Clinig/Inclination-लगाव/झुकाव
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16/10/1969“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”20/12/1969“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”26/01/1970“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”02/07/1970“साइलेन्स बल का प्रयोग”11/03/1971“परिस्थितियों को पार करने का साधन - ‘स्वस्थिति'”25/03/1971“न्यारे और विश्व के प्यारे बनने की विधि”20/09/1971“रूहानी स्नेही बनो”22/07/1972“नष्टोमोहा बनने की भिन्न-भिन्न युक्तियाँ”15/07/1973“लगाव और स्वभाव के बदलने से विश्व-परिवर्तन”10/02/1975“सर्व शक्तियों सहित सेवा में समर्पण”01/10/1975“एकान्त, एकाग्रता और दृढ़-संकल्प से सिद्धि की प्राप्ति”25/10/1975“बेहद की शिक्षिका समझ वैराग्य वृत्ति को धारण करो”02/02/1977“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”28/04/1977“सदा सुहागिन की निशानियाँ”03/05/1977“कर्मों की अति गुह्य गति”29/05/1977“पुरुषार्थ की रफ्तार में रुकावट का कारण और उसका निवारण”02/01/1978“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”23/01/1980“पवित्रता का महत्व”01/02/1980“सूक्ष्मवतन की कारोबार”01/11/1981“सेवा के सफलता की कुन्जी”20/01/1982“प्रीत की रीत निभाने का सहज तरीका - गाना और नाचना”08/04/1982“लौकिक, अलौकिक सम्बन्ध का त्याग”13/04/1983“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”14/04/1983“सम्पन्न आत्मा सदा स्वयं और सेवा से सन्तुष्ट”09/05/1983“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”12/04/1984“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन - पवित्रता”06/03/1985“होली का रूहानी रहस्य”27/03/1985“कर्मातीत अवस्था”23/01/1987“सफलता के सितारे की विशेषतायें”06/01/1988“दिल के ज्ञानी तथा स्नेही बनो और लीकेज को बन्द करो”09/12/1989“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”13/12/1989“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”31/03/1990“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”04/12/1991“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”16/03/1992“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”24/09/1992“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”31/12/1992“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”02/12/1993“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”05/12/1994“वर्तमान समय की आवश्यकता - बेहद के वैराग्य वृत्ति का वायुमण्डल बनाना”16/11/1995“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”10/03/1996“‘करनहार’ और ‘करावनहार’ की स्मृति से कर्मातीत स्थिति का अनुभव”15/11/1999“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”07/03/2005“सम्पूर्ण पवित्रता का व्रत रखना और मैं पन को समर्पित करना ही शिवजयन्ती मनाना है''28/03/2006“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”
