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विशेष आत्मा - Special soul - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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विशेष आत्मा - Special soul
विशेष आत्मा - Special soul
45 unique murli dates in this topic
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44 murlis in हिंदी
20/12/1969
“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”
09/10/1971
“पॉवरफुल वृत्ति से सर्विस में वृद्धि”
18/10/1971
“दीपमाला - चैतन्य दीपकों की माला की यादगार”
02/08/1973
“यथार्थ विधि से सिद्धि की प्राप्ति”
21/06/1974
“महान् पद की बुकिंग के लिये महीन रूप से चेकिंग आवश्यक”
13/09/1974
“मुरब्बी बच्चे बन अपनी स्टेज को योग-युक्त व युक्ति-युक्त बनाओ”
30/09/1975
“सारे कल्प में विशेष पार्ट बजाने वाली श्रेष्ठ आत्माओं की विशेषतायें”
21/10/1975
“बेहद की वैराग्य वृत्ति ही विश्व परिवर्तन का आधार”
09/12/1975
“महावीर अर्थात् विशेष आत्माओं की विशेषताएं”
28/05/1977
“बापदादा के सदा दिल तख्तनशीन, समान बच्चों के लक्षण”
31/05/1977
“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”
14/06/1977
“देश और विदेश का सैर-समाचार”
25/01/1979
“सम्मान देना ही सम्मान लेना है”
12/11/1979
“अमृतवेले के वरदानी समय में पुकार सुनो और उपकार करो”
05/12/1979
“विजय का झण्डा लहराने के लिए रियलाइजेशन कोर्स शुरू करो”
06/11/1981
“विशेष युग का विशेष फल”
11/11/1981
“बिन्दु का महत्व”
21/11/1981
“छोड़ो तो छूटो”
22/01/1982
“बधाई और विदाई दो”
06/04/1982
“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”
27/03/1983
“बाप समान बेहद की वृत्ति को धारण कर बाप समान बनो”
23/05/1983
“छोड़ो तो छूटो!”
12/12/1984
“विशेष आत्माओं का फर्ज”
18/01/1986
“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”
18/02/1986
“निरन्तर सेवाधारी तथा निरन्तर योगी बनो”
20/02/1986
“उड़ती कला से सर्व का भला”
01/03/1986
“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”
04/03/1986
“सर्व श्रेष्ठ नई रचना का फाउण्डेशन - निस्वार्थ स्नेह”
13/03/1986
“सहज परिवर्तन का आधार - अनुभव की अथॉरिटी”
16/03/1986
“रुहानी ड्रिल”
10/11/1987
“शुभचिन्तक-मणि बन विश्व को चिन्ताओं से मुक्त करो”
26/01/1988
“संगमयुग पर नम्बरवन पूज्य बनने की अलौकिक विधि”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
18/11/1993
“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
18/01/1994
“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”
25/01/1994
“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”
25/11/1995
“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”
31/12/1999
“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”
25/11/2000
“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”
08/10/2002
“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''
17/10/2003
“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''
30/11/2003
“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''
15/12/2007
“समय के महत्व को जान, कर्मों की गुह्य गति का अटेन्शन रखो, नष्टोमोहा, एवररेडी बनो”