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चेक करो - Check - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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चेक करो - Check
चेक करो - Check
289 unique murli dates in this topic
English
हिंदी
ગુજરાતી
తెలుగు
200 murlis in हिंदी
17/04/1969
“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”
17/05/1969
“जादू मंत्र का दर्पण”
23/07/1969
“सफलता का आधार - परखने की शक्ति”
28/09/1969
“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”
25/10/1969
“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”
17/11/1969
“फर्श से अर्श पर जाने की युक्तियाँ”
06/12/1969
“सरल स्वभाव से बुद्धि को विशाल और दूरांदेशी बनाओ”
20/12/1969
“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
05/03/1970
“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”
23/03/1970
“सच्ची होली मनाना अर्थात् बीती को बीती करना”
26/03/1970
“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”
02/04/1970
“सम्पूर्ण स्टेज की निशानियां”
05/04/1970
“सर्व प्वॉइन्ट का सार प्वाइंट (बिन्दी) बनो”
18/06/1970
“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”
25/06/1970
“व्यक्त और अव्यक्त वतन की भाषा में अन्तर”
11/07/1970
“संगमयुग की डिग्री और भविष्य की प्रालब्ध”
06/08/1970
“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”
30/11/1970
“वर्कर्स की वन्डरफुल सर्कस”
05/12/1970
“प्रतिज्ञा करने वालों को माया की चैलेंज”
18/01/1971
“अव्यक्त स्थिति द्वारा सेवा”
26/01/1971
“ज़िम्मेवारी उठाने से फायदे”
24/06/1971
“अन्तर्मुखी बनने से फायदे”
25/06/1971
“सेवा और तपस्या की समानता”
29/06/1971
“नालेज की लाइट से पुरुषार्थ का मार्ग स्पष्ट”
11/07/1971
“विश्व-कल्याणकारी बनने के लिए मुख्य धारणाएं”
28/07/1971
“आकार में निराकार को देखने का अभ्यास”
15/09/1971
“मास्टर ज्ञान सूर्य आत्माओं का कर्तव्य”
05/10/1971
“सम्पूर्णता की निशानी 16 कलायें”
21/01/1972
“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”
03/02/1972
“स्वयं को जानने से संयम और समय की पहचान”
04/03/1972
“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”
15/03/1972
“त्याग और भाग्य”
02/04/1972
“महिमा योग्य कैसे बनें?”
27/04/1972
“लकी और लवली बनने का पुरुषार्थ”
03/05/1972
“‘लॉ मेकर' बनो, ‘लॉ ब्रेकर' नहीं”
10/05/1972
“स्वमान में रहने से फरमान की पालना”
15/05/1972
“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”
20/05/1972
“सार-स्वरूप बनने से संकल्प और समय की बचत”
24/05/1972
“परिवर्तन का आधार - दृढ़ संकल्प”
14/06/1972
“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”
21/06/1972
“विश्व-महाराजन बनने वालों की विश्व-कल्याणकारी स्टेज”
24/06/1972
“एवररेडी बन अन्तिम समय का आह्वान करो”
04/08/1972
“सर्विसएबुल, सेंसीबुल और इसेंसफुल की निशानियां”
06/08/1972
“वृत्ति चंचल होने का कारण - व्रत में हल्कापन”
12/11/1972
“अलौकिक कर्म करने की कला”
22/11/1972
“अन्तिम सर्विस का अन्तिम स्वरूप”
04/12/1972
“महावीर आत्माओं की रूहानी ड्रिल”
11/04/1973
“परिवर्तन”
13/04/1973
“भक्त और भावना का फल”
08/05/1973
“सर्वोच्च स्वमान”
25/05/1973
“भविष्य प्लान”
30/05/1973
“संगमयुग - पुरुषोत्तम युग”
01/06/1973
“सर्व शक्तियों का स्टॉक”
13/06/1973
“रूहानी योद्धा”
23/06/1973
“अलौकिक खजाने के मालिक”
08/07/1973
“समय की पुकार”
02/08/1973
“यथार्थ विधि से सिद्धि की प्राप्ति”
10/01/1977
“जैसा लक्ष्य वैसा लक्षण”
28/01/1977
“ब्राह्मणों का धर्म और कर्म”
16/04/1977
“ब्राह्मण जन्म की दिव्यता और अलौकिकता”
23/04/1977
“बाप द्वारा प्राप्त सर्व खज़ानों को बढ़ाने का आधार है - महादानी बनना”
28/04/1977
“सदा सुहागिन की निशानियाँ”
09/05/1977
“सम्पूर्ण पवित्रता ही विशेष पार्ट बजाने वालों का श्रृंगार है”
11/05/1977
“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”
19/05/1977
“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”
29/05/1977
“पुरुषार्थ की रफ्तार में रुकावट का कारण और उसका निवारण”
07/06/1977
“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”
12/06/1977
