फरिस्ता स्वरुप - Angel

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25/12/1969“अनासक्त बनने के लिए तन और मन को अमानत समझो”24/01/1970“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”29/05/1970“समीप रत्नों की निशानियां”11/06/1970“विश्वपति बनने की सामग्री”19/06/1970“त्रिमूर्ति लाइट्स का साक्षात्कार”11/07/1970“संगमयुग की डिग्री और भविष्य की प्रालब्ध”25/03/1971“न्यारे और विश्व के प्यारे बनने की विधि”29/06/1971“नालेज की लाइट से पुरुषार्थ का मार्ग स्पष्ट”04/07/1971“याद की सहज विधि”20/08/1971“सबसे श्रेष्ठ तख्त और ताज”21/01/1972“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”22/11/1972“अन्तिम सर्विस का अन्तिम स्वरूप”15/09/1974“पुरुषार्थ का अन्तिम लक्ष्य है अव्यक्त फरिश्ता-पन”05/09/1975“फरिश्ता स्वरूप की स्थिति”21/09/1975“फरिश्ता अर्थात जिसका एक बाप के सिवाए अन्य आत्माओं से कोई रिश्ता नहीं”04/10/1975“अब दृढ़ संकल्प की तीली से कमज़ोरियों के रावण को जलाओ”07/02/1976“अव्यक्त फरिश्तों की सभा”01/01/1979“नए वर्ष के लिए बाप द्वारा कराया गया दृढ़ संकल्प”12/01/1979“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”28/01/1980“सम्पूर्ण ब्रह्मा और ब्राह्मणों के सम्पूर्ण स्वरूप के अन्तर का कारण और निवारण”13/03/1981“डबल रूप से सेवा द्वारा ही आध्यात्मिक जागृति”29/03/1981“ज्ञान का सार ‘मैं और मेरा बाबा’”01/04/1982“भाग्य का आधार त्याग”03/04/1982“सर्वप्रथम त्याग है - देह-भान का त्याग”11/01/1983“समर्थ की निशानी - संकल्प, बोल, कर्म, स्वभाव, संस्कार बाप समान”03/04/1983“प्रथम और अन्तिम पुरूषार्थ”12/12/1983“एकाग्रता से सर्व शक्तियों की प्राप्ति”14/12/1983“प्रभु परिवार - सर्वश्रेष्ठ परिवार”23/12/1983“डबल लाइट की स्थिति से मेहनत समाप्त”19/04/1984“भावुक आत्मा तथा ज्ञानी आत्मा के लक्षण”01/05/1984“विस्तार में सार की सुन्दरता”19/12/1984“सर्वश्रेष्ठ, सहज तथा स्पष्ट मार्ग”18/02/1986“निरन्तर सेवाधारी तथा निरन्तर योगी बनो”20/02/1986“उड़ती कला से सर्व का भला”11/04/1986“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर बनाने की युक्ति”22/11/1987“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”19/03/1988“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”17/12/1989“सदा समर्थ कैसे बनें?”22/02/1990“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”13/03/1990“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”16/03/1992“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”08/04/1992“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”12/11/1992“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”31/12/1992“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”10/01/1994“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”25/01/1994“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”18/02/1994“स्वमान की स्मृति का स्विच ऑन करने से देह भान के अंधकार की समाप्ति”31/12/1995“डायमण्ड वर्ष में फरिश्ता बनकर बापदादा की छत्रछाया और प्यार की अनुभूति करो”12/12/1998“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”31/12/1999“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”16/12/2000“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”15/11/2003“मन को एकाग्र कर, एकाग्रता की शक्ति द्वारा फरिश्ता स्थिति का अनुभव करो''21/10/2005“सम्पूर्ण और सम्पन्न बनने की डेट फिक्स कर समय प्रमाण अब एवररेडी बनो”31/12/2005“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''15/10/2007“संगमयुग की जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए सब बोझ वा बंधन बाप को देकर डबल लाइट बनो”

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