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29 Jun 1971
“नालेज की लाइट से पुरुषार्थ का मार्ग स्पष्ट”
29 June 1971 · हिंदी
सभी जो पुरुषार्थ कर रहे हैं उस पुरुषार्थ द्वारा वर्तमान समय की प्राप्ति का लक्ष्य कौन सा है? देव-पद की प्राप्ति तो भविष्य की है, लेकिन वर्तमान समय पुरुषार्थ की प्राप्ति का लक्ष्य कौन सा है? (फरिश्ता बनना) फरिश्ते की मुख्य क्वालिफिकेशन क्या है? फरिश्ता बनने के लिए दो क्वालिफिकेशन कौनसी है? एक लाइट दूसरी माइट चाहिए। दोनों ही जरूरी हैं। लाइट और माइट - दोनों ही फरिश्तेपन की लाइफ में स्पष्ट दिखाई देते हैं। लाइट प्राप्त करने के लिए विशेष कौनसी शक्ति चाहिए? शक्तियां तो बहुत हैं ना। लेकिन माइट रूप वा लाइट रूप बनने के लिए एक-एक अलग गुण बताओ। एक है मनन और दूसरी है सहन शक्ति। जितनी सहन शक्ति होती है उतनी सर्वशक्तिमान की सर्वशक्तियां स्वत: प्राप्त होती हैं। नालेज को भी लाइट कहते हैं ना। तो पुरुषार्थ के मार्ग को सहज और स्पष्ट करने के लिए भी नालेज की लाइट चाहिए। इस लाइट के लिए फिर मनन शक्ति चाहिए। तो एक मनन शक्ति और दूसरी सहन शक्ति चाहिए। अगर यह दोनों ही शक्तियां हैं तो फरिश्ते स्वरूप का चलते-फिरते किसको भी साक्षात्कार हो सकता है। सहन शक्ति से सर्वगुणों की प्राप्ति हो ही जाती है। जो सहनशक्ति वाला होगा उसमें निर्णय शक्ति, परखने की शक्ति, गम्भीरता की शक्ति आटोमेटीकली एक के साथ अनेक आ जाते हैं। सहन शक्ति भी आवश्यक है और मनन शक्ति भी आवश्यक है। मनसा के लिए है मनन शक्ति और वाचा तथा कर्मणा के लिए है सहनशक्ति। सहनशक्ति है तो फिर जो भी शब्द बोलेंगे वह साधारण नहीं। दूसरा कर्म भी जो करेंगे वह भी उसके प्रमाण ही करेंगे। तो दोनों ही शक्तियों की आवश्यकता है। सहनशक्ति वाले कार्य में भी सफल हो जाते हैं। सहनशक्ति की कमी के कारण कार्य की सफलता में भी कमी आ जाती है। सहनशक्ति वाले की ही अव्यक्त स्थिति वा शुद्ध संकल्पों के स्वरूप की स्थिति रहेगी। सहनशील की सूरत में चमक रहेगी। कैसे भी संस्कार वाले होंगे तो भी उनको अपनी सहनशक्ति से टेप्रेरी टाइम के लिए दबा लेंगी। तो दोनों शक्तियां चाहिए। अपने पुरुषार्थ में मन के संकल्प चलाने में भी सहनशक्ति चाहिए। जिसको कन्ट्रोलिंग पावर भी कहते हैं। सहनशक्ति है तो व्यर्थ संकल्पों को भी कन्ट्रोल कर सकते हैं। तो इन दोनों शक्तियों के लिए अटेन्शन रखना है।
नम्बर वन बिज़नेसमैन बनने के लिए सहज तरीका क्या है? अपने को बिज़ी रखने से ही नम्बर वन बिज़नेसमैन बन जायेंगे। जिसको अपने को बिज़ी रखना नहीं आता है वह बिज़नेसमैन के भी लायक नहीं कहा जायेगा। यहाँ बिज़नेसमैन बनना अर्थात् अपनी भी कमाई और दूसरों की भी कमाई। इसके लिए अपने आप को एक सेकेण्ड भी फ्री नहीं रखना। कौन सा नम्बर का बिज़नेसमैन हो? जितना यहाँ गैलप करेंगे उतना समझो अपना भविष्य के तख्त को भी गैलप करेंगे। चान्स अच्छा है। जो भी करने चाहें वह कर सकते हैं। फ्रीडम (आजादी) है सभी को। जो जितना चान्स लेता है उतना समझो अपने तख्त का निशान पक्का करता है। बिज़नेसमैन का अर्थ ही है जो एक संकल्प भी व्यर्थ न जाये, हर संकल्प में कमाई हो। जैसे वह बिज़नेसमैन एक-एक पैसे को कितना बना देते हैं कमाई करके। यह भी एक-एक सेकेण्ड वा संकल्प कमाई करके दिखाये, उनको कहते हैं नम्बर वन बिज़नेसमैन। बुद्धि को और काम ही क्या है। बुद्धि इसी में ही बिज़ी रहनी चाहिए। और सभी तरफ तो खत्म हो गये ना, वा कुछ रहा हुआ है जहाँ बुद्धि जा सके? सभी