“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”
14/06/1977
“देश और विदेश का सैर-समाचार”
25/06/1977
“पवित्रता की सम्पूर्ण स्टेज”
16/02/1978
“माया और प्रकृति द्वारा सत्कार प्राप्त आत्मा ही सर्वश्रेष्ठ आत्मा है”
01/04/1978
“निरन्तर योगी ही निरन्तर साथी है”
02/01/1979
“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”
06/01/1979
“सूर्यवंशी और चन्द्रवंशी आत्माओं के प्रैक्टिकल जीवन की धारणाओं के चिन्ह”
12/01/1979
“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”
14/01/1979
“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”
16/01/1979
“तिलक, ताज और तख्तधारी बनने की युक्तियाँ”
12/11/1979
“अमृतवेले के वरदानी समय में पुकार सुनो और उपकार करो”
19/11/1979
“बेहद के वानप्रस्थी अर्थात् निरन्तर एकान्त में सदा स्मृति स्वरूप”
05/12/1979
“विजय का झण्डा लहराने के लिए रियलाइजेशन कोर्स शुरू करो”
10/12/1979
“पुण्य आत्माओं के लक्षण”
19/12/1979
“सहज याद का साधन - स्वयं को खुदाई खिदमतगार समझो”
28/12/1979
“सिद्धि स्वरूप होने की विधि - एकाग्रता”
16/01/1980
“ऑलमाइटी अथॉरिटी राजयोगी सभा व लोक पसन्द सभा”
30/01/1980
“स्नेह, सहयोग और शक्ति स्वरूप के पेपर्स की चेकिंग और रिजल्ट”
04/02/1980
“भाग्य विधाता बाप और भाग्यशाली बच्चे”
09/02/1980
“मधुबन निवासियों की विशेषता”
25/03/1981
“महानता का आधार - संकल्प, बोल, कर्म की चेकिंग”
05/04/1981
“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”
07/04/1981
“मनन शक्ति द्वारा सर्वशक्तियों के स्वरूप की अनुभूति”
13/04/1981
“रूहे-गुलाब की विशेषता”
06/11/1981
“विशेष युग का विशेष फल”
21/11/1981
“छोड़ो तो छूटो”
26/11/1981
“सहयोगी ही सहजयोगी”
02/01/1982
“विश्व-परिवर्तन की जिम्मेवारी - संगमयुगी ब्राह्मणों पर”
04/01/1982
“सतगुरु का प्रथम वरदान - मनमनाभव”
17/03/1982
“संगमयुग का विशेष वरदान - ‘अमर भव’”
24/03/1982
“ब्राह्मण जीवन की विशेषता है - पवित्रता”
03/04/1982
“सर्वप्रथम त्याग है - देह-भान का त्याग”
08/04/1982
“लौकिक, अलौकिक सम्बन्ध का त्याग”
11/04/1982
“व्यर्थ का त्याग कर समर्थ बनो”
16/04/1982
“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”
26/01/1983
“दाता के बच्चे बन सर्व को सहयोग दो”
03/04/1983
“प्रथम और अन्तिम पुरूषार्थ”
07/04/1983
“नष्टोमोहा बन प्रभु प्यार के पात्र बनो”
21/04/1983
“संगमयुगी मर्यादाओं पर चलना ही पुरूषोत्तम बनना है”
24/04/1983
“रूहानी पर्सनैलिटी”
04/05/1983
“सदा एक मत, एक ही रास्ते से एकरस स्थिति”
01/12/1983
“सुख, शान्ति और पवित्रता के तीन अधिकार”
07/12/1983
“श्रेष्ठ पद की प्राप्ति का आधार - ‘मुरली’”
29/12/1983
“संगमयुग - सहज प्राप्ति का युग”
31/12/1983
“श्रीमत रूपी हाथ सदा हाथ में है तो सारा युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे”
22/01/1984
“नामीग्रामी सेवाधारी बनने की विधि”
04/04/1984
“संगमयुग की श्रेष्ठ वेला, श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर बनाने की वेला”
19/04/1984
“भावुक आत्मा तथा ज्ञानी आत्मा के लक्षण”
24/04/1984
“वर्तमान ब्राह्मण जन्म - हीरे तुल्य”
26/04/1984
“रुहानी विचित्र मेले में सर्व खज़ानों की प्राप्ति”
07/05/1984
“बैलेन्स रखने से ही ब्लैसिंग की प्राप्ति”
19/11/1984
“बेहद की वैराग्य वृत्ति से सिद्धियों की प्राप्ति”
26/11/1984
“सच्चे सहयोगी ही सच्चे योगी”
03/12/1984
“सर्व समर्थ शिक्षक के श्रेष्ठ शिक्षाधारी बनो”
10/12/1984
“पुराने खाते की समाप्ति की निशानी”
17/12/1984
“व्यर्थ को समाप्त करने का साधन - समर्थ संकल्पों का खजाना ज्ञान मुरली”
26/12/1984
“सत्यता की शक्ति”
07/01/1985
“नये वर्ष का विशेष संकल्प - ‘मास्टर विधाता बनो’”
18/02/1985
“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”
21/02/1985
“शीतलता की शक्ति”
06/03/1985
“होली का रूहानी रहस्य”
15/03/1985
“मेहनत से छूटने का सहज साधन - निराकारी स्वरूप की स्थिति”
21/03/1985
“स्वदर्शन चक्र से विजय चक्र की प्राप्ति”
06/01/1986
“संगमयुग - जमा करने का युग”
13/01/1986
“ब्राह्मण जीवन - सदा बेहद की खुशियों का जीवन”
15/01/1986
“सस्ता सौदा और बचत का बजट”
20/02/1986
“उड़ती कला से सर्व का भला”
01/03/1986
“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”
07/04/1986
