बी.के. डॉ. निर्मला दीदी

बी.के. डॉ. निर्मला दीदी

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जीवन यात्रा

राजयोगिनी डॉ. निर्मला दीदी का लौकिक जन्म, वर्ष 1935 में मुम्बई के एक उच्च मध्यमवर्गीय गुजराती परिवार में हुआ था। हालांकि उनके लौकिक पिता ने फिल्म उद्योग में फिल्म वितरक के रूप में सफलता हासिल की, लेकिन दीदी ने मेडिकल कॉलेज से M.B.B.S. की डिग्री प्राप्त की क्योंकि, युवा काल से ही वे गरीबों की सेवार्थ कुछ करना चाहती थी। मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब दीदी अपनी चिकित्सा विशेषज्ञता को गरीब ग्रामीणों के प्रति समर्पित करने के बारे में विचार कर रही थीं, तब 1962 में, 27 वर्ष की आयु में, उन्होंने ब्रह्मकुमारीज का ईश्वरीय ज्ञान प्राप्त करने के साथ-साथ, साकार बाबा और मम्मा की पालना भी प्राप्त की।

मुंबई में अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्हे सुझाव दिया गया कि, वह मुंबई में रहकर 'चिकित्सा और आध्यात्म' द्वारा शहरी समुदाय की सेवा करके लाभ कमा सकती हैं। इस प्रकार उन्होने 1966 में बाबा की राय से मुंबई में 'ईश्वरीय सेवाकेन्द्र' भी खोला तथा अपनी मेडिकल प्रैक्टिस भी जारी रखी। वे यज्ञ की पहली ऐसी कन्या थी जिन्हें सेवाकेन्द्र दहेज के रूप में लौकिक पिता द्वारा प्रदान किया गया। मेडीटेशन के व्यावहारिक लाभों से पूरी तरह से आश्वस्त होकर, उन्होने रोगियों के स्वास्थ्य उपचार में इसका प्रयोग किया, उसी दौरान आप मरीजो को मेडिकेशन (दवाईयों) के साथ-साथ मेडिटेशन का महत्व भी समझाने लगी। उन्होंने विकासशील देशों में होने वाली आम बीमारियों में विशेषज्ञता रखने वाले एक मेडिकल क्लिनिक की स्थापना की और पाया कि, जब उनके रोगियों का मेडीटेशन के साथ उपचार किया गया तो उन्होंने बेहतर प्रतिक्रिया दी। मेडिकल प्रैक्टिस के दौरान आपका अनुभव रहा कि, दवाईयाँ भल बीमारियों को ठीक करने में मददगार हैं पर उनसे स्थायी स्वस्थता प्राप्त नहीं होती है क्योंकि, अधिकतर बीमारियों की जड़ तो इंसान का अपना मन है। ऐसे में मन का 'मानसिक और भावनात्मक सन्तुलन' बनाए रखने का एकमात्र मार्ग अध्यात्म है। उनका मानना था कि, ["मेरी मेडिकल पढ़ाई का उद्देश्य लोगों की मदद करना है, मैं देख रही हूं कि, इन दवाईयो के द्वारा, सीमित तरीके से और थोड़े समय के लिए ही बीमारी को ठीक करने में मदद मिलती है और मरीज़ कुछ समय बाद फिर उसी समस्या के साथ वापस आएंगे। दवाए मदद कर सकती है, लेकिन मुख्य कारण मनोदैहिक लग रहा है।" डॉ. निर्मला कजरिया

सात वर्षों तक मेडिकल प्रैक्टिस करने के बाद, दीदी ने अपनी एनर्जी आध्यात्मिक सेवा में समर्पित करने के बारे में सोचा और 1971 से 1978 तक, उन्होने युनाइटेड किंगडम, अफ्रीका, जिम्बाब्वे, जाम्बिया और मॉरीशस में ब्रह्मकुमारीज का प्रतिनिधित्व किया, ईश्वरीय सेवाओं का शुभारम्भ किया और सेवाकेन्द्र खोलने के निमित्त भी बने। वर्ष 1975 में ऑस्ट्रेलिया की एक संक्षिप्त यात्रा के दौरान उन्होंने वहां राजयोग मेडीटेशन की शुरुआत की। फिर वर्ष 1978 में, वापस ऑस्ट्रेलिया लौटने पर एशिया-ऑस्ट्रेलिया जोन की रीजनल कोओर्डनिटर के रूप में अगले तीस वर्षों तक वहां अपनी सेवाएं देती रहीं। बाद में; 1978 से 2008; 30 वर्षों तक सिडनी में रहते हुए अन्य 17 देशों में सेवाओं का विस्तार किया।

