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बुद्धि (दिव्य बुद्धि ) - Divine Intellect - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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बुद्धि (दिव्य बुद्धि ) - Divine Intellect
बुद्धि (दिव्य बुद्धि ) - Divine Intellect
77 unique murli dates in this topic
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75 murlis in हिंदी
02/02/1969
“अव्यक्त मिलन के अनुभव की विधि”
23/07/1969
“सफलता का आधार - परखने की शक्ति”
27/08/1969
“मदद लेने का साधन है - हिम्मत”
16/10/1969
“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”
20/10/1969
“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”
09/11/1969
“भविष्य को जानने की युक्तियां”
13/11/1969
“बापदादा की उम्मीदें - क्वान्टिटी के बजाए क्वालिटी वाले बनो और बनाओ”
20/12/1969
“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”
22/01/1970
“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”
23/01/1970
“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
26/03/1970
“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”
28/05/1970
“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”
18/06/1970
“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”
25/06/1970
“व्यक्त और अव्यक्त वतन की भाषा में अन्तर”
29/06/1970
“समर्पण का विशाल रूप”
24/07/1970
“बिन्दु रूप की स्थिति सहज कैसे बने?”
01/11/1970
“बाप समान बनने की युक्तियां”
30/11/1970
“वर्कर्स की वन्डरफुल सर्कस”
21/01/1971
“अब नहीं तो कब नहीं”
08/06/1971
“जीवन के लिए तीन चीजों की आवश्यकता - खुराक, खुशी और खज़ाना”
10/06/1971
“सेवा की धरनी तैयार करने का साधन - सर्चलाइट”
24/06/1971
“अन्तर्मुखी बनने से फायदे”
29/06/1971
“नालेज की लाइट से पुरुषार्थ का मार्ग स्पष्ट”
04/07/1971
“याद की सहज विधि”
27/07/1971
“बुद्धि रूपी नेत्र क्लीयर और पावरफुल बनाओ”
02/02/1972
“प्रीत बुद्धि की निशानियाँ”
20/05/1972
“सार-स्वरूप बनने से संकल्प और समय की बचत”
08/06/1972
“सम्पूर्ण स्टेज की परख”
12/11/1972
“अलौकिक कर्म करने की कला”
21/07/1973
“रूहानी जज़ और जिस्मानी जज़”
18/07/1974
“सम्पूर्ण पवित्र वृत्ति और दृष्टि से श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”
19/09/1975
“शक्तियों एवं पाण्डवों की विशेषतायें”
11/10/1975
“अन्त:वाहक अर्थात् अव्यक्त फरिश्ते रूप द्वारा सैर”
16/10/1975
“संकल्प शक्ति को कन्ट्रोल कर सिद्धि-स्वरूप बनने की युक्तियाँ”
23/01/1977
“महीनता ही महानता है”
02/02/1977
“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”
05/05/1977
“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”
21/05/1977
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”
29/05/1977
“पुरुषार्थ की रफ्तार में रुकावट का कारण और उसका निवारण”
14/06/1977
“देश और विदेश का सैर-समाचार”
25/06/1977
“पवित्रता की सम्पूर्ण स्टेज”
08/01/1979
“संगमयुग पर समानता में समीप और भविष्य के सम्बन्ध में समीप”
01/02/1979
“मनन-शक्ति ही माया जीत बनने का साधन”
17/12/1979
“होली हंस और अमृतवेला रूपी मानसरोवर”
04/01/1980
“वर्तमान राज्य-अधिकारी ही भविष्य राज्य-अधिकारी”
07/03/1982
“संकल्प की गति धैर्यवत होने से लाभ”
14/03/1982
“बापदादा द्वारा देश-विदेश का समाचार”
29/03/1982
“सच्चे वैष्णव अर्थात् सदा गुण ग्राहक”
04/05/1983
“सदा एक मत, एक ही रास्ते से एकरस स्थिति”
05/03/1984
“शान्ति की शक्ति का महत्व”
21/01/1985
“ईश्वरीय जन्म दिन की गोल्डन गिफ्ट - ‘दिव्य बुद्धि’”
18/01/1986
“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”
01/03/1986
“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”
27/11/1987
“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”
27/12/1987
“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”
26/01/1988
“संगमयुग पर नम्बरवन पूज्य बनने की अलौकिक विधि”
03/02/1988
“ब्रह्मा मात-पिता की अपने ब्राह्मण बच्चों के प्रति दो शुभ आशाएं”
12/03/1988
“तीन प्रकार का स्नेह तथा दिल के स्नेही बच्चों की विशेषतायें”
10/01/1990
“होलीहँस की विशेषतायें”
01/03/1990
“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”
08/04/1992
“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
01/02/1994
“त्रिकालदर्शी स्थिति के श्रेष्ठ आसन द्वारा सदा विजयी बनो और दूसरों को शक्ति का सहयोग दो”
09/01/1996
“बालक सो मालिकपन के नशे में रहने के लिए मन का राजा बनो”
13/02/1999
“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”
15/02/2000
“मन को स्वच्छ, बुद्धि को क्लीयर रख डबल लाइट फरिश्ते स्थिति का अनुभव करो”
04/11/2001
“सत्यवादी बनो और समय प्रमाण रहमदिल बन बेहद की वृत्ति, दृष्टि और कृति बनाने के दृढ़ संकल्प का दीप जलाओ''
28/03/2006
“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”
31/10/2006
“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''
15/10/2007
“संगमयुग की जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए सब बोझ वा बंधन बाप को देकर डबल लाइट बनो”
31/10/2007
“अपने श्रेष्ठ स्वमान के फ़खुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो”
18/02/2008
“विश्व परिवर्तन के लिए शान्ति की शक्ति का प्रयोग करो”
05/03/2008
“संगम की बैंक में साइलेन्स की शक्ति और श्रेष्ठ कर्म जमा करो, शिवमंत्र से मैं-पन का परिवर्तन करो”