सेवा में सफमता का आधार / प्रत्यक्ष फल - Basis of success in service / immediate fruit
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06/02/1969“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”17/05/1969“जादू मंत्र का दर्पण”18/05/1969“रूहानी ज्ञान-योग के ज्योतिषी”26/05/1969“सम्पूर्ण स्नेही की परख”16/06/1969“बड़े-से-बड़ा त्याग - अवगुणों का त्याग”18/06/1969“मरजीवा वह है जो पुराने शूद्रपन के संस्कारों को टच भी न करे”19/07/1969“ज़ीरो और हीरो बनो”23/07/1969“सफलता का आधार - परखने की शक्ति”06/12/1969“सरल स्वभाव से बुद्धि को विशाल और दूरांदेशी बनाओ”20/12/1969“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”25/12/1969“अनासक्त बनने के लिए तन और मन को अमानत समझो”23/01/1970“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”25/01/1970“यादगार कायम करने की विधि”02/02/1970“आत्मिक पावर की परख”23/03/1970“सच्ची होली मनाना अर्थात् बीती को बीती करना”26/03/1970“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”28/05/1970“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”07/06/1970“दिव्य मूर्त बनने की विधि”18/06/1970“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”11/07/1970“संगमयुग की डिग्री और भविष्य की प्रालब्ध”27/07/1970“अव्यक्त बनने के लिए मुख्य शक्तियों की धारणा”06/08/1970“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”18/04/1971“मन के भावों को जानने की विधि तथा फायदे”30/05/1971“बाप की आज्ञा और प्रतिज्ञा”08/06/1971“जीवन के लिए तीन चीजों की आवश्यकता - खुराक, खुशी और खज़ाना”10/06/1971“सेवा की धरनी तैयार करने का साधन - सर्चलाइट”29/06/1971“नालेज की लाइट से पुरुषार्थ का मार्ग स्पष्ट”27/09/1971“स्नेह की शक्ति द्वारा सत्यता की प्रत्यक्षता”02/04/1972“महिमा योग्य कैसे बनें?”04/08/1972“सर्विसएबुल, सेंसीबुल और इसेंसफुल की निशानियां”09/11/1972“ज्ञान सितारों का सम्बन्ध ज्ञान सूर्य और ज्ञान चन्द्रमा के साथ”24/12/1972“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”28/04/1974“स्थूल के साथ-साथ सूक्ष्म साधनों से ईश्वरीय सेवा में सफलता”20/10/1975“परहेज द्वारा संगमयुग के सर्व सुखों की अनुभूति”12/01/1977“संगमयुग पर ‘बालक सो मालिक’ बनने वालों के तीनों कालों का साक्षात्कार”11/05/1977“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”16/05/1977“माया के वार का सामना करने के लिए दो शक्तियों की आवश्यकता”19/05/1977“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”27/05/1977“पॉवरफुल स्टेज अर्थात् बाप समान बीजरूप स्थिति”28/05/1977“बापदादा के सदा दिल तख्तनशीन, समान बच्चों के लक्षण”02/06/1977“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”02/01/1978“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”14/02/1978“समीप आत्मा की निशानियाँ”16/02/1978“माया और प्रकृति द्वारा सत्कार प्राप्त आत्मा ही सर्वश्रेष्ठ आत्मा है”01/04/1978“निरन्तर योगी ही निरन्तर साथी है”29/11/1978“सन्तुष्टता से प्रसन्नता और प्रशंसा की प्राप्ति”12/12/1978“परोपकारी कैसे बनें?”19/12/1978“रीयल्टी ही सबसे बड़ी रॉयल्टी है”25/01/1979“सम्मान देना ही सम्मान लेना है”19/11/1979“बेहद के वानप्रस्थी अर्थात् निरन्तर एकान्त में सदा स्मृति स्वरूप”16/01/1980“ऑलमाइटी अथॉरिटी राजयोगी सभा व लोक पसन्द सभा”30/01/1980“स्नेह, सहयोग और शक्ति स्वरूप के पेपर्स की चेकिंग और रिजल्ट”01/02/1980“सूक्ष्मवतन की कारोबार”07/03/1981“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”11/03/1981“सफलता के दो मुख्य आधार”19/03/1981“विश्व के राज्य-अधिकारी कैसे बने?”27/03/1981“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”03/04/1981“ज्ञान मार्ग की यादगार भक्ति मार्ग”06/10/1981“ज्ञान सूर्य बाप की मास्टर ज्ञान सूर्य बच्चों को सेवा की बधाई”01/11/1981“सेवा के सफलता की कुन्जी”06/01/1982“सगंमयुगी ब्राह्मण जीवन में पवित्रता का महत्व”27/03/1982“बीजरुप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ”08/04/1982“लौकिक, अलौकिक सम्बन्ध का त्याग”16/04/1982“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”26/04/1982“बापदादा