ज्ञान स्वरुप - Knwoledgeful
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20/08/1971“सबसे श्रेष्ठ तख्त और ताज”04/03/1972“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”22/11/1972“अन्तिम सर्विस का अन्तिम स्वरूप”23/01/1973“सम्पूर्ण मूर्त बनने के चार स्तम्भ”28/06/1973“योगयुक्त होने से स्वत: युक्तियुक्त संकल्प, बोल और कर्म होंगे”20/02/1974“सदा सहयोगी एवं सहज योगी बनो”23/05/1974“हद की आकर्षणों या विभूतियों से परे रहने वाला ही सच्चा वैष्णव”04/07/1974“स्व-स्थिति की श्रेष्ठता से व्यर्थ संकल्पों की हलचल समाप्त”08/10/1975“मास्टर ज्ञान-स्वरूप बनने की प्रेरणा”12/01/1977“संगमयुग पर ‘बालक सो मालिक’ बनने वालों के तीनों कालों का साक्षात्कार”31/05/1977“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”14/01/1979“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”12/03/1982“चैतन्य पुष्पों में रंग, रुप, खुशबू का आधार”15/04/1984“स्नेही, सहयोगी, शक्तिशाली बच्चों की तीन अवस्थाएं”08/04/1992“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”25/11/1993“सहज सिद्धि प्राप्त करने के लिए ज्ञान स्वरूप प्रयोगी आत्मा बनो”
