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सेवा में सफमता का आधार / प्रत्यक्ष फल - Basis of success in service / immediate fruit - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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सेवा में सफमता का आधार / प्रत्यक्ष फल - Basis of success in service / immediate fruit
सेवा में सफमता का आधार / प्रत्यक्ष फल - Basis of success in service / immediate fruit
120 unique murli dates in this topic
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ગુજરાતી
తెలుగు
120 murlis in हिंदी
06/02/1969
“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”
17/05/1969
“जादू मंत्र का दर्पण”
18/05/1969
“रूहानी ज्ञान-योग के ज्योतिषी”
26/05/1969
“सम्पूर्ण स्नेही की परख”
16/06/1969
“बड़े-से-बड़ा त्याग - अवगुणों का त्याग”
18/06/1969
“मरजीवा वह है जो पुराने शूद्रपन के संस्कारों को टच भी न करे”
19/07/1969
“ज़ीरो और हीरो बनो”
23/07/1969
“सफलता का आधार - परखने की शक्ति”
06/12/1969
“सरल स्वभाव से बुद्धि को विशाल और दूरांदेशी बनाओ”
20/12/1969
“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”
25/12/1969
“अनासक्त बनने के लिए तन और मन को अमानत समझो”
23/01/1970
“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
02/02/1970
“आत्मिक पावर की परख”
23/03/1970
“सच्ची होली मनाना अर्थात् बीती को बीती करना”
26/03/1970
“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”
28/05/1970
“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”
07/06/1970
“दिव्य मूर्त बनने की विधि”
18/06/1970
“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”
11/07/1970
“संगमयुग की डिग्री और भविष्य की प्रालब्ध”
27/07/1970
“अव्यक्त बनने के लिए मुख्य शक्तियों की धारणा”
06/08/1970
“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”
18/04/1971
“मन के भावों को जानने की विधि तथा फायदे”
30/05/1971
“बाप की आज्ञा और प्रतिज्ञा”
08/06/1971
“जीवन के लिए तीन चीजों की आवश्यकता - खुराक, खुशी और खज़ाना”
10/06/1971
“सेवा की धरनी तैयार करने का साधन - सर्चलाइट”
29/06/1971
“नालेज की लाइट से पुरुषार्थ का मार्ग स्पष्ट”
27/09/1971
“स्नेह की शक्ति द्वारा सत्यता की प्रत्यक्षता”
02/04/1972
“महिमा योग्य कैसे बनें?”
04/08/1972
“सर्विसएबुल, सेंसीबुल और इसेंसफुल की निशानियां”
09/11/1972
“ज्ञान सितारों का सम्बन्ध ज्ञान सूर्य और ज्ञान चन्द्रमा के साथ”
24/12/1972
“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”
28/04/1974
“स्थूल के साथ-साथ सूक्ष्म साधनों से ईश्वरीय सेवा में सफलता”
20/10/1975
“परहेज द्वारा संगमयुग के सर्व सुखों की अनुभूति”
12/01/1977
“संगमयुग पर ‘बालक सो मालिक’ बनने वालों के तीनों कालों का साक्षात्कार”
11/05/1977
“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”
16/05/1977
“माया के वार का सामना करने के लिए दो शक्तियों की आवश्यकता”
19/05/1977
“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”
27/05/1977
“पॉवरफुल स्टेज अर्थात् बाप समान बीजरूप स्थिति”
28/05/1977
“बापदादा के सदा दिल तख्तनशीन, समान बच्चों के लक्षण”
02/06/1977
“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”
02/01/1978
“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”
14/02/1978
“समीप आत्मा की निशानियाँ”
16/02/1978
“माया और प्रकृति द्वारा सत्कार प्राप्त आत्मा ही सर्वश्रेष्ठ आत्मा है”
01/04/1978
“निरन्तर योगी ही निरन्तर साथी है”
29/11/1978
“सन्तुष्टता से प्रसन्नता और प्रशंसा की प्राप्ति”
12/12/1978
“परोपकारी कैसे बनें?”
19/12/1978
“रीयल्टी ही सबसे बड़ी रॉयल्टी है”
25/01/1979
“सम्मान देना ही सम्मान लेना है”
19/11/1979
“बेहद के वानप्रस्थी अर्थात् निरन्तर एकान्त में सदा स्मृति स्वरूप”
16/01/1980
“ऑलमाइटी अथॉरिटी राजयोगी सभा व लोक पसन्द सभा”
30/01/1980
“स्नेह, सहयोग और शक्ति स्वरूप के पेपर्स की चेकिंग और रिजल्ट”
01/02/1980
“सूक्ष्मवतन की कारोबार”
07/03/1981
“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”
11/03/1981
“सफलता के दो मुख्य आधार”
19/03/1981
“विश्व के राज्य-अधिकारी कैसे बने?”
