
क्या सच में परिस्थितियाँ हमारी खुशी तय करती हैं?
BK Shivani
Essence
हम अक्सर कहते हैं—
"उसने ऐसा कहा, इसलिए मुझे बुरा लग गया..." "परिस्थिति ही ऐसी थी, परेशान होना स्वाभाविक था..." "कोई भी मेरी जगह होता, तो वही प्रतिक्रिया देता..."
लेकिन क्या सचमुच ऐसा है... अगर बाहर की परिस्थितियाँ हर दिन बदल रही हैं, तो क्या हमारी खुशी भी उनके साथ बदलती रहनी चाहिए?
क्या हमारी मनःस्थिति वास्तव में परिस्थितियों के हाथ में है... या हर परिस्थिति के बीच भी हमारे पास एक ऐसा चुनाव है, जिसे हम अक्सर पहचान नहीं पाते?
जब बाहर सब कुछ अनिश्चित हो— रिश्ते, काम, स्वास्थ्य, लोग और हालात... तो क्या भीतर भी सब कुछ हिलना ज़रूरी है?
Being Bliss का यह भाग एक ऐसे प्रश्न के सामने खड़ा करता है, जो शायद हमें अपनी खुशी, अपनी प्रतिक्रियाओं और अपनी आंतरिक शक्ति को एक बिल्कुल नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करे।



