दो बाते - Two thing

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17/04/1969“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”18/05/1969“रूहानी ज्ञान-योग के ज्योतिषी”26/05/1969“सम्पूर्ण स्नेही की परख”16/06/1969“बड़े-से-बड़ा त्याग - अवगुणों का त्याग”18/06/1969“मरजीवा वह है जो पुराने शूद्रपन के संस्कारों को टच भी न करे”19/07/1969“ज़ीरो और हीरो बनो”18/09/1969“त्रिनेत्री, त्रिकालदर्शी और त्रिलोकीनाथ बनने की युक्तियां”28/09/1969“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”03/10/1969“सम्पूर्ण समर्पण की निशानियां”16/10/1969“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”20/10/1969“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”25/10/1969“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”09/11/1969“भविष्य को जानने की युक्तियां”13/11/1969“बापदादा की उम्मीदें - क्वान्टिटी के बजाए क्वालिटी वाले बनो और बनाओ”28/11/1969“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”20/12/1969“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”25/12/1969“अनासक्त बनने के लिए तन और मन को अमानत समझो”22/01/1970“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”26/01/1970“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”02/02/1970“आत्मिक पावर की परख”05/03/1970“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”23/03/1970“सच्ची होली मनाना अर्थात् बीती को बीती करना”26/03/1970“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”05/04/1970“सर्व प्वॉइन्ट का सार प्वाइंट (बिन्दी) बनो”14/05/1970“समर्पण का गुह्य अर्थ”28/05/1970“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”29/05/1970“समीप रत्नों की निशानियां”07/06/1970“दिव्य मूर्त बनने की विधि”11/06/1970“विश्वपति बनने की सामग्री”19/06/1970“त्रिमूर्ति लाइट्स का साक्षात्कार”25/06/1970“व्यक्त और अव्यक्त वतन की भाषा में अन्तर”26/06/1970“कामधेनु का अर्थ”27/07/1970“अव्यक्त बनने के लिए मुख्य शक्तियों की धारणा”30/07/1970“महारथी अर्थात् महानता”06/08/1970“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”22/10/1970“फुल की निशानी - फ्लोलेस”23/10/1970“महारथी बनने का पुरुषार्थ”05/11/1970“डिले इज़ डेन्जर”18/01/1971“अव्यक्त स्थिति द्वारा सेवा”21/01/1971“अब नहीं तो कब नहीं”22/01/1971“दिलतख्त नशीन आत्मा की निशानी”01/02/1971“ताज, तिलक और तख्तनशीन बनने की विधि”01/03/1971“सिद्धि स्वरूप बनने की सहज विधि”05/03/1971“भट्ठी की अलौकिक छाप”13/03/1971“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानियाँ”18/03/1971“विजयी बनने के लिए संग्रह और संग्राम की शक्ति आवश्यक”06/05/1971“बापदादा का विशेष श्रृंगार - ‘नूरे-रत्न'”24/05/1971“पोज़ीशन में ठहरने से अपोज़ीशन समाप्त”22/06/1971“तीव्र पुरुषार्थी की निशानियाँ”24/06/1971“अन्तर्मुखी बनने से फायदे”29/06/1971“नालेज की लाइट से पुरुषार्थ का मार्ग स्पष्ट”11/07/1971“विश्व-कल्याणकारी बनने के लिए मुख्य धारणाएं”18/07/1971“विल पावर और कन्ट्रोलिंग पावर”19/07/1971“सिम्पल बनो, सैम्पल बनो”01/08/1971“स्वयं की स्टेज़ को सेट करने की विधि”20/08/1971“सबसे श्रेष्ठ तख्त और ताज”27/09/1971“स्नेह की शक्ति द्वारा सत्यता की प्रत्यक्षता”12/03/1972“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”02/04/1972“महिमा योग्य कैसे बनें?”27/04/1972“लकी और लवली बनने का पुरुषार्थ”03/05/1972“‘लॉ मेकर' बनो, ‘लॉ ब्रेकर' नहीं”09/05/1972“अपने फीचर से फ्यूचर दिखाओ”10/05/1972“स्वमान में रहने से फरमान की पालना”20/05/1972“सार-स्वरूप बनने से संकल्प और समय की बचत”31/05/1972“भविष्य में अष्ट देवता और भक्ति में इष्ट बनने का पुरुषार्थ”08/06/1972“सम्पूर्ण स्टेज की परख”10/06/1972“सूक्ष्म अभिमान और अनजानपन”12/06/1972“रिफाइन स्थिति की पहचान”14/06/1972“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”24/06/1972“एवररेडी बन अन्तिम समय का आह्वान करो”18/01/1973“समानता और समीपता”08/05/1973“सर्वोच्च स्वमान”16/05/1973“अन्तिम पुरुषार्थ”30/05/1973“संगमयुग - पुरुषोत्तम युग”06/06/1973“समानता और समीपता”13/06/1973“रूहानी योद्धा”08/07/1973“समय