रूहानी सेवाधारी -Spiritual Sevadhari
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18/09/1969“त्रिनेत्री, त्रिकालदर्शी और त्रिलोकीनाथ बनने की युक्तियां”23/01/1970“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”05/03/1970“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”24/07/1970“बिन्दु रूप की स्थिति सहज कैसे बने?”11/06/1971“तीनों लोकों में बापदादा के पास रहने वाले रत्नों की निशानियाँ”28/07/1971“आकार में निराकार को देखने का अभ्यास”26/01/1977“अन्तर्मुखता द्वारा सूक्ष्म शक्ति की लीलाओं का अनुभव”18/01/1978“बापदादा की सेवा का रिटर्न”15/04/1981“नम्बरवन तकदीरवान की विशेषताएं”06/11/1981“विशेष युग का विशेष फल”11/11/1981“बिन्दु का महत्व”26/11/1981“सहयोगी ही सहजयोगी”08/01/1982“लण्डन ग्रुप के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”27/03/1982“बीजरुप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ”28/12/1982“सदा एक रस, सम्पूर्ण चमकता हुआ सितारा बनो”03/12/1984“सर्व समर्थ शिक्षक के श्रेष्ठ शिक्षाधारी बनो”10/12/1984“पुराने खाते की समाप्ति की निशानी”18/02/1985“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”22/02/1986“रूहानी सेवा - निस्वार्थ सेवा”18/01/1987“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”31/12/2002“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”18/01/2003“ब्राह्मण जन्म की स्मृतियों द्वारा समर्थ बन सर्व को समर्थ बनाओ”17/03/2003“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''
