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सत्गुरु - Satguru - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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सत्गुरु - Satguru
सत्गुरु - Satguru
26 unique murli dates in this topic
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26 murlis in हिंदी
16/06/1969
“बड़े-से-बड़ा त्याग - अवगुणों का त्याग”
26/06/1969
“शिक्षा देने का स्वरूप - अपने स्वरूप से शिक्षा देना”
18/07/1971
“विल पावर और कन्ट्रोलिंग पावर”
03/05/1972
“‘लॉ मेकर' बनो, ‘लॉ ब्रेकर' नहीं”
21/07/1973
“रूहानी जज़ और जिस्मानी जज़”
21/06/1974
“महान् पद की बुकिंग के लिये महीन रूप से चेकिंग आवश्यक”
02/01/1978
“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”
25/01/1979
“सम्मान देना ही सम्मान लेना है”
03/12/1979
“विश्व-कल्याणकारी ही विश्व का मालिक बन सकता है”
26/12/1979
“राजयोगी अर्थात् त्रि-स्मृति स्वरूप”
04/01/1982
“सतगुरु का प्रथम वरदान - मनमनाभव”
28/12/1982
“सदा एक रस, सम्पूर्ण चमकता हुआ सितारा बनो”
05/04/1983
“सर्व वरदान आपका जन्म-सिद्ध अधिकार”
18/03/1987
“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”
14/10/1987
“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”
17/10/1987
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - ‘पवित्रता’”
07/11/1989
“तीनों सम्बन्धों की सहज और श्रेष्ठ पालना”
21/12/1989
“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”
22/02/1990
“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”
31/12/1990
“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”
08/04/1992
“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”
03/10/1992
“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”
30/03/1998
“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”
15/12/2003
“प्रत्यक्षता के लिए साधारणता को अलौकिकता में परिवर्तन कर दर्शनीय मूर्त बनो''
30/11/2004
“अभी अपने चलन और चेहरे द्वारा ब्रह्मा बाप समान अव्यक्त रूप दिखाओ, साक्षात्कार मूर्त बनो''
15/10/2007
“संगमयुग की जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए सब बोझ वा बंधन बाप को देकर डबल लाइट बनो”