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Clinig/Inclination-लगाव/झुकाव - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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Clinig/Inclination-लगाव/झुकाव
Clinig/Inclination-लगाव/झुकाव
46 unique murli dates in this topic
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45 murlis in हिंदी
16/10/1969
“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”
20/12/1969
“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
02/07/1970
“साइलेन्स बल का प्रयोग”
11/03/1971
“परिस्थितियों को पार करने का साधन - ‘स्वस्थिति'”
25/03/1971
“न्यारे और विश्व के प्यारे बनने की विधि”
20/09/1971
“रूहानी स्नेही बनो”
22/07/1972
“नष्टोमोहा बनने की भिन्न-भिन्न युक्तियाँ”
15/07/1973
“लगाव और स्वभाव के बदलने से विश्व-परिवर्तन”
10/02/1975
“सर्व शक्तियों सहित सेवा में समर्पण”
01/10/1975
“एकान्त, एकाग्रता और दृढ़-संकल्प से सिद्धि की प्राप्ति”
25/10/1975
“बेहद की शिक्षिका समझ वैराग्य वृत्ति को धारण करो”
02/02/1977
“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”
28/04/1977
“सदा सुहागिन की निशानियाँ”
03/05/1977
“कर्मों की अति गुह्य गति”
29/05/1977
“पुरुषार्थ की रफ्तार में रुकावट का कारण और उसका निवारण”
02/01/1978
“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”
23/01/1980
“पवित्रता का महत्व”
01/02/1980
“सूक्ष्मवतन की कारोबार”
01/11/1981
“सेवा के सफलता की कुन्जी”
20/01/1982
“प्रीत की रीत निभाने का सहज तरीका - गाना और नाचना”
08/04/1982
“लौकिक, अलौकिक सम्बन्ध का त्याग”
13/04/1983
“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”
14/04/1983
“सम्पन्न आत्मा सदा स्वयं और सेवा से सन्तुष्ट”
09/05/1983
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”
12/04/1984
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन - पवित्रता”
06/03/1985
“होली का रूहानी रहस्य”
27/03/1985
“कर्मातीत अवस्था”
23/01/1987
“सफलता के सितारे की विशेषतायें”
06/01/1988
“दिल के ज्ञानी तथा स्नेही बनो और लीकेज को बन्द करो”
09/12/1989
“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”
13/12/1989
“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”
31/03/1990
“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”
04/12/1991
“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”
16/03/1992
“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
31/12/1992
“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”
02/12/1993
“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
05/12/1994
“वर्तमान समय की आवश्यकता - बेहद के वैराग्य वृत्ति का वायुमण्डल बनाना”
16/11/1995
“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”
10/03/1996
“‘करनहार’ और ‘करावनहार’ की स्मृति से कर्मातीत स्थिति का अनुभव”
15/11/1999
“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”
07/03/2005
“सम्पूर्ण पवित्रता का व्रत रखना और मैं पन को समर्पित करना ही शिवजयन्ती मनाना है''
28/03/2006
“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”