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Being Bliss 24
BK Shivani · 31:09
Essence
एक पल ठहरकर सोचिए…
जब हम गुस्सा करते हैं… किसी अपने पर।
इरादा हमारा उनकी भलाई होता है…
लेकिन उस क्षण हमारे विचार क्या होते हैं?
क्या तुमसे कुछ नहीं होता? तुम हमेशा ऐसे ही हो!
क्या हम महसूस करते हैं… कि गलती सुधारते-सुधारते हम व्यक्ति को ही गलत ठहराने लगते हैं?
और उस क्षण… हमारे मन का स्नेह कहाँ खो जाता है?
कभी-कभी हम सोचते हैं… गुस्सा तो concern है। अपनों की भलाई के लिए है।
लेकिन क्या अच्छी intention हमारे हर विचार को अच्छा बना देती है?
क्योंकि हर thought एक energy है… जो सबसे पहले हमें ही महसूस होती है।
Being Bliss हमें एक गहरी बात समझने के लिए आमंत्रित करता है—
शायद बदलाव की शुरुआत दूसरों को बदलने से नहीं… अपने विचारों की quality बदलने से होती है।
गलती पर बात करना… और व्यक्ति को गलत ठहराना… क्या दोनों एक ही हैं?
तो रुककर सोचिए…
क्या मैं गलती सुधार रहा हूँ… या अपने गुस्से से अपने ही स्नेह को रोक रहा हूँ?