की पुकार”15/07/1973“लगाव और स्वभाव के बदलने से विश्व-परिवर्तन”23/09/1973“विश्व की आत्माओं को लाइट व माइट देने वाला ही विश्व-अधिकारी”28/04/1974“स्थूल के साथ-साथ सूक्ष्म साधनों से ईश्वरीय सेवा में सफलता”18/06/1974“लाइट हाउस और माइट हाउस बन, नई दुनिया के मेकर बनो”14/07/1974“बाप समान सफलता-मूर्त बनने का साधन - सर्व के प्रति शुभ भावना”27/12/1974“योगी भव और पवित्र भव द्वारा वरदानों की प्राप्ति”18/01/1975“साक्षात्कार मूर्त और फरिश्ता मूर्त बनने का निमन्‍त्रण”05/02/1975“पवित्रता - प्रत्यक्षता की पूर्वगामिनी है और पर्सनैलिटी की जननी”20/09/1975“शक्ति होते हुए भी जीवन में सफलता और सन्तुष्टता क्यों नहीं?”03/10/1975“विशाल रूप से सेवा करने के लिए विशाल बुद्धि बनो”15/10/1975“आत्मघाती महापापी न बनकर डबल अहिंसक बनने की युक्तियाँ”26/10/1975“विकारी देह रूपी साँप से सारी कमाई खत्म”31/10/1975“महारथी बच्चों की मुख्य विशेषतायें”27/01/1976“तीन श्रेष्ठ ईश्वरीय वरदान”28/01/1976“रूहानी सितारों की महफिल”07/02/1976“अव्यक्त फरिश्तों की सभा”08/02/1976“कनेक्शन और करेक्शन के बैलेन्स से कमाल”05/01/1977“त्यागी और तपस्वी बच्चे सदा पास हैं”16/01/1977“सन्तुष्ट आत्मा ही अनेक आत्माओं का इष्ट बन सकती है”23/01/1977“महीनता ही महानता है”09/05/1977“सम्पूर्ण पवित्रता ही विशेष पार्ट बजाने वालों का श्रृंगार है”11/05/1977“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”14/05/1977“स्वमान और फ़रमान”16/05/1977“माया के वार का सामना करने के लिए दो शक्तियों की आवश्यकता”19/05/1977“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”21/05/1977“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”27/05/1977“पॉवरफुल स्टेज अर्थात् बाप समान बीजरूप स्थिति”31/05/1977“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”02/06/1977“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”10/06/1977“मन्‍त्र और यन्‍त्र के निरन्तर प्रयोग से अन्तर समाप्त”16/06/1977“एक ही पढ़ाई द्वारा नम्बरवार पूज्य पद पाने का गुह्य रहस्य”20/06/1977“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”25/06/1977“पवित्रता की सम्पूर्ण स्टेज”28/06/1977“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”07/12/1978“बाप समान सम्पूर्ण बनने के चिन्ह”02/01/1979“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”06/01/1979“सूर्यवंशी और चन्द्रवंशी आत्माओं के प्रैक्टिकल जीवन की धारणाओं के चिन्ह”10/01/1979“अब वेस्ट और वेट को समाप्त करो”23/01/1979“सदा सुहागिन ही सदा सम्पन्न है”30/01/1979“सर्व बन्धनों से मुक्ति की युक्ति”03/02/1979“सर्व पर रहम करो, ‘वहम' और ‘अहम' भाव को मिटाओ”05/02/1979“मधुबन निवासियों के साथ बापदादा की रूहरिहान''14/11/1979“ब्राह्मण जीवन की निशानी है - सदा खुशी की झलक”21/11/1979“विश्व परिवर्तन के लिए सर्व की एक ही वृत्ति का होना आवश्यक”03/12/1979“विश्व-कल्याणकारी ही विश्व का मालिक बन सकता है”05/12/1979“विजय का झण्डा लहराने के लिए रियलाइजेशन कोर्स शुरू करो”14/01/1980“रूहानी सेनानियों से रूहानी कमाण्डर की मुलाकात”16/01/1980“ऑलमाइटी अथॉरिटी राजयोगी सभा व लोक पसन्द सभा”25/01/1980“बिन्दु रूप परमात्मा का बिन्दु रूप आत्मा से मिलन”01/02/1980“सूक्ष्मवतन की कारोबार”11/03/1981“सफलता के दो मुख्य आधार”17/03/1981“इस सहज मार्ग में मुश्किल का कारण और निवारण”18/03/1981“मुश्किल को सहज करने की युक्ति ‘सदा बाप को देखो’”23/03/1981“फर्स्ट या एयरकण्डीशन में जाने का सहज साधन”27/03/1981“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”29/03/1981“ज्ञान का सार ‘मैं और मेरा बाबा’”03/04/1981“ज्ञान मार्ग की यादगार भक्ति मार्ग”05/04/1981“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”14/10/1981“सर्व खजानों की चाबी एक शब्द - ‘बाबा’”01/11/1981“सेवा के सफलता की कुन्जी”11/11/1981“बिन्दु का महत्व”18/11/1981“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”14/01/1982“कर्मेन्द्रिय जीत ही विश्व राज्य अधिकारी”16/01/1982“‘मेरा बाबा आ गया’ - यह आवाज बुलन्द करने के लिए चारों ओर फरिश्ते रूप में छा जाओ”14/03/1982“बापदादा द्वारा देश-विदेश का समाचार”22/03/1982“राज्य-सत्ता