Command Palette
Search for a command to run...
Loading topic
Brahma Kumaris
Murli
Home
Murli Search
Murli Topics
Murli Chintan
AI Murli Chintan (ChatGPT)
Languages
E
English
ह
हिंदी
ગ
ગુજરાતી
త
తెలుగు
Library
Overview
Favorites
Notes & Highlights
Collections
Tracker
Settings
BKOne
Toggle Sidebar
Brahma Kumaris
Murli
Home
Library
Settings
BKOne
Search
K
Toggle theme
Home
Search
BKOne
Library
Settings
दो बाते - Two thing - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
Home
Topics
दो बाते - Two thing
दो बाते - Two thing
232 unique murli dates in this topic
English
हिंदी
ગુજરાતી
తెలుగు
200 murlis in हिंदी
17/04/1969
“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”
18/05/1969
“रूहानी ज्ञान-योग के ज्योतिषी”
26/05/1969
“सम्पूर्ण स्नेही की परख”
16/06/1969
“बड़े-से-बड़ा त्याग - अवगुणों का त्याग”
18/06/1969
“मरजीवा वह है जो पुराने शूद्रपन के संस्कारों को टच भी न करे”
19/07/1969
“ज़ीरो और हीरो बनो”
18/09/1969
“त्रिनेत्री, त्रिकालदर्शी और त्रिलोकीनाथ बनने की युक्तियां”
28/09/1969
“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”
03/10/1969
“सम्पूर्ण समर्पण की निशानियां”
16/10/1969
“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”
20/10/1969
“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”
25/10/1969
“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”
09/11/1969
“भविष्य को जानने की युक्तियां”
13/11/1969
“बापदादा की उम्मीदें - क्वान्टिटी के बजाए क्वालिटी वाले बनो और बनाओ”
28/11/1969
“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”
20/12/1969
“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”
25/12/1969
“अनासक्त बनने के लिए तन और मन को अमानत समझो”
22/01/1970
“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
02/02/1970
“आत्मिक पावर की परख”
05/03/1970
“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”
23/03/1970
“सच्ची होली मनाना अर्थात् बीती को बीती करना”
26/03/1970
“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”
05/04/1970
“सर्व प्वॉइन्ट का सार प्वाइंट (बिन्दी) बनो”
14/05/1970
“समर्पण का गुह्य अर्थ”
28/05/1970
“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”
29/05/1970
“समीप रत्नों की निशानियां”
07/06/1970
“दिव्य मूर्त बनने की विधि”
11/06/1970
“विश्वपति बनने की सामग्री”
19/06/1970
“त्रिमूर्ति लाइट्स का साक्षात्कार”
25/06/1970
“व्यक्त और अव्यक्त वतन की भाषा में अन्तर”
26/06/1970
“कामधेनु का अर्थ”
27/07/1970
“अव्यक्त बनने के लिए मुख्य शक्तियों की धारणा”
30/07/1970
“महारथी अर्थात् महानता”
06/08/1970
“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”
22/10/1970
“फुल की निशानी - फ्लोलेस”
23/10/1970
“महारथी बनने का पुरुषार्थ”
05/11/1970
“डिले इज़ डेन्जर”
18/01/1971
“अव्यक्त स्थिति द्वारा सेवा”
21/01/1971
“अब नहीं तो कब नहीं”
22/01/1971
“दिलतख्त नशीन आत्मा की निशानी”
01/02/1971
“ताज, तिलक और तख्तनशीन बनने की विधि”
01/03/1971
“सिद्धि स्वरूप बनने की सहज विधि”
05/03/1971
“भट्ठी की अलौकिक छाप”
13/03/1971
“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानियाँ”
18/03/1971
“विजयी बनने के लिए संग्रह और संग्राम की शक्ति आवश्यक”
06/05/1971
“बापदादा का विशेष श्रृंगार - ‘नूरे-रत्न'”
24/05/1971
“पोज़ीशन में ठहरने से अपोज़ीशन समाप्त”
22/06/1971
“तीव्र पुरुषार्थी की निशानियाँ”
24/06/1971
“अन्तर्मुखी बनने से फायदे”
29/06/1971
“नालेज की लाइट से पुरुषार्थ का मार्ग स्पष्ट”
11/07/1971
“विश्व-कल्याणकारी बनने के लिए मुख्य धारणाएं”
18/07/1971
“विल पावर और कन्ट्रोलिंग पावर”
19/07/1971
“सिम्पल बनो, सैम्पल बनो”
01/08/1971
“स्वयं की स्टेज़ को सेट करने की विधि”
20/08/1971
“सबसे श्रेष्ठ तख्त और ताज”
27/09/1971
“स्नेह की शक्ति द्वारा सत्यता की प्रत्यक्षता”
12/03/1972
“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”
02/04/1972
“महिमा योग्य कैसे बनें?”
