5 सितम्बर शिक्षक दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ के बोकाखाट, चरमपा, रीवा (छिजवार), रिवालसर, फतुहा, गाडरवाड़ा, ज़ीरा व सूरत (वराछा) सेवा केंद्रों पर विविध कार्यक्रम हुए। सभी स्थानों पर शिक्षकों का तिलक, पुष्प व स्मृति-चिह्न देकर सम्मान किया गया।
बोकाखाट व चरमपा में दस शिक्षकों को सम्मानित किया गया। बी.के. रश्मि रेखा ने “जीवन में राजयोग का महत्व” विषय पर भाषण व ध्यान कराया। रीवा (छिजवार) में बी.के. निर्मला दीदी की अध्यक्षता में कार्यक्रम हुआ, जिसमें अतिथियों ने शिक्षक की भूमिका पर विचार रखे और नशा मुक्ति की प्रतिज्ञा भी दिलाई।
रिवालसर में शिक्षकों ने मूल्य आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। गाडरवाड़ा में बी.के. उर्मिला दीदी ने शिक्षक को समाज का चारित्रिक निर्माता बताया। ज़ीरा में स्नेह मिलन व ध्यान सत्र हुआ। सूरत (वराछा) में 100 से अधिक शिक्षकों का सम्मान हुआ। बी.के. रीमा बहन ने कहा कि “इंटरनेट जानकारी देता है, पर शिक्षक समझ प्रदान करता है।”
सभी केंद्रों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, ध्यान व ईश्वरीय संदेश ने वातावरण को प्रेरणादायी व अविस्मरणीय बना दिया।























