हिंदी Murlis — 1992
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18/01“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”13/02“अनेक जन्म का प्यार सम्पन्न जीवन बनाने का आधार - इस जन्म का परमात्म-प्यार”02/03“महाशिवरात्रि मनाना अर्थात प्रतिज्ञा करना, व्रत लेना और बलि चढ़ना”16/03“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”01/04“उड़ती कला का अनुभव करने के लिए दो बातों का बैलेन्स - ज्ञानयुक्त भावना और स्नेह युक्त योग”08/04“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”15/04“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”24/09“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”03/10“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”13/10“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”03/11“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”12/11“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”21/11“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”30/11“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”10/12"पूर्वज और पूज्य की स्मृति में रहकर सर्व की अलौकिक पालना करो"20/12“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”31/12“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”