27/04/1972
“लकी और लवली बनने का पुरुषार्थ”
03/05/1972
“‘लॉ मेकर' बनो, ‘लॉ ब्रेकर' नहीं”
09/05/1972
“अपने फीचर से फ्यूचर दिखाओ”
10/05/1972
“स्वमान में रहने से फरमान की पालना”
20/05/1972
“सार-स्वरूप बनने से संकल्प और समय की बचत”
31/05/1972
“भविष्य में अष्ट देवता और भक्ति में इष्ट बनने का पुरुषार्थ”
08/06/1972
“सम्पूर्ण स्टेज की परख”
10/06/1972
“सूक्ष्म अभिमान और अनजानपन”
12/06/1972
“रिफाइन स्थिति की पहचान”
14/06/1972
“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”
24/06/1972
“एवररेडी बन अन्तिम समय का आह्वान करो”
18/01/1973
“समानता और समीपता”
08/05/1973
“सर्वोच्च स्वमान”
16/05/1973
“अन्तिम पुरुषार्थ”
30/05/1973
“संगमयुग - पुरुषोत्तम युग”
06/06/1973
“समानता और समीपता”
13/06/1973
“रूहानी योद्धा”
08/07/1973
“समय की पुकार”
15/07/1973
“लगाव और स्वभाव के बदलने से विश्व-परिवर्तन”
23/09/1973
“विश्व की आत्माओं को लाइट व माइट देने वाला ही विश्व-अधिकारी”
28/04/1974
“स्थूल के साथ-साथ सूक्ष्म साधनों से ईश्वरीय सेवा में सफलता”
18/06/1974
“लाइट हाउस और माइट हाउस बन, नई दुनिया के मेकर बनो”
14/07/1974
“बाप समान सफलता-मूर्त बनने का साधन - सर्व के प्रति शुभ भावना”
27/12/1974
“योगी भव और पवित्र भव द्वारा वरदानों की प्राप्ति”
18/01/1975
“साक्षात्कार मूर्त और फरिश्ता मूर्त बनने का निमन्त्रण”
05/02/1975
“पवित्रता - प्रत्यक्षता की पूर्वगामिनी है और पर्सनैलिटी की जननी”
20/09/1975
“शक्ति होते हुए भी जीवन में सफलता और सन्तुष्टता क्यों नहीं?”