27/03/1981
“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”
03/04/1981
“ज्ञान मार्ग की यादगार भक्ति मार्ग”
06/10/1981
“ज्ञान सूर्य बाप की मास्टर ज्ञान सूर्य बच्चों को सेवा की बधाई”
01/11/1981
“सेवा के सफलता की कुन्जी”
06/01/1982
“सगंमयुगी ब्राह्मण जीवन में पवित्रता का महत्व”
27/03/1982
“बीजरुप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ”
08/04/1982
“लौकिक, अलौकिक सम्बन्ध का त्याग”
16/04/1982
“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”
26/04/1982
“बापदादा के दिलतख्तनशीन बनने का सर्व को समान अधिकार”
28/04/1982
“सर्वन्श त्यागी की निशानियाँ”
31/12/1982
“बापदादा की सर्व अलौकिक फ्रैण्ड्स को बधाई”
03/01/1983
“हर गुण, हर शक्ति को निजी स्वरूप बनाओ बाप समान बनो”
26/01/1983
“दाता के बच्चे बन सर्व को सहयोग दो”
27/02/1983
“संगमयुग पर श्रृंगारा हुआ मधुर अलौकिक मेला”
10/11/1983
“सहज शब्द की लहर को समाप्त कर साक्षात्कार मूर्त बनो”
27/12/1983
“भिखारी नहीं सदा के अधिकारी बनो”
22/01/1984
“नामीग्रामी सेवाधारी बनने की विधि”
18/02/1984
“ब्राह्मण जीवन - अमूल्य जीवन”
08/04/1984
“संगमयुग पर प्राप्त अधिकारों से विश्व राज्य अधिकारी”
26/04/1984
“रुहानी विचित्र मेले में सर्व खज़ानों की प्राप्ति”
26/08/1984
“लक्ष्य प्रमाण सफलता प्राप्त करने के लिए स्वार्थ के बजाए सेवा अर्थ कार्य करो”
18/01/1986
“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”
13/03/1986
“सहज परिवर्तन का आधार - अनुभव की अथॉरिटी”
20/02/1987
“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”
25/10/1987
“चार बातों से न्यारे बनो”
29/10/1987
“तन, मन, धन और सम्बन्ध की शक्ति”
02/11/1987
“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”
28/02/1988
“डबल विदेशी ब्राह्मण बच्चों की विशेषतायें”
31/03/1988
‘वाचा’ और ‘कर्मणा’ - दोनों शक्तियों को जमा करने की ईश्वरीय स्कीम
01/12/1989
“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”
25/12/1989
“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”
10/01/1990
“होलीहँस की विशेषतायें”
20/01/1990
“ब्रह्मा बाप के विशेष पाँच कदम”
22/02/1990
“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”
19/03/1990
“उड़ती कला का आधार उमंग-उत्साह के पंख”
25/03/1990
“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”
13/12/1990
“तपस्या का फाउण्डेशन बेहद का वैराग्य”
10/04/1991
“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”
16/03/1992
“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”
12/11/1992
“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”
31/12/1992
“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
07/03/1993
“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”
26/03/1993
“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”
18/02/1994
“स्वमान की स्मृति का स्विच ऑन करने से देह भान के अंधकार की समाप्ति”
09/03/1994
“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”
07/03/1995
“ब्राह्मण अर्थात् धर्म सत्ता और स्वराज्य सत्ता की अधिकारी आत्मा”
06/04/1995
“प्योरिटी की रूहानी पर्सनालिटी की स्मृति स्वरूप द्वारा मायाजीत बनो”
16/02/1996
“डायमण्ड जुबली वर्ष में विशेष अटेन्शन देकर समय और संकल्प के खजाने को जमा करो”
22/03/1996
“ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी - सब प्रश्नों से पार सदा प्रसन्नचित्त रहना”
23/02/1997
“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”
21/11/1998
“सेवा के साथ देह में रहते विदेही अवस्था का अनुभव बढ़ाओ”
03/02/2002
“लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ, सर्व खजानों में सम्पन्न बनो''
25/10/2002
“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''
14/11/2002
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”
31/12/2002
“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”
28/02/2003
“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''
17/03/2003
“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''
15/12/2004
“बापदादा की विशेष आशा - हर एक बच्चा दुआयें दे और दुआयें ले''
18/01/2005
“सेकेण्ड में देहभान से मुक्त हो जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो और मास्टर मुक्ति-जीवनमुक्ति दाता बनो”
15/11/2005
“सच्चे दिल से बाप व परिवार के स्नेही बन मेहनत मुक्त बनने का वायदा करो और फायदा लो''
31/03/2007
“सपूत बन अपनी सूरत से बाप की सूरत दिखाना, निर्माण (सेवा) के साथ निर्मल वाणी, निर्मान स्थिति का बैलेन्स रखना”
15/12/2007
“समय के महत्व को जान, कर्मों की गुह्य गति का अटेन्शन रखो, नष्टोमोहा, एवररेडी बनो”
20/10/2008
“सन्तुष्टमणि बन विश्व में सन्तुष्टता की लाइट फैलाओ, सन्तुष्ट रहो और सबको सन्तुष्ट करो”