“तपस्वी-मूर्त, त्याग मूर्त, विधाता ही विश्व-राज्य अधिकारी”
21/01/1987
“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”
20/02/1987
“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”
18/03/1987
“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”
25/10/1987
“चार बातों से न्यारे बनो”
02/11/1987
“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”
10/11/1987
“शुभचिन्तक-मणि बन विश्व को चिन्ताओं से मुक्त करो”
14/11/1987
“पूज्य देव आत्मा बनने का साधन - पवित्रता की शक्ति”
27/11/1987
“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”
06/12/1987
“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”
10/12/1987
“तन, मन, धन और सम्बन्ध का श्रेष्ठ सौदा”
14/12/1987
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”
27/12/1987
“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”
31/12/1987
“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”
06/01/1988
“दिल के ज्ञानी तथा स्नेही बनो और लीकेज को बन्द करो”
10/01/1988
“मनन करने की विधि तथा मनन शक्ति को बढ़ाने की युक्तियां”
14/01/1988
“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”
18/01/1988
“‘स्नेह’ और ‘शक्ति’ की समानता”
03/02/1988
“ब्रह्मा मात-पिता की अपने ब्राह्मण बच्चों के प्रति दो शुभ आशाएं”
24/02/1988
“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”
03/03/1988
“होली कैसे मनायें तथा सदाकाल का परिवर्तन कैसे हो?”
15/03/1988
“नई दुनिया की तस्वीर का आधार वर्तमान श्रेष्ठ ब्राह्मण जीवन”
23/03/1988
“दिलाराम बाप के दिलतख्त-जीत दिलरूबा बच्चों की निशानियाँ”
11/11/1989
“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”
15/11/1989
“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”
27/11/1989
“शुभ भावना और शुभ कामना की सूक्ष्म सेवा”
01/12/1989
“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”
09/12/1989
“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”
13/12/1989
“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”
06/01/1990
“होलीहँस की परिभाषा”
10/01/1990
“होलीहँस की विशेषतायें”
14/01/1990
“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”
18/01/1990
“स्वयं और सेवा में तीव्रगति के परिवर्तन का गुह्य राज़”
20/01/1990
“ब्रह्मा बाप के विशेष पाँच कदम”
22/02/1990
“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”
01/03/1990
“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”
13/03/1990
“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”
31/03/1990
“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”
13/12/1990
“तपस्या का फाउण्डेशन बेहद का वैराग्य”
31/12/1990
“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”
25/02/1991
“सोच और कर्म में समानता लाना ही परमात्म प्यार निभाना है”
17/03/1991
“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”
03/04/1991
“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”
10/04/1991
“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”
04/12/1991
“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”
11/12/1991
“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”
18/12/1991
“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”
31/12/1991
“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”
16/03/1992
“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”
01/04/1992
“उड़ती कला का अनुभव करने के लिए दो बातों का बैलेन्स - ज्ञानयुक्त भावना और स्नेह युक्त योग”
08/04/1992
“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
03/10/1992
“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
30/11/1992
“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”
20/12/1992
“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”
31/12/1992
“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”
09/01/1993
“अव्यक्त वर्ष मनाना अर्थात् सपूत बन सबूत देना”
18/01/1993
“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”
26/03/1993
“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”