के दिलतख्तनशीन बनने का सर्व को समान अधिकार”28/04/1982“सर्वन्श त्यागी की निशानियाँ”31/12/1982“बापदादा की सर्व अलौकिक फ्रैण्ड्स को बधाई”03/01/1983“हर गुण, हर शक्ति को निजी स्वरूप बनाओ बाप समान बनो”26/01/1983“दाता के बच्चे बन सर्व को सहयोग दो”27/02/1983“संगमयुग पर श्रृंगारा हुआ मधुर अलौकिक मेला”10/11/1983“सहज शब्द की लहर को समाप्त कर साक्षात्कार मूर्त बनो”27/12/1983“भिखारी नहीं सदा के अधिकारी बनो”22/01/1984“नामीग्रामी सेवाधारी बनने की विधि”18/02/1984“ब्राह्मण जीवन - अमूल्य जीवन”08/04/1984“संगमयुग पर प्राप्त अधिकारों से विश्व राज्य अधिकारी”26/04/1984“रुहानी विचित्र मेले में सर्व खज़ानों की प्राप्ति”26/08/1984“लक्ष्य प्रमाण सफलता प्राप्त करने के लिए स्वार्थ के बजाए सेवा अर्थ कार्य करो”18/01/1986“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”13/03/1986“सहज परिवर्तन का आधार - अनुभव की अथॉरिटी”20/02/1987“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”25/10/1987“चार बातों से न्यारे बनो”29/10/1987“तन, मन, धन और सम्बन्ध की शक्ति”02/11/1987“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”28/02/1988“डबल विदेशी ब्राह्मण बच्चों की विशेषतायें”31/03/1988‘वाचा’ और ‘कर्मणा’ - दोनों शक्तियों को जमा करने की ईश्वरीय स्कीम01/12/1989“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”25/12/1989“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”10/01/1990“होलीहँस की विशेषतायें”20/01/1990“ब्रह्मा बाप के विशेष पाँच कदम”22/02/1990“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”19/03/1990“उड़ती कला का आधार उमंग-उत्साह के पंख”25/03/1990“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”13/12/1990“तपस्या का फाउण्डेशन बेहद का वैराग्य”10/04/1991“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”16/03/1992“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”12/11/1992“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”31/12/1992“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”07/03/1993“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”26/03/1993“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”18/02/1994“स्वमान की स्मृति का स्विच ऑन करने से देह भान के अंधकार की समाप्ति”09/03/1994“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”07/03/1995“ब्राह्मण अर्थात् धर्म सत्ता और स्वराज्य सत्ता की अधिकारी आत्मा”06/04/1995“प्योरिटी की रूहानी पर्सनालिटी की स्मृति स्वरूप द्वारा मायाजीत बनो”16/02/1996“डायमण्ड जुबली वर्ष में विशेष अटेन्शन देकर समय और संकल्प के खजाने को जमा करो”22/03/1996“ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी - सब प्रश्नों से पार सदा प्रसन्नचित्त रहना”23/02/1997“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”21/11/1998“सेवा के साथ देह में रहते विदेही अवस्था का अनुभव बढ़ाओ”03/02/2002“लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ, सर्व खजानों में सम्पन्न बनो''25/10/2002“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''14/11/2002“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”31/12/2002“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”28/02/2003“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''17/03/2003“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''15/12/2004“बापदादा की विशेष आशा - हर एक बच्चा दुआयें दे और दुआयें ले''18/01/2005“सेकेण्ड में देहभान से मुक्त हो जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो और मास्टर मुक्ति-जीवनमुक्ति दाता बनो”15/11/2005“सच्चे दिल से बाप व परिवार के स्नेही बन मेहनत मुक्त बनने का वायदा करो और फायदा लो''31/03/2007“सपूत बन अपनी सूरत से बाप की सूरत दिखाना, निर्माण (सेवा) के साथ निर्मल वाणी, निर्मान स्थिति का बैलेन्स रखना”15/12/2007“समय के महत्व को जान, कर्मों की गुह्य गति का अटेन्शन रखो, नष्टोमोहा, एवररेडी बनो”20/10/2008“सन्तुष्टमणि बन विश्व में सन्तुष्टता की लाइट फैलाओ, सन्तुष्ट रहो और सबको सन्तुष्ट करो”
