
Vysan Dan Karo

Vysan Dan Karo
Lyrics
व्यसन दान करो कराओ बुराइयों से मुक्त हो जाओ
महायज्ञ रचा है प्रभु ने उसमें आहुति इनकी पाओ
व्यसन दान करो कराओ बुराइयों से मुक्त हो जाओ
व्यसनों ने मानव को उलझाया परिवार को दुःखी बनाया
व्यसनों ने मानव को उलझाया परिवारो को दुःखी बनाया
तनाव भरा मन दर्द भरा तन
तनाव भरा मन दर्द भरा तन व्यसनों से सौगात पाया
इन्हें देख रावण भी घबराएं अब और ना इनको बढ़ाओं
व्यसन दान करो कराओ बुराइयों से मुक्त हो जाओ
महायज्ञ प्रभु ने रचा है उसमें आहुति इनकी पाओ
व्यसन छोड़ हर भ्रम तोड़ प्रभु को कर दे सर्वस्व अर्पण
व्यसन छोड़ हर भ्रम तोड़ प्रभु को कर दे सर्वस्व अर्पण
नवजीवन वो दे देगा
नवजीवन वो दे देगा निर्मल बनेगा मन दर्पण
घोर कलियुग में रहते भी दैवी दर्शन स्वयं से कराओ
घोर कलियुग में रहते भी दैवी दर्शन स्वयं से कराओ
व्यसन दान करो कराओ बुराइयों से मुक्त हो जाओ
इन्हें देख रावण भी घबराएं अब और ना इनको बढ़ाओं
घोर कलियुग में रहते भी दैवी दर्शन स्वयं से कराओ
व्यसन दान करो कराओ
बुराइयों से मुक्त हो जाओ
बुराइयों से मुक्त हो जाओ



