मायाजीत - Conquerer of maya
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24/01/1970“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”30/11/1970“वर्कर्स की वन्डरफुल सर्कस”14/02/1978“समीप आत्मा की निशानियाँ”01/04/1978“निरन्तर योगी ही निरन्तर साथी है”16/01/1979“तिलक, ताज और तख्तधारी बनने की युक्तियाँ”03/02/1979“सर्व पर रहम करो, ‘वहम' और ‘अहम' भाव को मिटाओ”30/11/1979“स्वमान में स्थित आत्मा के लक्षण”05/12/1979“विजय का झण्डा लहराने के लिए रियलाइजेशन कोर्स शुरू करो”21/01/1980“बाप को प्रत्यक्ष करने की विधि”07/03/1981“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”18/03/1981“मुश्किल को सहज करने की युक्ति ‘सदा बाप को देखो’”29/03/1981“ज्ञान का सार ‘मैं और मेरा बाबा’”02/01/1982“विश्व-परिवर्तन की जिम्मेवारी - संगमयुगी ब्राह्मणों पर”12/03/1982“चैतन्य पुष्पों में रंग, रुप, खुशबू का आधार”03/04/1982“सर्वप्रथम त्याग है - देह-भान का त्याग”21/03/1983“भारत माता शक्ति अवतार द्वारा विश्व का उद्धार”11/04/1983“सहज पुरूषार्थी के लक्षण”07/12/1983“श्रेष्ठ पद की प्राप्ति का आधार - ‘मुरली’”12/01/1984“सदा समर्थ सोचो तथा वर्णन करो”14/01/1984“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”19/11/1984“बेहद की वैराग्य वृत्ति से सिद्धियों की प्राप्ति”30/01/1985“मायाजीत और प्रकृतिजीत ही स्वराज्य-अधिकारी”18/03/1985“सन्तुष्टता”30/03/1985“तीन-तीन बातों का पाठ”14/10/1987“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”06/11/1987“निरन्तर सेवाधारी बनने का साधन चार प्रकार की सेवायें”18/11/1987“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”10/01/1988“मनन करने की विधि तथा मनन शक्ति को बढ़ाने की युक्तियां”16/02/1988“सदा उत्साह में रहकर उत्सव मनाओ”13/12/1989“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”18/01/1992“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”03/11/1992“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”30/11/1992“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”18/01/1993“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”09/12/1993“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”31/12/1993“नये वर्ष में सदा उमंग-उत्साह में उड़ना और सर्व के प्रति महादानी, वरदानी बन व्यर्थ को समाप्त करना”18/01/1994“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”25/01/1994“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”17/11/1994“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”25/11/2000“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”14/11/2002“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”31/10/2006“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''15/10/2007“संगमयुग की जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए सब बोझ वा बंधन बाप को देकर डबल लाइट बनो”