तरफ तो खत्म हो गये ना। अपने पुराने संस्कारों का तरफ भी खत्म हो गया ना। बुद्धि को जाने के तरफ वा रास्ते, ठिकाने वही हैं। बुद्धि वा तो पुराने संस्कारों तरफ जायेगी वा तो अपने शरीर के हिसाब-किताब तरफ जायेगी वा मन के व्यर्थ संकल्पों तरफ खिंचेगी। यह तो सभी खत्म हो गये ना। भले शरीर का रोग होता है, उसकी नालेज रहती है कि यह फलाना दर्द है, इसका यह निवारण है। क्योंकि यह लक्ष्य है - जितना शरीर ठीक रखेंगे उतना सर्विस करेंगे। बाकी अपनेपन का कोई स्वार्थ नहीं है। सर्विस के निमित्त करते हो, यह साक्षीपन हुआ ना। अभी सिर्फ एक ही मार्ग रह गया। बाकी जो अनेक मार्ग होने के कारण बुद्धि भटकती थी वह मार्ग सभी बन्द हो गये ना। ऑलमाइटी गवर्मेन्ट की जैसे सील लग गई। सील लगी हुई कब खुलती नहीं है, जब तक मुद्दा पूरा न हो। तो ऐसे अपनी चेकिंग करनी चाहिए। जैसे कोई की तकदीर में होता है तो सरकमस्टान्सेस भी ऐसे बनते हैं जैसे कि लिफ्ट का रूप बन जाता है। यहाँ भी जिसके कल्प पहले की तकदीर वा ड्रामा की नूँध है, भले अपना भी पुरुषार्थ रहता है लेकिन साथ-साथ यह लिफ्ट भी दैवी परिवार द्वारा मिलती है और बापदादा द्वारा भी गिफ्ट मिलती है। तो यह भी चेक करना है कि अब बापदादा द्वारा वा दैवी परिवार द्वारा किस-किस प्रकार की गिफ्ट प्राप्त हुई है। बड़े-बड़े आदमियों को गिफ्ट मिलती है। तो शोकेस में उसे सम्भाल कर रख देते हैं। उससे अपने देश का नाम बाला करते हैं। और यहाँ जो समय प्रति समय गिफ्ट प्राप्त हुई है उस द्वारा बापदादा का और कुल का नाम बाला करना है। अच्छा।
जैसे आप लोग शुरू में जब सर्विस पर निकले तो नालेज की शक्ति तो कम थी लेकिन सफलता किस शक्ति के आधार से हुई? त्याग और स्नेह। बुद्धि की लगन दिन-रात बाबा और यज्ञ के तरफ थी। जिगर से निकलता था बाबा और यज्ञ। इसी स्नेह ने ही सभी को सहयोग में लाया। इसी स्नेह की शक्ति से ही केन्द्र बने तो आदि स्थापना में जिस शक्ति ने सहयोग दिया अन्त में भी वही होना है। पहले साकार स्नेह से ही मनमनाभव बने। साकार स्नेह ने ही सहयोगी बनाया वा त्याग कराया। संगठन और स्नेह की शक्ति से घेराव डालना है। अभी देखो, बाहर विलायत में भी सर्विस की सफलता का मूल कारण स्नेही और सहयोगी बनने का घेराव है। ज्ञान का प्रैक्टिकल सबूत यही स्नेह और संगठन की शक्ति है। सर्विस की सफलता का मूल आधार यह है। कहाँ भी रहते, यह सोचना चाहिए किस रीति ऐसा प्लैनिंग करें जिससे सन्देश देने का कार्य जल्दी समाप्त हो। अभी तो बहुत रहा हुआ है। स्नेह से त्याग का भी जम्प देने का उमंग आता है। आप सभी ने त्याग कैसे किया? रग-रग में स्नेह भर गया, तब जम्प दे सके।
फारेन वालों को भी लिखकर भेजना कि अब जैसे ईश्वरीय खुमारी और खुशी में रहते आगे बढ़ते जाते हो वैसे ही सदा खुमारी और खुशी में रहते सर्विस में सफल होते रहेंगे। विजय का तिलक तो लगा हुआ है। अपना विजय का तिलक सदैव देखते रहना। बाकी अभी तक जो किया है उसके लिए बापदादा भी देखकर हर्षित होते हैं, लेकिन आगे तो बढ़ना ही है। कोई वारिस बनाओ तब ही शाबाश देंगे। अभी तक जो किया है उसमें हर्षित होना है। वाह! वाह! करने का कार्य अभी करना है। हर्षित इसलिए होते क्योंकि खुमारी और खुशी अच्छी रीति कायम है। अभी तक रिज़ल्ट बहुत अच्छी है। उन्हों का कमान्डर बहुत हिम्मतवान है। कोई भी कार्य में एक भी अपनी हिम्मत से पान का बीड़ा उठाता है तो दूसरे साथी बन जाते हैं। वैराइटी ग्रुप होते हुए भी गुलदस्ता अच्छा है। इसलिए मुबारक देते हैं। अच्छा।