे ऊपर आकाश से एक बहुत सुंदर प्रकाश इस धरती पर बिल्कुल मेरे सामने आ गया है। यह सुप्रीम लाइट सर्वशक्तिमान परम पिता परमात्मा शिव की है।
महसूस करें इस प्रकाश को, जो मेरे अंदर में अनंत शक्तियाँ भर रहा है।
मेरे अंदर की कमज़ोरियाँ और कमियाँ दूर हो रही हैं।अंदर का अंधकार प्रकाश का रूप ले रहा है। मैं इन शक्तियों को स्वयं में समा रहा हूँ। इन शक्तियों को स्वीकार कर रहा हूँ।
मैं शक्तिशाली हूँ। मैं शक्ति स्वरूप हूँ।
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