03/10/1975
“विशाल रूप से सेवा करने के लिए विशाल बुद्धि बनो”
15/10/1975
“आत्मघाती महापापी न बनकर डबल अहिंसक बनने की युक्तियाँ”
26/10/1975
“विकारी देह रूपी साँप से सारी कमाई खत्म”
31/10/1975
“महारथी बच्चों की मुख्य विशेषतायें”
27/01/1976
“तीन श्रेष्ठ ईश्वरीय वरदान”
28/01/1976
“रूहानी सितारों की महफिल”
07/02/1976
“अव्यक्त फरिश्तों की सभा”
08/02/1976
“कनेक्शन और करेक्शन के बैलेन्स से कमाल”
05/01/1977
“त्यागी और तपस्वी बच्चे सदा पास हैं”
16/01/1977
“सन्तुष्ट आत्मा ही अनेक आत्माओं का इष्ट बन सकती है”
23/01/1977
“महीनता ही महानता है”
09/05/1977
“सम्पूर्ण पवित्रता ही विशेष पार्ट बजाने वालों का श्रृंगार है”
11/05/1977
“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”
14/05/1977
“स्वमान और फ़रमान”
16/05/1977
“माया के वार का सामना करने के लिए दो शक्तियों की आवश्यकता”
19/05/1977
“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”
21/05/1977
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”
27/05/1977
“पॉवरफुल स्टेज अर्थात् बाप समान बीजरूप स्थिति”
31/05/1977
“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”
02/06/1977
“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”
10/06/1977
“मन्त्र और यन्त्र के निरन्तर प्रयोग से अन्तर समाप्त”
16/06/1977
“एक ही पढ़ाई द्वारा नम्बरवार पूज्य पद पाने का गुह्य रहस्य”
20/06/1977
“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”
25/06/1977
“पवित्रता की सम्पूर्ण स्टेज”
28/06/1977
“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”
07/12/1978
“बाप समान सम्पूर्ण बनने के चिन्ह”
02/01/1979
“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”
06/01/1979
“सूर्यवंशी और चन्द्रवंशी आत्माओं के प्रैक्टिकल जीवन की धारणाओं के चिन्ह”
10/01/1979
“अब वेस्ट और वेट को समाप्त करो”
23/01/1979
“सदा सुहागिन ही सदा सम्पन्न है”
30/01/1979
“सर्व बन्धनों से मुक्ति की युक्ति”
03/02/1979
“सर्व पर रहम करो, ‘वहम' और ‘अहम' भाव को मिटाओ”
05/02/1979
“मधुबन निवासियों के साथ बापदादा की रूहरिहान''
14/11/1979
“ब्राह्मण जीवन की निशानी है - सदा खुशी की झलक”
21/11/1979
“विश्व परिवर्तन के लिए सर्व की एक ही वृत्ति का होना आवश्यक”
03/12/1979
“विश्व-कल्याणकारी ही विश्व का मालिक बन सकता है”
05/12/1979
“विजय का झण्डा लहराने के लिए रियलाइजेशन कोर्स शुरू करो”
14/01/1980
“रूहानी सेनानियों से रूहानी कमाण्डर की मुलाकात”
16/01/1980
“ऑलमाइटी अथॉरिटी राजयोगी सभा व लोक पसन्द सभा”
25/01/1980
“बिन्दु रूप परमात्मा का बिन्दु रूप आत्मा से मिलन”
01/02/1980
“सूक्ष्मवतन की कारोबार”
11/03/1981
“सफलता के दो मुख्य आधार”
17/03/1981
“इस सहज मार्ग में मुश्किल का कारण और निवारण”
18/03/1981
“मुश्किल को सहज करने की युक्ति ‘सदा बाप को देखो’”
23/03/1981
“फर्स्ट या एयरकण्डीशन में जाने का सहज साधन”
27/03/1981
“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”
29/03/1981
“ज्ञान का सार ‘मैं और मेरा बाबा’”
03/04/1981
“ज्ञान मार्ग की यादगार भक्ति मार्ग”
05/04/1981
“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”
14/10/1981
“सर्व खजानों की चाबी एक शब्द - ‘बाबा’”
01/11/1981
“सेवा के सफलता की कुन्जी”
11/11/1981
“बिन्दु का महत्व”
18/11/1981
“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”
14/01/1982
“कर्मेन्द्रिय जीत ही विश्व राज्य अधिकारी”
16/01/1982
“‘मेरा बाबा आ गया’ - यह आवाज बुलन्द करने के लिए चारों ओर फरिश्ते रूप में छा जाओ”
14/03/1982
“बापदादा द्वारा देश-विदेश का समाचार”
22/03/1982
“राज्य-सत्ता और धर्म-सत्ता के अधिकारी बच्चों से बापदादा की मुलाकात”
06/04/1982
“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”
13/04/1982
“त्यागी, महात्यागी की व्याख्या”
15/02/1983
“विश्व शान्ति का आधार - रियलाइजेशन”
07/04/1983
