विशेष आत्मा - Special soul
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20/12/1969“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”09/10/1971“पॉवरफुल वृत्ति से सर्विस में वृद्धि”18/10/1971“दीपमाला - चैतन्य दीपकों की माला की यादगार”02/08/1973“यथार्थ विधि से सिद्धि की प्राप्ति”21/06/1974“महान् पद की बुकिंग के लिये महीन रूप से चेकिंग आवश्यक”13/09/1974“मुरब्बी बच्चे बन अपनी स्टेज को योग-युक्त व युक्ति-युक्त बनाओ”30/09/1975“सारे कल्प में विशेष पार्ट बजाने वाली श्रेष्ठ आत्माओं की विशेषतायें”21/10/1975“बेहद की वैराग्य वृत्ति ही विश्व परिवर्तन का आधार”09/12/1975“महावीर अर्थात् विशेष आत्माओं की विशेषताएं”28/05/1977“बापदादा के सदा दिल तख्तनशीन, समान बच्चों के लक्षण”31/05/1977“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”14/06/1977“देश और विदेश का सैर-समाचार”25/01/1979“सम्मान देना ही सम्मान लेना है”12/11/1979“अमृतवेले के वरदानी समय में पुकार सुनो और उपकार करो”05/12/1979“विजय का झण्डा लहराने के लिए रियलाइजेशन कोर्स शुरू करो”06/11/1981“विशेष युग का विशेष फल”11/11/1981“बिन्दु का महत्व”21/11/1981“छोड़ो तो छूटो”22/01/1982“बधाई और विदाई दो”06/04/1982“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”27/03/1983“बाप समान बेहद की वृत्ति को धारण कर बाप समान बनो”23/05/1983“छोड़ो तो छूटो!”12/12/1984“विशेष आत्माओं का फर्ज”18/01/1986“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”18/02/1986“निरन्तर सेवाधारी तथा निरन्तर योगी बनो”20/02/1986“उड़ती कला से सर्व का भला”01/03/1986“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”04/03/1986“सर्व श्रेष्ठ नई रचना का फाउण्डेशन - निस्वार्थ स्नेह”13/03/1986“सहज परिवर्तन का आधार - अनुभव की अथॉरिटी”16/03/1986“रुहानी ड्रिल”10/11/1987“शुभचिन्तक-मणि बन विश्व को चिन्ताओं से मुक्त करो”26/01/1988“संगमयुग पर नम्बरवन पूज्य बनने की अलौकिक विधि”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”18/11/1993“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”18/01/1994“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”25/01/1994“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”25/11/1995“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”31/12/1999“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”25/11/2000“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”08/10/2002“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''17/10/2003“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''30/11/2003“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''15/12/2007“समय के महत्व को जान, कर्मों की गुह्य गति का अटेन्शन रखो, नष्टोमोहा, एवररेडी बनो”
