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मायाजीत - Conquerer of maya - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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मायाजीत - Conquerer of maya
मायाजीत - Conquerer of maya
44 unique murli dates in this topic
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44 murlis in हिंदी
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
30/11/1970
“वर्कर्स की वन्डरफुल सर्कस”
14/02/1978
“समीप आत्मा की निशानियाँ”
01/04/1978
“निरन्तर योगी ही निरन्तर साथी है”
16/01/1979
“तिलक, ताज और तख्तधारी बनने की युक्तियाँ”
03/02/1979
“सर्व पर रहम करो, ‘वहम' और ‘अहम' भाव को मिटाओ”
30/11/1979
“स्वमान में स्थित आत्मा के लक्षण”
05/12/1979
“विजय का झण्डा लहराने के लिए रियलाइजेशन कोर्स शुरू करो”
21/01/1980
“बाप को प्रत्यक्ष करने की विधि”
07/03/1981
“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”
18/03/1981
“मुश्किल को सहज करने की युक्ति ‘सदा बाप को देखो’”
29/03/1981
“ज्ञान का सार ‘मैं और मेरा बाबा’”
02/01/1982
“विश्व-परिवर्तन की जिम्मेवारी - संगमयुगी ब्राह्मणों पर”
12/03/1982
“चैतन्य पुष्पों में रंग, रुप, खुशबू का आधार”
03/04/1982
“सर्वप्रथम त्याग है - देह-भान का त्याग”
21/03/1983
“भारत माता शक्ति अवतार द्वारा विश्व का उद्धार”
11/04/1983
“सहज पुरूषार्थी के लक्षण”
07/12/1983
“श्रेष्ठ पद की प्राप्ति का आधार - ‘मुरली’”
12/01/1984
“सदा समर्थ सोचो तथा वर्णन करो”
14/01/1984
“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”
19/11/1984
“बेहद की वैराग्य वृत्ति से सिद्धियों की प्राप्ति”
30/01/1985
“मायाजीत और प्रकृतिजीत ही स्वराज्य-अधिकारी”
18/03/1985
“सन्तुष्टता”
30/03/1985
“तीन-तीन बातों का पाठ”
14/10/1987
“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”
06/11/1987
“निरन्तर सेवाधारी बनने का साधन चार प्रकार की सेवायें”
18/11/1987
“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”
10/01/1988
“मनन करने की विधि तथा मनन शक्ति को बढ़ाने की युक्तियां”
16/02/1988
“सदा उत्साह में रहकर उत्सव मनाओ”
13/12/1989
“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”
18/01/1992
“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
30/11/1992
“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”
18/01/1993
“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”
09/12/1993
“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”
31/12/1993
“नये वर्ष में सदा उमंग-उत्साह में उड़ना और सर्व के प्रति महादानी, वरदानी बन व्यर्थ को समाप्त करना”
18/01/1994
“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”
25/01/1994
“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”
17/11/1994
“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”
25/11/2000
“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”
14/11/2002
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”
31/10/2006
“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''
15/10/2007
“संगमयुग की जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए सब बोझ वा बंधन बाप को देकर डबल लाइट बनो”