“नष्टोमोहा बन प्रभु प्यार के पात्र बनो”
13/04/1983
“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”
14/04/1983
“सम्पन्न आत्मा सदा स्वयं और सेवा से सन्तुष्ट”
30/04/1983
“परम पूज्य बनने का आधार”
27/12/1983
“भिखारी नहीं सदा के अधिकारी बनो”
18/02/1984
“ब्राह्मण जीवन - अमूल्य जीवन”
24/02/1984
“ब्राह्मण जन्म - अवतरित जन्म”
09/01/1985
“श्रेष्ठ भाग्यवान आत्माओं की रूहानी पर्सनैलिटी”
15/03/1985
“मेहनत से छूटने का सहज साधन - निराकारी स्वरूप की स्थिति”
18/01/1986
“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”
29/03/1986
“शक्तिशाली रचना श्रेष्ठ संकल्प की रचना”
31/03/1986
“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”
18/01/1987
“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”
20/02/1987
“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”
02/11/1987
“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”
31/12/1987
“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”
11/11/1989
“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”
15/11/1989
“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”
05/12/1989
“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”
13/12/1989
“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”
29/12/1989
“पढ़ाई का सार - ‘आना और जाना’”
10/01/1990
“होलीहँस की विशेषतायें”
14/01/1990
“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”
22/02/1990
“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”
01/03/1990
“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”
07/03/1990
“रूलिंग तथा कन्ट्रोलिंग पॉवर से स्वराज्य की प्राप्ति”
13/03/1990
“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
20/12/1992
“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”
25/11/1993
“सहज सिद्धि प्राप्त करने के लिए ज्ञान स्वरूप प्रयोगी आत्मा बनो”
02/12/1993
“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”
09/12/1993
“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
25/01/1994
“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”
09/03/1994
“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”
07/03/1995
“ब्राह्मण अर्थात् धर्म सत्ता और स्वराज्य सत्ता की अधिकारी आत्मा”
07/11/1995
“बापदादा की विशेष पसन्दगी और ज्ञान का फाउण्डेशन - पवित्रता”
25/11/1995
“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”
13/12/1995
“व्यर्थ बोल, डिस्टर्ब करने वाले बोल से स्वयं को मुक्त कर बोल की एकॉनॉमी करो”
22/12/1995
“सर्व प्राप्ति सम्पन्न जीवन की विशेषता है - अप्रसन्नता मुक्त और प्रसन्नता युक्त”
31/12/1995
“डायमण्ड वर्ष में फरिश्ता बनकर बापदादा की छत्रछाया और प्यार की अनुभूति करो”
09/01/1996
“बालक सो मालिकपन के नशे में रहने के लिए मन का राजा बनो”
18/01/1996
“सदा समर्थ रहने की सहज विधि - शुभचिंतन करो और शुभचिंतक बनो”
16/02/1996
“डायमण्ड जुबली वर्ष में विशेष अटेन्शन देकर समय और संकल्प के खजाने को जमा करो”
23/02/1997
“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”
31/12/1998
“इस नये वर्ष में हिम्मत के आधार पर स्वयं को मेहनत मुक्त सदा विजयी अनुभव करो”
13/02/1999
“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”
15/11/1999
“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”
31/12/1999
“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”
18/01/2000
“ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा का वायब्रेशन विश्व में फैलाओ”
03/03/2000
“जन्म दिन की विशेष गिफ्ट - शुभ भाव और प्रेम भाव को इमर्ज कर क्रोध महाशत्रु पर विजयी बनो”
11/11/2000
“सम्पूर्णता की समीपता द्वारा प्रत्यक्षता के श्रेष्ठ समय को समीप लाओ”
25/11/2000
“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”