और धर्म-सत्ता के अधिकारी बच्चों से बापदादा की मुलाकात”06/04/1982“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”13/04/1982“त्यागी, महात्यागी की व्याख्या”15/02/1983“विश्व शान्ति का आधार - रियलाइजेशन”07/04/1983“नष्टोमोहा बन प्रभु प्यार के पात्र बनो”13/04/1983“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”14/04/1983“सम्पन्न आत्मा सदा स्वयं और सेवा से सन्तुष्ट”30/04/1983“परम पूज्य बनने का आधार”27/12/1983“भिखारी नहीं सदा के अधिकारी बनो”18/02/1984“ब्राह्मण जीवन - अमूल्य जीवन”24/02/1984“ब्राह्मण जन्म - अवतरित जन्म”09/01/1985“श्रेष्ठ भाग्यवान आत्माओं की रूहानी पर्सनैलिटी”15/03/1985“मेहनत से छूटने का सहज साधन - निराकारी स्वरूप की स्थिति”18/01/1986“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”29/03/1986“शक्तिशाली रचना श्रेष्ठ संकल्प की रचना”31/03/1986“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”18/01/1987“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”20/02/1987“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”02/11/1987“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”31/12/1987“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”11/11/1989“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”15/11/1989“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”05/12/1989“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”13/12/1989“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”29/12/1989“पढ़ाई का सार - ‘आना और जाना’”10/01/1990“होलीहँस की विशेषतायें”14/01/1990“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”22/02/1990“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”01/03/1990“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”07/03/1990“रूलिंग तथा कन्ट्रोलिंग पॉवर से स्वराज्य की प्राप्ति”13/03/1990“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”15/04/1992“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”20/12/1992“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”25/11/1993“सहज सिद्धि प्राप्त करने के लिए ज्ञान स्वरूप प्रयोगी आत्मा बनो”02/12/1993“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”09/12/1993“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”25/01/1994“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”09/03/1994“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”07/03/1995“ब्राह्मण अर्थात् धर्म सत्ता और स्वराज्य सत्ता की अधिकारी आत्मा”07/11/1995“बापदादा की विशेष पसन्दगी और ज्ञान का फाउण्डेशन - पवित्रता”25/11/1995“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”13/12/1995“व्यर्थ बोल, डिस्टर्ब करने वाले बोल से स्वयं को मुक्त कर बोल की एकॉनॉमी करो”22/12/1995“सर्व प्राप्ति सम्पन्न जीवन की विशेषता है - अप्रसन्नता मुक्त और प्रसन्नता युक्त”31/12/1995“डायमण्ड वर्ष में फरिश्ता बनकर बापदादा की छत्रछाया और प्यार की अनुभूति करो”09/01/1996“बालक सो मालिकपन के नशे में रहने के लिए मन का राजा बनो”18/01/1996“सदा समर्थ रहने की सहज विधि - शुभचिंतन करो और शुभचिंतक बनो”16/02/1996“डायमण्ड जुबली वर्ष में विशेष अटेन्शन देकर समय और संकल्प के खजाने को जमा करो”23/02/1997“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”31/12/1998“इस नये वर्ष में हिम्मत के आधार पर स्वयं को मेहनत मुक्त सदा विजयी अनुभव करो”13/02/1999“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”15/11/1999“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”31/12/1999“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”18/01/2000“ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा का वायब्रेशन विश्व में फैलाओ”03/03/2000“जन्म दिन की विशेष गिफ्ट - शुभ भाव और प्रेम भाव को इमर्ज कर क्रोध महाशत्रु पर विजयी बनो”11/11/2000“सम्पूर्णता की समीपता द्वारा प्रत्यक्षता के श्रेष्ठ समय को समीप लाओ”25/11/2000“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”

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