वर्ष 2009 से, डॉ. निर्मला दीदी ने ब्रह्मकुमारीज के आध्यात्मिक मुख्यालय, माउंट आबू, राजस्थान, भारत में वरिष्ठ राजयोग शिक्षक के रूप में कार्य शुरू किया। साथ ही उन्होंने 'एशिया-ऑस्ट्रेलिया जोन' की देखभाल करते हुए 'मेडीटेशन और आध्यात्मिक जीवन शैली' के लाभ को साझा करते हुए विश्व स्तर पर बड़े पैमाने पर यात्राए की। ऐसे समय पर, जब भारतीय महिलाओं में आमतौर पर नेतृत्व करने की क्षमता नहीं थीं, उन्होंने न केवल अपना रास्ता खुद चुना बल्की पारिवारिक जीवन त्यागकर, अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए विनम्रतापूर्वक अपना स्वांस, समय और एनर्जी समर्पित कर दी। वर्ष 2021 में , उन्हें ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की 'संयुक्त प्रशासनिक प्रमुख' नियुक्त किया गया।

बी. के. डॉ. निर्मला एक डॉक्टर और राजयोगी

डॉ. निर्मला ने एक मेडिकल डॉक्टर के व्यावहारिक गुणों को एक योगी की सूक्ष्म आध्यात्मिक समझ के साथ जोड़ा। उन्हें व्यक्तिगत विकास और कल्याण में विशेष रुचि थी। वह यह देखकर मंत्रमुग्ध हो गई कि, कैसे मेडीटेशन के द्वारा मानसिक और भावनात्मक संतुलन बढ़ाया और समर्थित किया जा सकता है। उनका दृढ़ विश्वास था कि, "मेडीटेशन हमें तनाव को समझने में मदद कर सकता है और इससे पहले कि, वो हम पर हावी हो जाएं, हम उसकी रोकथाम कर सकते है। उनका मानना था कि, मेडीटेशन हमें अपने विचारों को सकारात्मक रूप से नियंत्रित करना और अपने मानसिक दृष्टिकोण को समायोजित करने में मदद करता है ताकि मन और शरीर अपने उचित संतुलन की स्थिति में आ सकें। साथ ही यह हमारी रचनात्मक और सर्जनात्मक जीवन शैली के लिए हमारी प्रतिभा और गुणों के विकास में भी मददगार होता है।"

एक शिक्षक एवं सक्षम प्रशासक

एक वरिष्ठ शिक्षिका के रूप में, डॉ. निर्मला जटिल आध्यात्मिक अवधारणाओं को बड़ी स्पष्टता, सरलता और व्यावहारिकता के साथ समझाने की क्षमता के लिए भारत और विदेशों में बी. के. समुदाय में बहुत लोकप्रिय थीं। उन्होंने दुनिया भर में बी. के. केंद्रों का दौरा किया, कक्षाएं और रिट्रीट आयोजित कीं, और आध्यात्मिक परामर्श प्रदान किया। दीदी ने प्रमुख सम्मेलनों और अन्य कार्यक्रमों को संबोधित किया; विभिन्न समुदाय और व्यापारिक नेताओं, सरकारी प्रमुखों और अन्य विचारकों के साथ मंच साझा किया।

विभिन्न वरिष्ठ प्रशासनिक भूमिकाओं में, डॉ. निर्मला ने बड़े पैमाने पर सम्मेलनों की योजनाओं का निरीक्षण किया, व्यापक संसाधनों का प्रबंधन किया और सेवाधारियो के एक बड़े कार्यबल को प्रेरित किया।

भारत में, ब्रह्मकुमारीज़ के आध्यात्मिक मुख्यालय में, वह 'ज्ञान सरोवर एकेडमी फॉर ए बेटर वर्ल्ड' के नाम से प्रचलित परिसर की निदेशक थीं, जो दुनिया भर के प्रोफेशनल और मान्यगण लोगों के लिए आध्यात्मिक शिक्षा कार्यक्रमों की मेजबानी करती है।

वह भारत में ब्रह्मकुमारीज़ आध्यात्मिक मुख्यालय में 'वर्ल्ड रिन्यूअल स्पिरिचुअल ट्रस्ट' की ट्रस्टी थीं।

विश्व स्तर पर, वह 'एशिया-पेसीफिक क्षेत्र' में ब्रह्मकुमारीज की रीजनल कोओर्डीनेटर थीं, जहाँ 1979 से, उन्होंने 17 देशों में बी.के. कार्यक्रमो के विस्तार उनकी देखरेख में हुए थे। वर्ष 2021 में, उन्हें ब्रह्मकुमारीज संस्था की संयुक्त प्रशासिका नियुक्त किया गया था।

दीदी ने परमात्मा के प्रति अपना जीवन समर्पित कर दुनिया भर में "डबल डॉक्टरः शरीर और आत्मा" के रूप में सेवाए की। कई जिम्मेवारियों को निभाने में "बिजी रहते इजी रहने का बहुत सुन्दर बैलेंस" आपके प्रैक्टिकल जीवन से बखूबी दिखाई देता था। वे बहुत ही मितभाषी और सारगर्भित बातें करते थे। सदा भौतिक दुनिया से उपराम, अपनी कर्मातीत अवस्था की ओर तीव्र गति से उड़ने वाले एक मुक्त उड़ते पंछी ने "20 अक्टूबर 2023" को आनंद और शांति की अंतिम यात्रा के लिए अपने नश्वर शरीर का त्याग कर दिया। सर्व आत्माओं को दुआओं से भरपूर करनेवाली दीदी; आप एक महादानी, वरदानी पवित्र फरिश्ते के रूप में सदा हमारे दिलों में जीवित रहेंगी।

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